बी के झा
NSK

नई दिल्ली / मुंबई, 7 फरवरी
डबडबी आंखें, कांपती आवाज़ और एक बहन की बेबसी—बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली का यह भावुक दृश्य सिर्फ एक पारिवारिक पीड़ा नहीं, बल्कि भारत के सामने खड़े एक बड़े सवाल की तस्वीर बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जेल में सितंबर 2024 से बिना मुकदमे कैद अपने भाई, रिटायर्ड मेजर विक्रांत कुमार जेटली की वतन वापसी के लिए अब सेलिना ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है।
एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा—“प्लीज़! हमारे सैनिक को वापस ले आइए। उन्होंने अपनी पूरी जवानी देश को दी है। अगर उन्होंने कुछ गलत किया होता, तो अब तक मुकदमा शुरू हो गया होता।
”कौन हैं मेजर विक्रांत जेटली?
मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत कुमार जेटली भारतीय सेना की एलीट 3 पैरा स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा रह चुके हैं। उन्हें वीरता के लिए COAS प्रशस्ति पत्र भी मिल चुका है। 2016 से वे यूएई में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे।यूएई प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर मामलों से जुड़े कथित जासूसी आरोपों में हिरासत में लिया है, लेकिन अब तक:न तो औपचारिक आरोप पत्र दाखिल हुआन ही मुकदमे की स्पष्ट प्रक्रिया शुरू हुई
दिल्ली हाई कोर्ट की दखल: कानूनी राहत की पहली किरण
इस पूरे मामले में इस सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि:मेजर विक्रांत को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएUAE की लॉ फर्म अलमारी एंड पार्टनर्स को उनका केस मुफ्त में लड़ने के लिए अधिकृत किया जाए सेलिना जेटली ने इसे “भाई की गरिमा की वापसी” करार दिया।
कानूनविदों का सवाल: बिना मुकदमे 18 महीने की कैद कैसे?
संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का मानना है कि यह मामला मानवाधिकार और कांसुलर एक्सेस से जुड़ा गंभीर प्रश्न उठाता है।एक वरिष्ठ कानूनविद के अनुसार,“किसी भी देश में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अनिश्चितकाल तक बिना मुकदमे हिरासत अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है। भारत को इस मामले में राजनयिक दबाव बढ़ाना चाहिए।”
रक्षा विशेषज्ञ: “यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, सैन्य मनोबल का मामला है
”रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि यह केस सिर्फ एक रिटायर्ड अफसर का नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के सम्मान और मनोबल से जुड़ा है।
एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल कहते हैं,“अगर एक स्पेशल फोर्सेज अधिकारी विदेशी जेल में बिना मुकदमे पड़ा है और देश चुप है, तो यह आने वाली पीढ़ी के सैनिकों के मनोबल पर असर डालता है।”कूटनीतिक चुनौती: मित्र देश, लेकिन संवेदनशील मामला UAE भारत का रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। ऐसे में सरकार खुले टकराव से बचते हुए बैकडोर डिप्लोमेसी पर जोर दे रही है।
सेलिना जेटली ने कतर में फंसे भारतीय नौसेना अधिकारियों की सकुशल वापसी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो समाधान संभव है।
राजनीतिक विश्लेषक: “मानवीय मुद्दा अब राजनीतिक नैरेटिव बन रहा है”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला धीरे-धीरे मानवीय अपील से राजनीतिक विमर्श की ओर बढ़ रहा है।एक विश्लेषक के अनुसार,“सरकार के लिए यह संतुलन कठिन है—एक ओर रणनीतिक साझेदारी, दूसरी ओर देश के सैनिक की प्रतिष्ठा। लेकिन चुप्पी भी अब सवाल बनती जा रही है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया: “सरकार बताए—क्या कदम उठाए गए?
”कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,“यह राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का प्रश्न है। सरकार बताए कि अब तक क्या कूटनीतिक प्रयास किए गए?
”शिक्षाविदों की टिप्पणी: राष्ट्र, न्याय और नैतिक जिम्मेदारी
वरिष्ठ शिक्षाविदों का मानना है कि राष्ट्र सिर्फ सीमाओं से नहीं, बल्कि अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से पहचाना जाता है।एक शिक्षाविद कहते हैं,“अगर एक पूर्व सैनिक विदेशी जेल में न्याय के इंतज़ार में है, तो यह सिर्फ कानूनी नहीं, नैतिक संकट भी है।”
निष्कर्ष:
एक बहन की पुकार, एक राष्ट्र की परीक्षासेलिना जेटली की अपील भावनात्मक जरूर है, लेकिन सवाल ठोस हैं—
क्या भारत अपने सैनिक को समय पर कानूनी और कूटनीतिक संरक्षण दे पाएगा?क्या मित्र देशों के साथ संबंध मानवीय न्याय से ऊपर होंगे?यह मामला अब एक अभिनेत्री की निजी लड़ाई नहीं रहा—
यह भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता, सैन्य सम्मान और नैतिक नेतृत्व की परीक्षा बन चुका है।
