बंगाल का बड़ा यू-टर्न: अब लागू होगा नया वक्फ कानून, महीनों की ना के बाद ममता सरकार ने मानी केंद्र की बात; 82 हजार वक्फ संपत्तियों का डेटा 6 दिसंबर तक अपलोड करने का आदेश

बी के झा

नई दिल्ली/ कोलकाता, 29 नवंबर

पश्चिम बंगाल में महीनों की टालमटोल और कड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद आखिरकार ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र के वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लागू करने का फैसला कर लिया है।राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारी (DM) को आदेश दिया है कि राज्य की करीब 82,000 वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण 6 दिसंबर 2025 तक केंद्र सरकार के पोर्टल umeedminority.gov.in पर अपलोड कर दिया जाए।सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने सभी राज्यों को निर्विवाद वक्फ संपत्तियों का डेटा निर्धारित समय-सीमा में अपलोड करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद बंगाल प्रशासन ने तत्काल तैयारी शुरू कर दी है।ममता सरकार का यू-टर्न क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय राजनीतिक रूप से अत्यंत अहम माना जा रहा है।क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अप्रैल 2025 में सार्वजनिक मंच से घोषणा की थी:मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33% मुसलमानों का राज्य हैं, और मेरा दायित्व है कि मैं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करूं।”

उनके इस बयान के बाद राज्य में व्यापक विरोध और रैलियां भी हुई थीं।लेकिन:अदालत ने राज्य सरकार को कोई राहत नहीं दी,केंद्र की समय-सीमा नजदीक थी,और अधिनियम की धारा 3B के कारण वक्फ संपत्तियों का डेटा अपलोड करना कानूनी रूप से अनिवार्य था।इसके बाद राज्य सरकार के पास कानून लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

जिलाधिकारियों को भेजा गया 8-बिंदु एक्शन

प्लानअल्पसंख्यक मामलों के विभाग के सचिव पी.बी. सलीम ने सभी डीएम को विस्तृत निर्देश जारी किया है। इनमें शामिल हैं—प्रमुख निर्देश

1. जिले में स्थित सभी निर्विवाद वक्फ संपत्तियों की सूची तैयार की जाए।

2. मुतवल्लियों, इमामों, मुअज्जिनों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें करके उन्हें प्रक्रिया समझाई जाए।

3. डेटा अपलोड के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता दी जाए।

4. जरूरत पड़ने पर फैसिलिटेशन सेंटर खोले जाएँ।

5. समय-सीमा के भीतर बिना देरी पूरी प्रक्रिया समाप्त की जाए।विभाग का कहना है कि 8,063 मुतवल्लियों को अपनी संपत्तियों की जानकारी केंद्र के पोर्टल पर उपलब्ध करानी होगी।वक्फ कानून में बदलाव क्या हैं

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन पर काफी विवाद भी हुआ था। प्रमुख बदलाव:

1. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्तियह पहली बार हुआ है कि बोर्ड व ट्रिब्यूनल में गैर-मुसलमान शामिल किए जा सकेंगे।

2. वक्फ संपत्ति घोषित करने का अंतिम अधिकार सरकार के पासपहले वक्फ बोर्ड तय करता था कि कौन-सी संपत्ति वक्फ मानी जाएगी। अब अंतिम निर्णय सरकार लेगी।

3. डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्यसभी संपत्तियों का विवरण केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करना कानूनन जरूरी होगा।

4. पारदर्शिता और विवाद-निपटान पर जोरवक्फ से जुड़ी संपत्तियों में गड़बड़ियों और अनियमितताओं को रोकने के लिए नया ढांचा लागू किया गया है।कुछ प्रावधान अभी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के अधीन हैं, लेकिन कानून के अनुपालन पर कोई रोक नहीं है।

राजनीतिक मायने: बंगाल में हलचल तेजममता बनर्जी द्वारा लंबे समय तक कानून का विरोध करने के बाद अचानक इसे लागू करने का फैसला राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि:सरकार पर कानूनी दबाव बढ़ रहा था,केंद्र से सीधे टकराव के हालात बन रहे थे,और राज्य प्रशासन के लिए पेंडिंग फाइलें संभालना चुनौती बन गया था।इसलिए सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े।

विपक्ष ने इसे “ममता सरकार की हार” बताया है, जबकि टीएमसी इसे “प्रशासनिक बाध्यता” कह रही है

।निष्कर्ष

बंगाल में वक्फ अधिनियम 2025 का लागू होना न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बड़ा मोड़ है।अब राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—

6 दिसंबर तक 82,000 वक्फ संपत्तियों का पूरा डेटा केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करनाआने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति और प्रशासन दोनों में केंद्र में रहने वाला है।

NSK

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