बी के झा
NSK


’ कोलकाता/ नई दिल्ली, 7 दिसंबर
कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड ग्राउंड में आयोजित विशाल गीता पाठ महायज्ञ ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। पूरे राज्य से उमड़े लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और भाजपा नेताओं ने इसे सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि “सनातन चेतना का विराट ” बताया। आयोजन की भव्यता से उत्साहित भाजपा नेताओं ने कहा कि समय आ गया है कि हिंदू एकजुट होकर राज्य में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव का सामना करें।
हिंदू विभाजित रहे तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ही भूमि पर परदेसी बन जाएंगी’ — सुकांत मजूमदार केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा:बंगाल का निर्माण विभाजन के समय हिंदुओं की सुरक्षा के लिए हुआ था। लेकिन आज हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसे रोकना आवश्यक है। यदि हिंदू समय रहते एकजुट न हुए, तो आने वाले वर्षों में वे अपनी ही भूमि पर द्वितीय श्रेणी के नागरिक बन जाएंगे।”उन्होंने कहा कि राज्य में हो रहे बड़े पैमाने पर धार्मिक और जनसंख्या परिवर्तन के संकेत चिंताजनक हैं।
मजूमदार ने स्पष्ट कहा—“यह केवल राजनीति नहीं, अस्तित्व का प्रश्न है।”‘सबसे अधिक पीड़ा बंगाली हिंदुओं ने झेली है’ — दिलीप घोष भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने विभाजन पर बात करते हुए कहा:भारत के विभाजन की सबसे बड़ी कीमत बंगाली हिंदुओं ने चुकाई। आज भी बांग्लादेश में हमारे भाई प्रताड़ना झेल रहे हैं—
मंदिर टूट रहे हैं, कन्याओं के अपहरण हो रहे हैं।”घोष ने चेताया कि पश्चिम बंगाल में भी ऐसे ही संकेत दिखाई दे रहे हैं।उन्होंने कहा:यदि बंगाल को बांग्लादेश बनने से रोकना है तो साधु-संतों और हिंदू समाज को जागृत होना होगा। राम मंदिर बनने के बाद यह नई चेतना की शुरुआत है।”ममता बनर्जी क्यों नहीं आईं?
विपक्ष ने उठाया सवाल कार्यक्रम को लेकर दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी:जब राज्य के करोड़ों हिंदू गीता पाठ में शामिल होकर एकजुटता दिखा रहे हैं, ऐसे अवसर को कोई सच्चा हिंदू टाल नहीं सकता। यदि वे इस निमंत्रण को नज़रअंदाज़ करती हैं, तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिगेड मैदान में उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि बंगाल में “हिंदू आत्मसम्मान की नई लहर उठ रही है।
”पूरे आयोजन का बड़ा संदेश — ‘सनातन जागरण का समय आ गया है’गीता पाठ महायज्ञ में शामिल साधु-संतों ने भी चेतावनी दी कि:राज्य में कई क्षेत्रों में हिंदुओं की संख्या लगातार घट रही है धार्मिक स्थलों के विरुद्ध हमलों की घटनाएँ बढ़ रही हैं
राजनीतिक कारणों से हिंदू मुद्दों को हाशिये पर रखा जा रहा है एक प्रमुख संत ने कहा:बंगाल चैतन्य महाप्रभु की भूमि है। इसे कश्मीर की राह पर नहीं जाने देंगे।राजनीतिक पंडित क्या कह रहे हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि—भाजपा “बंगाल की सांस्कृतिक पहचान बनाम जनसांख्यिकीय परिवर्तन” के मुद्दे को 2026 विधानसभा चुनाव तक मुख्य विमर्श बनाना चाहती है
गीता पाठ कार्यक्रम भाजपा के लिए “मेजर पॉलिटिकल शो ऑफ स्ट्रेंथ” है ममता सरकार पर “तुष्टिकरण” का आरोप आने वाले समय में और मुखर होगा
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा:यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। बंगाल में हिंदू वोट का एकीकरण ही उनका लक्ष्य है।
”निष्कर्ष
गीता पाठ कार्यक्रम का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद तीखा था।भाजपा नेताओं ने साफ कह दिया—
“यदि हिंदू अब भी नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां बंगाल में सुरक्षित नहीं रहेंगी।’’साधु-संतों से लेकर राजनीतिक नेताओं तक, सभी ने एक स्वर में कहा कि“सनातन की रक्षा, बंगाल की रक्षा — दोनों अब एक ही लक्ष्य हैं।
