बी के झा
नई दिल्ली , 2 फरवरी
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने कर राजस्व को लेकर उत्साहजनक अनुमान पेश किए हैं। सरकार के मुताबिक, ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 44.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए लगातार नौवें बजट में एक ओर मजबूत टैक्स कलेक्शन की तस्वीर उभरी, तो दूसरी ओर बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।डायरेक्ट टैक्स पर सरकार का भरोसा सरकारी अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 26.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें पर्सनल इनकम टैक्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी। व्यक्तिगत आयकर संग्रह में 11.73 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इसके 14.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 11 प्रतिशत बढ़कर 12.31 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई है।
रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि डायरेक्ट टैक्स के लिए टैक्स ब्वॉयेंसी 1.14 रहने का अनुमान है, जो यह संकेत देता है कि कर संग्रह की रफ्तार अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से तेज हो सकती है।
इनडायरेक्ट टैक्स: मिला-जुला संकेत
इनडायरेक्ट टैक्स के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी संतुलित दिखाई देती है। सरकार ने कस्टम ड्यूटी से 2.71 लाख करोड़ रुपये और एक्साइज ड्यूटी से 3.89 लाख करोड़ रुपये के कलेक्शन का अनुमान लगाया है। हालांकि, जीएसटी से होने वाली आय में 2.59 प्रतिशत की मामूली गिरावट का अनुमान है और यह 10.19 लाख करोड़ रुपये रह सकती है।आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जीएसटी कलेक्शन में संभावित गिरावट उपभोग में सुस्ती और कुछ कर दरों में तर्कसंगत बदलाव का परिणाम हो सकती है।
अर्थशास्त्रियों की राय: मजबूत राजस्व, लेकिन जोखिम बरकरार
वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार के अनुसार, “सरकार का कर राजस्व अनुमान यह दिखाता है कि औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल ट्रांजैक्शन और टैक्स अनुपालन में सुधार का सीधा असर कलेक्शन पर दिख रहा है।”हालांकि वे आगाह करते हैं कि वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिका-चीन तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: आम आदमी पर बोझ का सवाल
विपक्षी दलों ने कर राजस्व के इन अनुमानों पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “सरकार टैक्स कलेक्शन बढ़ाने में तो सफल दिख रही है, लेकिन सवाल यह है कि इसका लाभ आम नागरिक और मध्यम वर्ग तक कितनी तेजी से पहुंचेगा।”कुछ विपक्षी दलों ने जीएसटी कलेक्शन में गिरावट के अनुमान को उपभोग में कमजोरी का संकेत बताया और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देने की मांग की।
सर्राफा बाजार में भूचाल
बजट के ठीक बाद कमोडिटी बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में दो दिनों के भीतर भारी गिरावट दर्ज की गई। चांदी के भाव दो दिन में 1.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक टूट गए, जबकि सोना करीब 45 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया।कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफा वसूली और अत्यधिक तेजी के बाद तकनीकी सुधार का नतीजा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: अभी थमी नहीं है गिरावट
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विशेषज्ञ प्रणव मेर का कहना है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी में और तकनीकी सुधार यानी गिरावट देखी जा सकती है। उनके अनुसार, कीमतें फिलहाल अपने शिखर से काफी नीचे आ चुकी हैं और स्थिरता आने में समय लगेगा।
निष्कर्ष:
आंकड़ों में मजबूती, जमीनी अर्थव्यवस्था की परीक्षा
बजट 2026-27 के कर राजस्व अनुमान सरकार के आत्मविश्वास को दर्शाते हैं। टैक्स कलेक्शन में संभावित वृद्धि से राजकोषीय स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है, लेकिन उपभोग, महंगाई और निवेशकों के भरोसे जैसे कारक आने वाले महीनों में असली परीक्षा लेंगे।
एक ओर सरकारी खजाने में बढ़ोतरी की उम्मीद है, तो दूसरी ओर बाजार संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक संतुलन बनाए रखना सरकार और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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