बांग्लादेश से दोस्ती पाकिस्तान को पड़ी भारी व्यापार घाटा बढ़ा, रणनीतिक उम्मीदें टूटीं, भारत बना अप्रत्याशित सहारा

बी के झा

NSK

इस्लामाबाद/ढाका / न ई दिल्ली, 27 जनवरी

अगस्त 2024 में जब बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट हुआ, तो इस घटनाक्रम का सबसे ज़्यादा जश्न अगर कहीं मनाया गया, तो वह इस्लामाबाद था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार उसके लिए दक्षिण एशिया में बंद हो चुके दरवाज़ों को खोल देगी।वास्तव में, बीते पचास वर्षों में जो नहीं हुआ था, वह महज़ छह महीनों में हो गया—ढाका और इस्लामाबाद के बीच सीधा समुद्री व्यापार शुरू हुआ, रिश्तों में नई गर्मजोशी आई और रक्षा सहयोग के संकेत भी मिलने लगे।लेकिन एक साल के भीतर ही यह “नई दोस्ती” पाकिस्तान के लिए घाटे का सौदा साबित होती दिख रही है।आसमान छूता व्यापार घाटास्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 (जुलाई–दिसंबर) के आंकड़े पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों की कहानी खुद बयान कर देते हैं।नौ पड़ोसी देशों के साथ पाकिस्तान का व्यापार घाटा—44.42% बढ़कर7.683 अरब डॉलर तक पहुंच गया हैजबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.320 अरब डॉलर थागल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्यतः निर्यात में गिरावट और आयात पर निर्भरता के कारण हुई है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही IMF, विदेशी कर्ज़ और मुद्रा संकट के दबाव में है—ऐसे में क्षेत्रीय व्यापार से राहत की उम्मीदें अब धुंधली पड़ती दिख रही हैं।अफगानिस्तान से तनाव, व्यापार बंदस्थिति तब और बिगड़ी जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया।पिछले साल दोनों देशों की सेनाएं सीधे सीमा संघर्ष में उलझ चुकी थीं, जिसे कतर और तुर्की की मध्यस्थता से शांत कराया गया।लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने 10 अक्टूबर 2025 को अफगानिस्तान के साथ सभी प्रकार के व्यापार पर रोक लगा दी।इस फैसले ने पूरे क्षेत्र के ट्रेड फ्लो को झटका दिया और पाकिस्तान की निर्यात संभावनाएं और सिकुड़ गईं।

बांग्लादेश से भी नहीं मिली राहत

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि बांग्लादेश के साथ नई नज़दीकी इस नुकसान की भरपाई कर देगी, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं।पाकिस्तानी अख़बार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार—बांग्लादेश को पाकिस्तान के शिपमेंट में छमाही अवधि में नेगेटिव ग्रोथ दर्ज की गईं हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान को अपने तथाकथित “सदाबहार दोस्तों” से भी अपेक्षित व्यापारिक लाभ नहीं मिला।

भारत बना अप्रत्याशित सहारा

इस पूरे परिदृश्य में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसी अवधि में पाकिस्तान से भारत को होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।राजनीतिक और कूटनीतिक तल्ख़ियों के बावजूद, भारत के साथ सीमित लेकिन स्थिर व्यापार पाकिस्तान के लिए ऑक्सीजन लाइन की तरह काम करता दिख रहा है।यह तथ्य अपने आप में इस क्षेत्र की जटिल वास्तविकता को उजागर करता है—जहां राजनीति भले टकराव की हो, अर्थव्यवस्था व्यवहारिक रास्ते खोज ही लेती है।

रक्षा सहयोग: रणनीति बनाम हकीकत

मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहे।इसी महीने की शुरुआत में—बांग्लादेश वायुसेना प्रमुख हसन महमूद खान ने पाकिस्तान का दौरा किया उन्होंने एयर चीफ जहीर अहमद बाबर सिद्धू और आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की इस दौरान पाकिस्तान ने बांग्लादेश को JF-17 थंडर फाइटर जेट्स का प्रस्ताव दिया—जो चीन के सहयोग से विकसित मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है।

हालांकि, रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक—“आर्थिक कमजोरी के दौर में पाकिस्तान के लिए ऐसे सौदों को अंतिम रूप देना उतना आसान नहीं है, जितना कूटनीतिक बयानों में दिखता है।

निष्कर्ष

बांग्लादेश के साथ बढ़ती नज़दीकी से पाकिस्तान को जिस रणनीतिक और आर्थिक राहत की उम्मीद थी, वह फिलहाल हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रही है।व्यापार घाटा बढ़ रहा है, पड़ोसियों से रिश्ते तनावपूर्ण हैं और अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है।

विडंबना यह है किजिस भारत को पाकिस्तान लंबे समय तक अलग-थलग रखने की नीति पर चलता रहा,आज वही भारत उसके लिए सीमित ही सही, लेकिन सबसे स्थिर व्यापारिक सहारा बनकर उभर रहा है।दक्षिण एशिया की यह तस्वीर साफ़ इशारा करती है—

भू-राजनीति में भावनाएं नहीं, अंततः आंकड़े और अर्थशास्त्र ही फैसला करते हैं।

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