बी के झा
NSK


बिलासपुर, छत्तीसगढ़, 4 नवंबर
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। बिलासपुर के लालखदान स्टेशन के पास एक लोकल पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस भीषण टक्कर में 9 यात्रियों की मौत हो गई है जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोरबा से बिलासपुर की ओर आ रही लोकल पैसेंजर ट्रेन किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलत ट्रैक पर आ गई, जहां सामने से मालगाड़ी तेज रफ्तार से आ रही थी।
शाम करीब 4 बजे के आसपास दोनों ट्रेनों में भीषण टक्कर हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो डिब्बे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कई यात्री अंदर फंस गए।
राहत-बचाव कार्य में जुटी टीमें
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे, जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। गैस कटर की मदद से डिब्बों को काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला जा रहा है।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश और बिलासपुर मंडल रेल प्रबंधक राजमल खोईवाल भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों को तत्काल बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और बचाव कार्य में कोई ढिलाई न बरती जाए।
रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
दुर्घटना के बाद रेलवे ने यात्रियों के परिजनों की सुविधा के लिए कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:चंपा जंक्शन: 808595652रायगढ़: 975248560पेंड्रा रोड: 8294730162दुर्घटना स्थल: 9752485499, 8602007202
मुआवजे की घोषणा
रेल मंत्रालय ने हादसे में मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और घायलों को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एयरलिफ्ट कर बिलासपुर और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
जनता में शोक की लहर
हादसे की खबर फैलते ही इलाके में मातम का माहौल है। स्टेशन पर यात्रियों के परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू टीमों के साथ मिलकर मदद का हाथ बढ़ाया।रेल हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक यात्रियों की जान इस तरह लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी
