बी के झा
NSK


पटना / नई दिल्ली, 27 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए के नेता लालू प्रसाद यादव के ‘जंगलराज’ का मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर आरजेडी ‘वक्फ बिल’ को लेकर मुस्लिम वोटरों को साधने में जुटी दिखाई दे रही है।
महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव लगातार चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं। उन्होंने हाल ही में कटिहार में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि “अगर बिहार में भाजपा की सरकार आई तो वक्फ अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।”
तेजस्वी का यह बयान सामने आते ही प्रदेश की सियासत और भी गर्म हो गई है।तेजस्वी आज सारण में एक बड़ी रैली को संबोधित करने वाले हैं।
वहीं, महागठबंधन ने ऐलान किया है कि वह कल अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करेगा। राजनीतिक गलियारों में इस घोषणापत्र को लेकर भी हलचल तेज है। माना जा रहा है कि इसमें रोजगार, शिक्षा, महंगाई और सामाजिक न्याय से जुड़े वादों को प्रमुखता दी जाएगी।
जेडीयू का पलटवार तेजस्वी के बयान पर जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “महागठबंधन के नेता हवा-हवाई वादे कर जनता को गुमराह करने में लगे हैं। बिहार के प्रबुद्ध नागरिक अब भी उनके जंगलराज को नहीं भूले हैं। अब फिर वही पुराने अंदाज में डर और धमकी की राजनीति शुरू कर दी गई है।”
भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रियातेजस्वी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और उनके पाले इस्लामी कट्टरपंथी संगठन चाहे जितनी कोशिश कर लें, अगर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में किसी ने इस बिल को कमजोर करने की कोशिश भी की, तो उसे कुचल दिया जाएगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों की रायराजनीतिक जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीखें पास आ रही हैं, वैसे-वैसे नेता अपने शब्दों की मर्यादा भूलते जा रहे हैं। वोट बैंक की राजनीति में सियासी दल एक-दूसरे पर तीखे प्रहार करने से भी नहीं चूक रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, “बिहार की जनता अब बहुत परिपक्व है, वह विकास और स्थिरता चाहती है, न कि पुराने दौर की धमकी और विभाजन की राजनीति।”
निष्कर्ष
बिहार की सियासी जंग अब पूरी तरह गरम हो चुकी है। महागठबंधन के घोषणापत्र के ऐलान और तेजस्वी के नए बयानों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और एनडीए की रणनीति क्या मोड़ लेती है। एक ओर जंगलराज बनाम सुशासन की बहस है, तो दूसरी ओर वक्फ बिल और अल्पसंख्यक राजनीति पर तीखे तीर चल रहे हैं।
चुनावी मैदान में आरोप-प्रत्यारोप की यह जंग आने वाले दिनों में और भी तेज होती नजर आ रही है।
