बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में जबरदस्त भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 4 पूर्व विधायकों समेत कुल 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इस कदम से बिहार की सियासत में हड़कंप मच गया है। चुनावी माहौल के बीच जेडीयू का यह फैसला न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है बल्कि पार्टी के अंदर भी असंतोष की लहर दौड़ गई है।
कौन-कौन हुए निष्कासित?जेडीयू ने जिन नेताओं पर कार्रवाई की है, उनमें कई बड़े और पुराने नाम शामिल हैं। निष्कासित नेताओं में पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद, पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, पूर्व विधान पार्षद रणविजय सिंह, पूर्व विधायक सुदर्शन कुमार, अमर कुमार सिंह, महुआ से पूर्व प्रत्याशी आस्मां परवीन, लव कुमार, आशा सुमन, दिव्यांशु भारद्वाज और विवेक शुक्ला का नाम शामिल है।इन सभी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि ये नेता लगातार पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी कर रहे थे और कुछ नेता विपक्षी खेमों के संपर्क में भी बताए जा रहे थे।
चुनावी मौसम में बड़ा कदम
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार विधानसभा चुनाव अपने पूरे जोरों पर है। राज्य में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होना है। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे संवेदनशील वक्त में पार्टी का यह निर्णय नीतीश कुमार के आत्मविश्वास और अंदरूनी असंतुलन दोनों को दर्शाता है।इस बार मुकाबला दिलचस्प है — एक ओर एनडीए (JDU-BJP गठबंधन) है, दूसरी ओर महागठबंधन। लेकिन इस बार मैदान में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी मजबूती से उतर चुकी है, जो कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकती है।
नीतीश बोले —
“बिहार प्रगति के नए आयाम गढ़ रहा है”
निष्कासन से कुछ ही घंटे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बक्सर जिले के डुमरांव और पटना के फुलवारी शरीफ (रामकृष्णा नगर) में एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा कर रहे थे।
उन्होंने कहा —हमने समाज के हर वर्ग के हित में काम किया है। बिहार में प्रेम, भाईचारा और शांति का वातावरण है। पिछले 20 वर्षों में हमने विकास को नई दिशा दी है। आने वाले समय में बिहार देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल होगा।लेकिन, शाम होते-होते वही मुख्यमंत्री अपने ही 11 नेताओं को निष्कासित करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर चुके थे।
निष्कासित नेताओं का पलटवार — “
JDU बन गई BJP की कठपुतली
”निष्कासन के बाद बागी सुर भी तेज हो गए हैं। पूर्व मंत्री शैलेश कुमार और पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह ने कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा —जबसे पार्टी की बागडोर संजय झा ने संभाली है, जेडीयू पूरी तरह भाजपा के हाथों की कठपुतली बन चुकी है। नीतीश कुमार की पार्टी पर पकड़ खत्म हो चुकी है। अब वे खुद कितने दिन पार्टी में बने रहेंगे, यह आने वाला समय बताएगा।शैलेश कुमार ने आगे कहा कि जेडीयू का कोर वोट बैंक अब भाजपा की नीतियों से नाराज होकर आरजेडी या जनसुराज की तरफ झुक चुका है।
उन्होंने चेतावनी दी —अगर नीतीश कुमार ने अब भी खुद को नहीं संभाला, तो 14 नवंबर को नतीजे आने के बाद उन्हें पछताना पड़ेगा।
विश्लेषकों की राय — नीतीश की ‘पकड़’ कमजोर?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े नेताओं की छुट्टी करना एक जोखिम भरा फैसला है।कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह निर्णय बताता है कि नीतीश कुमार अब पार्टी के अंदर पूर्ण नियंत्रण में नहीं हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार के शब्दों में —अगर नीतीश की पकड़ मजबूत होती तो वह चुनाव के बीच ऐसा कदम नहीं उठाते। यह फैसला अंदरूनी असंतोष और संगठनात्मक संकट का संकेत है।”
अब सबकी नजर 14 नवंबर पर अब सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार का यह सख्त कदम अनुशासन और मजबूती का संदेश देगा या पार्टी को और कमजोर करेगा?
बिहार की जनता 14 नवंबर को इस सवाल का जवाब देगी, जब मतगणना के नतीजे सामने आएंगे।फिलहाल, जेडीयू में बगावत की गूंज है और विपक्ष इस मौके का भरपूर फायदा उठाने की तैयारी में है।
