बी के झा
NSK






पटना, 18 नवंबर
बिहार में नई विधानसभा के गठन से पहले पटना में विधायकों के लिए नया आलीशान ‘आवास साम्राज्य’ तैयार हो चुका है। यह वही बिहार है जहाँ बारिश में सड़कें नदी बन जाती हैं, अस्पतालों में बेड कम पड़ जाते हैं और स्कूलों की छत टपकती रहती है—
लेकिन विधायकों के रहने के लिए 243 शाही बंगलों की व्यवस्था पहले ही चमचमा कर तैयार खड़ी है।इनमें से 62 बंगले पहले से बने हुए थे, जबकि 181 नए डुप्लेक्स इस बार चुनाव खत्म होते-ही विधायकों के स्वागत में खड़े किए गए हैं।
लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि अंदर की तस्वीरें सामने आते ही लोग हैरान रह गए—
यह बंगला है या मिनी महल?
4 BHK डुप्लेक्स:
नीचे ऑफिस–गेस्ट रूम, ऊपर मास्टर बेडरू मपटना के दारोगा राय पथ पर पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर इन नए डुप्लेक्स का निर्माण किया गया है।
हर बंगले में:4 बड़े कमरे (4 BHK)6 टॉयलेटगेस्ट रूमपीए (PA) रूमऑफिस रूमएक आधुनिक किचनऊपर अलग गार्ड रूमहर कमरे में बेड, सोफा, डाइनिंग—फुल फर्निश्ड सेटअपहर कमरे, हर गैलरी और हर स्पेस को इस तरह तैयार किया गया है कि कोई विधायक शिकायत न कर सके—
क्योंकि जनप्रतिनिधि हैं…
सुविधा में कटौती कैसे हो!44 एकड़ में पूरा विधायक नगर —
3700 sqft का एक बंगला पूरा निर्माण 44 एकड़ में फैला है।हर डुप्लेक्स का क्षेत्रफल लगभग 3700 वर्ग फुट (3693 sqft) है।परिसर के अंदर:एमएलए हॉस्टल कैंटीन कम्युनिटी सेंटर वर्षा जल संचयन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटLED स्ट्रीट लाइटें चम्पा, गुलमोहर, महोगनी के पेड़ यह पूरा इलाका एक ‘मिनी-स्मार्ट टाउन’ जैसा दिखता है—
जहाँ एकमात्र शर्त है कि यहां सामान्य नागरिक नहीं, सिर्फ विधायक रह सकते हैं।कौन किस बंगले में रहेगा? विधानसभा क्षेत्र की नंबर-प्लेट लगा दी गई हर डुप्लेक्स के बाहर पहले से ही विधानसभा क्षेत्र संख्या और नाम लिखकर फिक्स कर दिया गया है कि किस विधायक को कौन सा बंगला मिलेगा।
यानी विधायक को चुनाव जीतने के बाद आवास ढूंढने का टेंशन नहीं—
सीधे बैग उठाइए और नए बंगले में प्रवेश कर जाइए!विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए भी सुविधा—
सीधे इसी बंगले में आकर विधायक से मिल सकते हैं।विश्लेषकों का तंज: “जनता का दिनचर्या जैसा भी हो…
नेताओं की सुविधा में कटौती नहीं होनी चाहिए
”एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने व्यंग्य भरे अंदाज़ में कहा—
प्रदेश की जनता चाहे बिजली–पानी–सड़क के लिए संघर्ष करती रहे,पर नेताओं की सुख-सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।
आज सभी राजनीतिक दलों का यही घोषित-अघोषित उद्देश्य बन चुका है।”
दरअसल बिहार की जनता पिछले कई वर्षों से बेरोज़गारी, महंगाई, स्वास्थ्य व्यवस्था और बाढ़–सूखा के दोहरे संकट से जूझ रही है।लेकिन नेताओं की सुविधाओं का ग्राफ हर साल आसमान छूता जा रहा है।-
जनता की नजर में सवाल—
क्या जनता के लिए भी कभी ऐसा ‘डुप्लेक्स विकास’ आएगा?बिहार के 243 विधायक जिस स्पीड से नए बंगले पा रहे हैं,वैसी ही स्पीड अगर:स्कूलों,अस्पतालों,सड़कों,उद्योग-धंधों,और बुनियादी सुविधाओं में दिखाई देती
तो शायद बिहार आज देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल होता।लेकिन राजनीति का समीकरण कुछ और ही कहता है—
नेताओं के लिए ‘6 टॉयलेट वाले बंगले’ पहले,जनता की समस्याएँ बाद में।
अंत में…
जनता पढ़कर खुश भी, चौंक भी जाएगी
पटना में तैयार ये नए विधायक बंगले एक बार फिर यह याद दिलाते हैं कि बिहार में भले ही विकास की फाइलें धीरे चलें,लेकिन नेताओं की सुविधाओं के मामले में गाड़ी हमेशा टॉप गियर में रहती है।
कहानी यही नहीं रुकती—अब देखना यह है कि आने वाली नई सरकार जनसुविधाओं का भी वैसा ही ‘डुप्लेक्स मॉडल’ लागू कर पाती है या नहीं।
