बिहार पुलिस में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 71 IPS अफसरों का तबादला, कानून-व्यवस्था पर सम्राट चौधरी की मुहर

बी के झा

पटना, 9 जनवरी

बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक जमीन पर बड़ा संदेश देते हुए राज्य सरकार ने एक साथ 71 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों का तबादला कर दिया है। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग की कमान संभाली है। प्रशासनिक हलकों में इसे सिर्फ तबादला सूची नहीं, बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा रणनीति का नया ब्लूप्रिंट माना जा रहा है।इससे पहले 31 दिसंबर को 26 IPS अफसरों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार दिए गए थे, लेकिन मौजूदा आदेश को पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा और व्यापक पुलिस प्रशासनिक बदलाव कहा जा रहा है।

STF को मिला नया चेहरा:

कुंदन कृष्णन सबसे ताकतवर पद पर इस फेरबदल का सबसे अहम और प्रतीकात्मक फैसला है एनकाउंटर एक्सपर्ट कुंदन कृष्णन को डीजी, ऑपरेशन्स,डीजी, विशेष कार्य बल (STF)और डीजी, स्पेशल ब्रांच की जिम्मेदारी देना।

कुंदन कृष्णन पहले से ही STF को एडीजी के रूप में संभाल रहे थे। अब उन्हें सीधे डीजी स्तर पर लाकर सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि

अपराध, संगठित गिरोह, माफिया और आतंक से निपटने में कोई नरमी नहीं होगी।वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह नियुक्ति बिहार में “ऑपरेशन मोड” की वापसी का संकेत है।पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम पर फोकस

सरकार ने केवल फील्ड पोस्टिंग ही नहीं, बल्कि पुलिस सिस्टम, टेक्नोलॉजी और संरचना पर भी ध्यान दिया है।प्रीता वर्मा को डीजी और सीएमडी, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम बनाया गया है। यह पद पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

सुनील कुमार को एडीजी, पुलिस मुख्यालय बनाकर प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने की कोशिश की गई है।रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी, साइबर अपराध की जिम्मेदारी दी गई है, जो डिजिटल क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड से जूझ रहे बिहार के लिए निर्णायक मानी जा रही है।

जिलों और रेंज में बड़ा बदलाव

इस फेरबदल में I G, DIG, SSP, SP, City SP और SDPO स्तर तक बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं।मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, सारण, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, गोपालगंज, सिवान, भोजपुर, वैशाली जैसे जिलों में नए पुलिस कप्तान भेजे गए हैं।रेल पुलिस, ATS, EOU, साइबर, ट्रैफिक और SDRF जैसी यूनिट्स को भी नए अधिकारी मिले हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से जमे अधिकारियों को हटाकर फील्ड-ओरिएंटेड अफसरों को आगे लाया गया है।उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिक्रिया गृह विभाग संभालने के बाद पहली बड़ी कार्रवाई पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—“बिहार में कानून का राज स्थापित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस प्रशासन को पूरी स्वतंत्रता और स्पष्ट दिशा दी गई है। अपराधी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।”राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बयान और तबादले मिलकर यह संकेत देते हैं कि

सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कोई राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फेरबदल भाजपा की ‘सख्त शासन’ वाली छवि को मजबूत करता है,और आगामी चुनावों से पहले लॉ एंड ऑर्डर को केंद्रीय मुद्दा बनाने की रणनीति का हिस्सा है।उनके अनुसार, STF और साइबर अपराध को मजबूत करना इस बात का संकेत है कि सरकार

माफिया, साइबर ठगी और संगठित अपराध पर एक साथ प्रहार करना चाहती है।

शिक्षाविदों का नजरिया

प्रशासनिक मामलों के जानकार शिक्षाविदों का कहना है कि“इतने बड़े स्तर पर तबादला तभी असरदार होता है, जब उसे स्पष्ट नीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति का समर्थन मिले।”उनके अनुसार,यदि अधिकारियों को स्थायित्व और स्वतंत्रता मिली,तो यह फेरबदल बिहार पुलिस को नई कार्य-संस्कृति को की ओर ले जा सकता है।

कानूनविदों की टिप्पणी

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह का मानना है कि STF, साइबर और निगरानी विभाग में मजबूत नियुक्तियां जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की मजबूती को बढ़ा सकती हैं।हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि“सख्ती के साथ-साथ कानून और मानवाधिकारों का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।”विपक्ष का सवालविपक्षी दलों ने इस फेरबदल पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है।उनका कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए न हो।तबादले कानून-व्यवस्था सुधार के लिए हों, न कि सत्ता संतुलन के लिए।

निष्कर्ष्

71 IPS अधिकारियों का यह तबादला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है।कुंदन कृष्णन जैसे अधिकारियों को शीर्ष जिम्मेदारी, साइबर और STF को मजबूती, और जिलों में नई कमान—सब मिलकर यह संकेत देते हैं कि

बिहार सरकार अब ‘संदेश देने’ के मूड में है।अब असली परीक्षा यह होगी कि यह बड़ा फेरबदल कागज से निकलकर जमीन पर कितना असर दिखाता है—

क्योंकि जनता के लिए पुलिस सुधार का असली पैमाना आदेश नहीं, बल्कि सुरक्षा का अनुभव होता है।

NSK

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