बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पटना , 28 नवंबर
बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। गृह मंत्रालय की कमान संभालते ही उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिस अंदाज़ में माफिया सिंडिकेट के विरुद्ध युद्ध छेड़ा है, उसने पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों से लेकर अपराध जगत तक हलचल पैदा कर दी है।कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भव्य कार्यकर्ता सम्मान समारोह में सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“बिहार में जमीन, शराब और बालू—तीनों तरह के माफियाओं की खैर नहीं। 400 लोगों को चिन्हित किया जा चुका है और 1200 की नई सूची तैयार है। संपत्ति जब्त होगी और जेल भेजने का काम अदालत के आदेश के साथ किया जाएगा।”कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार का सबसे बड़ा ऐलान गृह मंत्री ने घोषणा की कि बिहार में कानून-व्यवस्था को ज़मीन पर मजबूत करने के लिए:बड़े शहरों में हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV नेटवर्क लगाया जाएगा सोशल मीडिया पर गाली-गलौज व धमकियों पर कड़ी कार्रवाई जेलों में अनुशासन सुनिश्चित; बाहर से खाना ले जाने पर रोक, डॉक्टर की अनुमति अनिवार्य जेल के भीतर मोबाइल पहुँचाने वाली पूरी चेन की जांच
स्कूल–कॉलेजों के आसपास पिंक मोबाइल यूनिट/एंटी रोमियो स्क्वायड की तैनातीसम्राट चौधरी का कहना है कि स्पीडी ट्रायल, सुशासन और संगठित अपराध पर नकेल उनकी तीन शीर्ष प्राथमिकताएँ हैं।
विपक्ष और विशेषज्ञों की चुनौती:
क्या होगी कार्रवाई निष्पक्ष?
सम्राट चौधरी की ताबड़तोड़ घोषणाओं ने जहाँ भाजपा समर्थकों में उत्साह जगाया है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर विपक्ष तक ने उन्हें कड़ी चुनौती दी है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी का बयान खास चर्चा में है—
“अगर सम्राट में सचमुच हिम्मत है, तो शुरुआत अनंत सिंह को बिहार से बाहर तिहाड़ जेल ट्रांसफर कराकर दिखाएँ।”वहीं, आरजेडी नेताओं ने पूछा है कि क्या यह कार्रवाई केवल विपक्षी कैंपों तक सीमित रहेगी या भाजपा के अपने विवादित नेताओं पर भी समान सख़्ती दिखाई जाएगी।
पार्टी के ‘भूमाफिया MLC’ का मामला उठा
एक वरिष्ठ पत्रकार ने तीखा सवाल उछाला—“क्या गृह मंत्री उस भाजपा समर्थित भूमाफिया MLC पर भी कार्रवाई कर पाएँगे जिसने चुनाव के दौरान दो-दो हेलिकॉप्टर किराए पर लेकर पार्टी को आर्थिक मदद पहुंचाई?
क्या दिल्ली दरबार से इसकी अनुमति मिल पाएगी?
”राजनीतिक हलकों में यह धारणा मजबूत होती दिख रही है कि माफिया पर निष्पक्ष कार्रवाई तभी विश्वसनीय होगी जब तलवार सरकार समर्थित प्रभावशाली चेहरों पर भी चलेगी।
सम्राट चौधरी बनाम योगी मॉडल:
तुलना शुरू , गृह मंत्रालय संभालते ही सम्राट चौधरी की सख्त भाषा और त्वरित घोषणाओं ने यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या वे ‘बिहार के योगी’ बन सकते हैं?
कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि यदि सम्राट का यह अभियान बिल्कुल निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से चला, तो बिहार का अपराध ग्राफ वर्षों में पहली बार ड्रामेटिक रूप से गिर सकता है।
दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है—“सख्ती की घोषणाएँ आसान होती हैं, पर जब कार्रवाई अपनी पार्टी और सहयोगियों तक पहुँचती है, तभी असली परीक्षा होती है।”अब नजर ज़मीन पर कार्रवाई पर
बिहार में 1200 माफियाओं की नई सूची तैयार हो चुकी है।400 के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।कुछ मामलों में अदालत की अनुमति भी मिल चुकी है।अब सवाल यह है कि—क्या यह अभियान राजनीतिक नहीं बल्कि संस्थागत और निष्पक्ष होगा?
क्या बिहार की नौकरशाही बिना दबाव के इस जंग को आगे बढ़ा पाएगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या माफिया पर कार्रवाई महज़ चुनावी संदेश है या सच में बिहार का नया अध्याय?आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि सम्राट चौधरी की घोषणाएँ राजनीति की गूँज बनकर रह जाएँगी या बिहार के इतिहास में ‘ऑपरेशन क्लीन’ के रूप में दर्ज होंगी।
