बी के झा
NSK

पटना, 8 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण मतदान अपने पीछे कई ऐतिहासिक आंकड़े छोड़ गया है। जिन 121 सीटों पर गुरुवार को वोट पड़े, वहां पिछले चुनाव (2020) की तुलना में इस बार 31 लाख 81 हजार 858 अधिक मतदाताओं ने वोट किया। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक तापमान और जनभागीदारी के असाधारण उभार की स्पष्ट तस्वीर है।
2020 बनाम 2025—वोटिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी2020 में इन सीटों पर 56.15% मतदान हुआ था, जो कुल 2,08,76,953 वोट थे।2025 में मतदान बढ़कर 65% पर पहुंचा, यानी 2,40,58,811 वोट।यह करीब 8.85% की बढ़ोतरी है।मतदान प्रतिशत में इतना बड़ा उछाल बिहार जैसे विशाल सामाजिक-राजनीतिक विविधता वाले राज्य में बेहद असामान्य माना जाता है।यह संकेत है कि बिहार के मतदाता इस बार अधिक निर्णायक, जागरूक और सक्रिय भूमिका में हैं।
SIR के बाद हटे 48 लाख नाम, फिर भी मतदान में उछाल क्यों?चुनाव से ठीक पहले राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चलाया गया था, जिसके बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए।SIR से पहले कुल मतदाता संख्या: 7.89 करोड़हटाए गए नाम: 65 लाखदावे-आपत्तियों के बाद हटे: 3,66,742जोड़ गए योग्य मतदाता: 21,53,343अंतिम सूची (30 सितंबर): 7,41,92,357इन प्रक्रियाओं के बाद SIR-पूर्व सूची की तुलना में लगभग 48 लाख मतदाता कम रह गए।
फिर भी रिकॉर्ड वोटिंग होना यह स्पष्ट संकेत देता है कि—1. सूची की सफाई के बाद वास्तविक और सक्रिय मतदाता ही बूथ तक आए2. जागरूकता अभियान ने निष्क्रिय मतदाताओं को भी वोट देने के लिए प्रेरित किया3. राजनीतिक दलों की ताबड़तोड़ रैलियों ने समर्थकों को बूथ तक खींचा
सीईओ का बयान—महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बदला समीकरणमुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि—मतदाता जागरूकतासाफ मतदाता सूचीमहिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों का बढ़ा उत्साहइन सभी ने मिलकर इस बार मतदान को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है।उन्होंने भरोसा जताया कि दूसरे चरण में भी यही जोश बरकरार रहेगा।
2025 बनाम 2020—बिहार के चुनावी गणित में बड़ा बदलाव?2020 में पूरे राज्य में तीन चरणों में कुल 4.19 करोड़ वोट पड़े थे।2025 में पहले चरण में ही कई सीटों पर 2020 की तुलना में 10–12% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।विशेषतः महिलाओं की मौजूदगी ने दोनों गठबंधनों की रणनीति को नई दिशा दी है।2020 के बाद से महिला मतदाताओं का औसत मतदान हमेशा पुरुषों से अधिक रहा है, और इस बार भी यह ट्रेंड और मजबूत दिख रहा है।वोटिंग बढ़ने के पीछे क्या थे मुख्य कारण?
1. नेताओं की लगातार अपील पीएम मोदी, सीएम नीतीश कुमार, गृह मंत्री अमित शाह, प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव, योगी आदित्यनाथ सहित सभी प्रमुख नेताओं ने कई दिनों तक लगातार जनता से मतदान की अपील की।
2. बूथ सुविधाओं का विस्तार85+ उम्र वालों व दिव्यांगों के लिए घर से वोटिंग मतदान केंद्रों पर मोबाइल रखने की अनुमतिपहली बार रंगीन फोटोयुक्त पर्चीशेड, पानी, महिला बूथ—इन सभी ने मतदाताओं को सहज अनुभव दिया3. सामाजिक-राजनीतिक ध्रुवीकरणदोनों पक्षों की ओर से लगातार घोषणाएँ और कड़े बयान—कभी “जंगलराज”कभी “नौकरियाँ”कभी “तबाही vs विकास”इन मुद्दों ने अपने-अपने समर्थक आधार को पूर्णतः सक्रिय कर दिया।क्या यह बढ़ा मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत है?
राजनीतिक विश्लेषकों की राय में—अधिक मतदान = यथास्थिति विरोधी लहर का संकेतलेकिन कई क्षेत्रों में अधिक मतदान = सरकारी कार्यों से संतुष्टि भी दर्शा सकता हैइसीलिए यह चुनाव आंकड़ों के हिसाब से 2015 और 2020 की तुलना में कहीं अधिक मुक़ाबले वाला और अप्रत्याशित हो गया है।
निष्कर्ष:
बिहार में मतदाताओं ने दिलाई नई ऊर्जा, चुनाव अब नई दिशा मेंपहले चरण के रिकॉर्ड मतदान ने साफ कर दिया है कि—मतदाता पहले से कहीं अधिक सजग हैंचुनाव आयोग की सुधार प्रक्रियाएँ असरदार रही हैंराजनीतिक दलों की रणनीतियाँ 2020 वाले फार्मूले पर नहीं चलेंगीआगामी परिणाम बिहार की राजनीति में कई वर्षों तक असर छोड़ सकते हैंबिहार का यह चुनाव अब सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं रहा—यह जनभागीदारी और लोकतांत्रिक चेतना का नया अध्याय बनकर उभर रहा है।
