बी के झा
NSK



पटना / नई दिल्ली, 21 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सियासी गर्मी भी तेज होती जा रही है। इस बीच जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है।मंगलवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया।
सूरत कांड की तरह बिहार में दोहराया गया खेल”प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान गुजरात के सूरत में जो हुआ था, वही कांड अब बिहार में रिपीट किया गया है।दानापुर, गोपालगंज और ब्रह्मपुर सीट पर जन सुराज के प्रत्याशियों को धमकाकर या बहकाकर चुनाव मैदान से हटा दिया गया। यह सब अमित शाह और उनके करीबी नेताओं के दबाव में हुआ,”पीके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा।उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया या उनसे वापस लेने के लिए दबाव बनाया।
दानापुर में ‘किडनैपिंग ड्रामा’ या सियासी दबाव?प्रशांत किशोर ने खुलासा किया कि दानापुर सीट से जन सुराज के प्रत्याशी अखिलेश कुमार उर्फ मुटुर साव के गायब होने की खबर फैलाई गई थी।पहले यह अफवाह उड़ी कि उन्हें राजद के बाहुबली रीतलाल यादव ने अगवा कर लिया है,लेकिन पीके ने दावा किया कि “मुटुर साव किसी के द्वारा किडनैप नहीं किए गए थे, बल्कि अमित शाह और भाजपा नेताओं के साथ बैठे थे, जिन्होंने उन्हें नामांकन न करने की सलाह दी।”उन्होंने मीडिया को मुटुर साव और अमित शाह की कथित मुलाकात की तस्वीरें भी दिखाई।
ब्रह्मपुर सीट पर दबाव का आरोपजन सुराज के ब्रह्मपुर विधानसभा प्रत्याशी डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया।पीके ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा नेताओं ने तिवारी के घर जाकर उन्हें चुनाव से हटने के लिए राजी किया।उन्होंने कहा —धर्मेंद्र प्रधान की अगुवाई में जो दबाव बनाया गया, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”
गोपालगंज में डॉक्टर शशिशेखर पर ‘स्थानीय दबाव’प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि गोपालगंज सीट से जन सुराज प्रत्याशी डॉ. शशिशेखर सिन्हा पर भाजपा के एक स्थानीय एमएलसी और उनके समर्थकों ने धमकी दी।दो दिन पहले तक वे चुनाव प्रचार में सक्रिय थे, लेकिन अचानक उन्होंने नामांकन वापस ले लिया और फोन बंद कर लिया।पीके ने आरोप लगाया कि कुछ घंटे बाद ही भाजपा नेताओं के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें मीडिया में वायरल की गईं।
“लोकतंत्र की हत्या, बिहार में दोहराई जा रही गुजरात की राजनीति”प्रशांत किशोर ने कहा —गुजरात के सूरत में भाजपा ने विरोधियों को चुनाव से हटवाकर मैदान खाली कर दिया था। अब वही तरीका बिहार में अपनाया जा रहा है। लोकतंत्र की आत्मा को मारा जा रहा है। गृह मंत्री खुद अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।पीके ने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि अगर आयोग चुप रहा, तो “बिहार की जनता अपनी अगली क्रांति में जवाब देगी।”
राजनीतिक विश्लेषकों की तीखी प्रतिक्रिया
पीके के इन आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
कुछ विश्लेषकों ने इसे “गंभीर लोकतांत्रिक संकट” बताया।पटना विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा —अगर प्रशांत किशोर की बातें सच हैं, तो फिर यह चुनाव नहीं बल्कि नाटक है।
चुनाव आयोग को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
वहीं एक वरिष्ठ समाजसेवी ने कहा —अमित शाह को शायद जेपी आंदोलन याद नहीं। बिहार की मिट्टी ने सदियों से हर बादशाह की बादशाहत को चुनौती दी है।
वहीं उन्होंने गृहमंत्री और चुनाव आयोग को चेताया कि बिहार गुजरात नहीं क्रांतिकारियों की भूमि है। अगर यह दबाव वाला राजनीति जारी रही, तो जनता खुद जवाब देगी।
चुनावी तापमान और जातीय समीकरण जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे बिहार का माहौल और जातीय ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है।
जन सुराज के इन आरोपों ने चुनावी जंग को और तीखा बना दिया है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब यह चुनाव सिर्फ विकास बनाम जाति नहीं, बल्कि लोकतंत्र बनाम सत्ता की लड़ाई बन चुका है।
निष्कर्ष
बिहार में इस बार का चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि नैतिकता और लोकतंत्र की प्रतिष्ठा की परीक्षा बन गया है।एक तरफ भाजपा सत्ता की ताकत के साथ मैदान में है,तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी लोकतंत्र की मर्यादा के सवाल उठा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों पर संज्ञान लेता है — या “सूरत कांड” वाकई में बिहार के इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
