बीजेपी ने होम के बाद स्पीकर भी अपने पाले में किया, प्रेम कुमार होंगे 18वीं विधानसभा के अध्यक्ष; जेडीयू–एनडीए समीकरण और विपक्ष की कमजोरी साफ दिखी

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/पटना, 1 दिसंबर

बिहार की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र एक अहम राजनीतिक संकेत के साथ शुरू हुआ। गृह मंत्रालय अपने पास रखने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी कब्ज़ा जमा लिया है। गया शहर से नौ बार के विधायक और लंबे समय से नीतीश सरकार में मंत्री रहे डॉ. प्रेम कुमार ने सोमवार को एनडीए उम्मीदवार के रूप में स्पीकर पद के लिए नामांकन दाखिल किया।नामांकन के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा और गृह मंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी ने इसे मात्र औपचारिकता से अधिक—

एनडीए की संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन बना दिया।

विपक्ष ने मैदान खाली छोड़ा, निर्विरोध चयन तयस्पीकर चुनाव में विपक्ष की ओर से किसी ने भी उम्मीदवारी नहीं दी। महज 35 सीटों वाले विपक्ष के पास न तो संख्याबल है, न ही रणनीतिक इच्छा शक्ति।इससे संकेत साफ है कि विपक्ष ने सीधी राजनीतिक लड़ाई के बजाय प्रतीकात्मक प्रतिरोध की राह चुनी है।परिणामस्वरूप प्रेम कुमार का निर्विरोध चयन लगभग तय हो चुका है।एनडीए गठबंधन की मजबूती, जेडीयू की रणनीतिक सहमति राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, स्पीकर पद पर भाजपा की दावेदारी को जेडीयू ने बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर, यह संदेश दिया है कि गठबंधन में समन्वय सुचारू है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा की हालिया बैठकों से यह भी स्पष्ट होता है कि जेडीयू–बीजेपी अब टकराव नहीं, बल्कि स्थिर शासन की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देना चाहती है।प्रेम कुमार: 35 वर्षों की पारदर्शी राजनीतिक यात्राडॉ.

प्रेम कुमार उन दुर्लभ नेताओं में गिने जाते हैं जिनका तीन दशक से अधिक का राजनीतिक करियर विवादों से लगभग अछूता रहा है।उन्होंने कृषि, पर्यावरण एवं वन, सहकारिता, पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला और 2015 में विपक्ष के नेता भी रहे।लगातार नौवीं बार जीत उनके संगठनात्मक प्रभाव और जनता के भरोसे का प्रमाण है।उनकी छवि एक शांत, संतुलित और प्रक्रियाओं को मानने वाले नेता की रही है—

जो स्पीकर पद के लिए आवश्यक गुण माने जाते हैं।विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका: आने वाले सत्रों में चुनौती एनडीए बहुमत में है, लेकिन विपक्ष की संख्या भले कम हो, आवाज़ तेज़ है।नए स्पीकर के सामने आने वाले दिनों में—विधायी कामकाज को सुचारू रखना,विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखना,और संवेदनशील मुद्दों पर सदन की गरिमा की रक्षा करना—

मुख्य चुनौतियाँ होंगी।नामांकन के बाद प्रेम कुमार की प्रतिक्रिया नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा:“जो दायित्व मिला है, उसे पूरी निष्ठा से निभाएँगे। हमारे नेताओं ने जो विश्वास जताया है, उसके लिए आभारी हूँ।

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