बुर्का चलेगा तो घूंघट भी चलेगा: नीतीश सरकार के मंत्री कृष्नंदन पासवान का बयान गरमाया सियासी माहौल

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 6 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में ‘बुर्का बनाम घूंघट’ का मुद्दा जोर पकड़ चुका है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में गन्ना उद्योग मंत्री कृष्नंदन पासवान ने कहा है कि अगर मतदान के दौरान मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनने की अनुमति दी जाती है, तो हिंदू महिलाओं को भी घूंघट में वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए।मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा —अगर बुर्का चलेगा, तो घूंघट भी चलेगा। चुनाव आयोग को दोनों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।”इस बयान के बाद से बिहार के राजनीतिक गलियारों में ध्रुवीकरण की चर्चा तेज हो गई है। क्या है विवाद की पृष्ठभूमिदरअसल, शनिवार को पटना में हुई चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने यह मुद्दा उठाया था किबुर्का पहनकर आने वाली मुस्लिम महिलाओं की पहचान सत्यापित करना मुश्किल होता है, इसलिए मतदान से पहले उनका चेहरा मिलान जरूरी है।”इसी बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री कृष्नंदन पासवान ने जायसवाल के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि अगर आयोग बुर्के में मतदान की अनुमति देता है, तो हिंदू महिलाओं को भी घूंघट में वोट डालने की समान सुविधा दी जानी चाहिए।मंत्री का बयान और बढ़ी सियासी सरगर्मीपासवान के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।वहीं, बीजेपी के कुछ नेताओं ने इसे “समानता का सवाल” बताते हुए मंत्री के बयान का बचाव किया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनाव 2025 में जातीय और धार्मिक दोनों ही ध्रुवीकरण की झलक देखने को मिल सकती है।इस तरह के बयानों से चुनावी बहस का केंद्र विकास से हटकर सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान पर जाता दिखाई दे रहा है।चुनाव आयोग की बैठक और नए नियमइस बीच, भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की थी।बैठक में एक या दो चरणों में चुनाव कराने की संभावना, सुरक्षा इंतजाम, और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा हुई।मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा —निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव कराना हमारा लक्ष्य है।”चुनाव आयोग ने इस बार 17 नए बदलावों की घोषणा की है, जिन्हें आने वाले अन्य राज्यों के चुनावों में भी लागू किया जाएगा।महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल हैं:वोटरों को मोबाइल फोन बूथ तक ले जाने की अनुमति, लेकिन मतदान कक्ष के बाहर जमा कराना अनिवार्य होगा।उम्मीदवार अब बूथ से 100 मीटर दूर तक सहायता केंद्र (कैंप ऑफिस) खोल सकेंगे।महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बूथ पर विशेष इंतजाम किए जाएंगे।शाम 4 बजे होगा चुनावी ऐलानबिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज शाम 4 बजे दिल्ली से किया जाएगा।सूत्रों के मुताबिक, इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में संपन्न होने की संभावना है।बिहार विधानसभा का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव आयोग को उससे पहले मतदान पूरा कराना होगा।राजनीतिक विश्लेषण: ध्रुवीकरण के साये में चुनावी रणभेरीराजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बुर्का-घूंघट विवाद ने बिहार में चुनावी बहस को धार्मिक ध्रुवीकरण की दिशा में मोड़ दिया है।जहां सत्ताधारी दल इसे “समानता” का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे “वोटों के ध्रुवीकरण की सोची-समझी रणनीति” मान रहा है।अगर यह विवाद आगे बढ़ा, तो यह न केवल चुनाव के स्वरूप को प्रभावित करेगा बल्कि राज्य की सामाजिक एकता पर भी असर डाल सकता है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे बयान लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये मतदाताओं के बीच धार्मिक विभाजन को गहरा कर सकते हैं।(संपादकीय टिप्पणी)बिहार चुनावी मोड में प्रवेश कर चुका है और हर दल अपने तरीके से मुद्दों को साधने की कोशिश में है।लेकिन लोकतंत्र की असली ताकत समानता, सह-अस्तित्व और विवेकपूर्ण राजनीति में निहित है।बुर्का या घूंघट को राजनीतिक हथियार बनाना न केवल सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकता है, बल्कि बिहार की प्रगतिशील राजनीति को भी पीछे धकेल सकता है।

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