बी के झा
NSK

पटना, 29 नवंबर
शनिवार की सुबह बिहार के सबसे संवेदनशील जेलों में से एक बेऊर सेंट्रल जेल अचानक भारी पुलिस फोर्स और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से थर्रा उठा। सुबह 5 बजे से 8 बजे तक करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन ने कैदियों से लेकर जेल कर्मियों तक में खलबली मचा दी।राज्य भर में एक साथ हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने साफ कर दिया है—बिहार पुलिस अब “एक्शन मोड” में है और अपराध जगत को कड़ा संदेश देना चाहती है।बेऊर जेल में मैगा सर्च ऑपरेशन: हर बैरक, हर कोना खंगाला एसडीएम के नेतृत्व में जिला प्रशासन और पुलिस बल की एक संयुक्त टीम बेऊर जेल पहुंची।
सूत्रों के अनुसार:सभी बैरकों की तलाशी रसोईघर, ऑफिस, विज़िटर एरिया, स्टोर रूम तक की जांचकैदियों की व्यक्तिगत वस्तुओं की भी छंटनी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की संभावना पर विशेष नजर जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा ने बताया—“पूरी जांच में एक भी आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली है। सुरक्षा व्यवस्था सामान्य और कड़ी है।”अनंत सिंह की मौजूदगी ने बढ़ाई संवेदन शीलता बेऊर जेल इन दिनों सुर्खियों में भी इसलिए रहता है क्योंकि यहां मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह दुलारचंद यादव हत्याकांड में बंद हैं।जेल सूत्र मानते हैं कि VIP कैदियों की मौजूदगी के कारण बेऊर जेल पर हमेशा प्रशासन की खास नजर रहती है।
पूर्णिया से लेकर सीवान तक—राज्यभर में अचानक छापेमारी बेऊर ही नहीं, बल्कि पूर्णिया सेंट्रल जेल, भागलपुर, नवादा, अरवल, नालंदा, दरभंगा सहित कई जिलों में समानांतर छापेमारी हुई।पूर्णिया जेल में लगभग 1.5 घंटे तक जाँच चली।एसडीओ और एसडीपीओ के नेतृत्व में हर बैरक खंगाली गई, लेकिन कोई अवैध सामान नहीं मिला।
छापे के पीछे क्या कारण?
अपराध की कड़ियाँ जेल से जुड़ने की आशंका पिछले कुछ दिनों में हुई आपराधिक वारदातों ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ाई थीं—सीवान: ज्वेलरी शॉप पर हमला खगड़िया: BJP नेता को गोली मारने की घटनाकुछ मामलों में मोबाइल कॉल डिटेल से “जेल लिंक” की आशंका इसी कारण, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह छापेमारी मात्र नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि “क्राइम कंट्रोल का शॉर्ट-टर्म शॉक ऑपरेशन” है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की राय: “जेलों को क्राइम कंट्रोल का नर्व सेंटर नहीं बनने दिया जाएगा”पूर्व IG आलोक अवस्थी का कहना है—“बिहार में कई हाई-प्रोफाइल क्राइम की प्लानिंग जेलों के अंदर से होने का इतिहास रहा है। अचानक छापेमारी अपराधियों की मानसिकता को झकझोरने के लिए की गई है।”
राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक डॉ. अनूप त्रिपाठी ने कहा—“नए गृह मंत्री सम्राट चौधरी की प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट है—अपराधियों को यह एहसास कराना कि जेल में रहते हुए वे सुरक्षित या स्वतंत्र नहीं हैं।”
राजनीतिक संकेत: ‘सम्राट चौधरी के आने के बाद सख्ती तेज’राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई नए गृह मंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली का शुरुआती संदेश है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक के शब्दों में—“सम्राट चौधरी ने आते ही संकेत दिया है कि बिहार में अब कानून-व्यवस्था पर नरमी नहीं चलेगी।नतीजा: जेल प्रशासन पर भी दबाव, अपराधियों में भी खौफयह छापेमारी भले ही “कुछ बरामद नहीं हुआ” के नोट पर खत्म हुई हो,लेकिन प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ बरामदगी नहीं, बल्कि जेल सिस्टम में अनुशासन का पुनर्स्थापन है।राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा“
मैसेज स्पष्ट है—अब बिहार की किसी भी जेल में अपराध की प्लानिंग नहीं चलेगी, चाहे कैदी कितना भी बड़ा नाम या रसूख वाला क्यों न हो।
