_बी के झा
NSK

बेगूसराय ( बिहार ) 10 फरवरी
बिहार के बेगूसराय जिले में सोमवार की शाम गोलियों की गूंज ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या राज्य में अब निजी दुश्मनी भी खुलेआम मौत का फरमान बन चुकी है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पानगाछी के समीप एक खेत में ई-रिक्शा पार्ट्स के कारोबारी भूषण सिंह (45) को बदमाशों ने दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला। सीने, सिर और बांह में कुल छह गोलियां मारकर हमलावर मौके से फरार हो गए।घटना के बाद परिजन उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। खेत में खून से सना शव और बिखरी गोलियों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया।
परिजनों का आरोप: ‘पहली पत्नी ने करवाई हत्या
’मृतक के परिजन पिंटू कुमार ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि भूषण सिंह की पहली पत्नी से लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है किमहिला ने भूषण को छोड़कर उसके छोटे भाई से शादी कर ली,पारिवारिक रंजिश इतनी बढ़ी किपहले एक साल पूर्व राजू सिंह की हत्या करवाई गई,और अब भूषण सिंह को रास्ते से हटाया गया।पिंटू कुमार का कहना है:“यह कोई अचानक हुई वारदात नहीं है, यह सोची-समझी साजिश है। अब परिवार के बाकी लोगों की जान भी खतरे में है।”
पुलिस की प्रारंभिक प्रतिक्रिया
मुफस्सिल थाना के दारोगा ने हत्या की पुष्टि करते हुए कहा:“भूषण सिंह की गोली मारकर हत्या की गई है। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है। आरोपों की सत्यता की भी जांच की जाएगी।”हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है किइलाके में पहले भी अपराध की घटनाएं हुई हैं,लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक विश्लेषक: ‘बेगूसराय अपराध का हॉटस्पॉट बनता जा रहा
’राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेगूसराय में लगातार हो रही हत्याएं यह दर्शाती हैं कि“अपराध अब व्यक्तिगत दुश्मनी से निकलकर संगठित हिंसा का रूप ले चुका है।”एक विश्लेषक के अनुसार:“जब लोग अपने निजी झगड़े सुलझाने के लिए कानून नहीं, हथियार चुनें — तो समझ लीजिए शासन का भय खत्म हो चुका है।”
कानूनविदों की चेतावनी: पारिवारिक विवाद, लेकिन राज्य की जिम्मेदारी
वरिष्ठ कानूनविदों का कहना है किभले ही मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हो,लेकिन हत्या राज्य की कानून-व्यवस्था की विफलता भी है।एक आपराधिक कानून विशेषज्ञ ने कहा:“यदि पहले हुई हत्या की जांच ईमानदारी से होती, तो शायद दूसरी हत्या रोकी जा सकती थी।”उन्होंने यह भी कहा किमहिला पर आरोप है, लेकिन बिना ठोस सबूत न्यायिक प्रक्रिया से ही सच सामने आना चाहिए।
शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया: ‘हिंसा समाज की नई भाषा बनती जा रही’
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा:“यह घटना दिखाती है कि सामाजिक रिश्ते टूट रहे हैं और संवाद की जगह बंदूक ले रही है। यह सिर्फ अपराध नहीं, सामाजिक पतन है।”उनका कहना है किकानून का डर loweringऔर नैतिक मूल्यों का क्षरण समाज को अराजकता की ओर ले जा रहा है।
विपक्षी दलों का हमला
विपक्षी दलों ने इस हत्या को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला।एक विपक्षी नेता ने कहा:“बेगूसराय में व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं क्योंकि उन्हें राजनीतिक संरक्षण का भरोसा है।”विपक्ष ने मांग की किमामले की उच्चस्तरीय जांच हो,और पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा दिया जाए।
स्थानीय व्यापारियों में डर
घटना के बाद इलाके के व्यापारियों में दहशत है।एक स्थानीय दुकानदार ने कहा:“अगर खेत में घास काटने गए आदमी को गोलियों से भून दिया जा सकता है, तो बाजार में कौन सुरक्षित है?”
निष्कर्ष:
निजी विवाद या सिस्टम की विफलता?
भूषण सिंह की हत्या भले ही
पारिवारिक विवाद से जुड़ी दिखे,लेकिन असल सवाल यह है:
क्या अपराधियों को कानून का डर है?
क्या पुलिस समय रहते चेतावनी संकेतों को पकड़ पाती है?
और क्या बिहार में अब न्याय से पहले बंदूक फैसला करेगी?जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते,तब तक हर गोलीसिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, पूरे समाज को छलनी करती रहेगी।
