बी के झा
NSK

बेतिया/पटना, 8 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंतिम चरण में सियासी पारा चरम पर है। बेतिया की विशाल रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार की अपनी समापन सभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखे हमले किए और कहा कि “बेतिया ने जंगलराज का सबसे भयावह रूप देखा है। बिहार अब फिर पीछे नहीं जाएगा।”
तेजस्वी के जन्मदिन पर ‘गिफ्ट’ का सियासी वार
पीएम मोदी ने अपने भाषण में तेजस्वी यादव का अप्रत्यक्ष नाम लेते हुए कहा—“कल 9 नवंबर को उनका जन्मदिन है, जनता इस बार उन्हें एक खास गिफ्ट देने वाली है।”इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उधर पटना की सड़कों पर “सीएम चेयर गिफ्ट” के पोस्टर पहले ही चर्चा में हैं, जिन्हें लेकर एनडीए बनाम महागठबंधन का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।पहले चरण का ‘65 वोल्ट का झटका’
सीतामढ़ी की रैली में पीएम मोदी ने पहले चरण के मतदान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“
विपक्षी दलों को 65 वोल्ट का झटका लगा है।”चुनाव आयोग ने 65.8% मतदान का फाइनल आंकड़ा जारी किया है, जो बिहार के हालिया चुनावी इतिहास में रिकॉर्ड के करीब बताया जा रहा है।9 नवंबर की शाम थमेगा शोर, उससे पहले ताबड़तोड़ रैलियां शेष दो दिनों में बिहार का चुनावी कैनवस पूरी तरह नेताओं से पट गया है।
एनडीए और महागठबंधन — दोनों ही खेमों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।मैदान में बड़े चेहरे:पीएम नरेंद्र मोदीसीएम नीतीश कुमार गृहमंत्री अमित शाह तेजस्वी यादव प्रियंका गांधी योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव इन नेताओं की लगातार मारक रैलियों ने चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले के करीब ला दिया है।
पटना़ एयरपोर्ट पर ‘अचानक मुलाकात’ ने बढ़ाई हलचल
बीजेपी सांसद रवि किशन और राजद नेता तेज प्रताप यादव की अचानक एयरपोर्ट पर मुलाकात ने सियासी गलियारों में नए कयासों को जन्म दे दिया है।जहाँ एक तरफ विपक्ष इसे “सियासी संयोग” बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं में इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हैं।
राजद परिवार में तनाव? तेज प्रताप बनाम तेजस्वी
महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद में भी सबकुछ सामान्य नहीं दिख रहा।तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच टकराव तेज हो गया है।उधर भागलपुर की दो सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।एक तरफ तेजस्वी अपने उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में सभा कर रहे हैं। यह स्थिति महागठबंधन की अंदरूनी चुनौतियों को साफ़ उजागर करती है।
चुनावी कहानी का अंतिम अध्याय
बिहार का चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर है।एक ओर एनडीए विकास और स्थिरता की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर महागठबंधन बदलाव की पुकार को हवा दे रहा है।पहले चरण की रिकॉर्डतोड़ वोटिंग ने साबित कर दिया है कि जनता इस बार बड़े मन से मतदान करने निकली है और नतीजे 20 नवंबर को राजनीतिक तस्वीर को उलट भी सकते हैं।बिहार के वोटरों की नब्ज अब नेताओं की भाषणबाज़ी नहीं बल्कि आने वाले दिनों की सत्ताई हकीकत तय करेगी।
