बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 22 नवंबर
भारतीय न्यायपालिका 24 नवंबर को एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है, जो न केवल देश के न्यायिक इतिहास में अभूतपूर्व है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की उभरती न्यायिक प्रतिष्ठा और कूटनीतिक शक्ति का भी परिचायक है। राष्ट्रपति भवन में भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति सूर्यकांत का शपथ ग्रहण समारोह इस बार साधारण औपचारिकता नहीं होगा—यह एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन जैसा भव्य आयोजन बनने जा रहा है, जिसमें ब्राजील, भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका के शीर्ष न्यायिक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे।पहली बार इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति बार एंड बेंच से जुड़े
सूत्रों के अनुसार, यह पहली बार है जब भारत के किसी मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में इतनी बड़ी संख्या में विदेशी मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के जज और उनके प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। यह न केवल भारतीय न्यायपालिका की बढ़ती साख का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक व्यवस्था अब वैश्विक संवाद और सहयोग के नए दौर में प्रवेश कर रही है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत:
न्याय और सुधारों की एक उल्लेखनीय यात्रा ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति एक ऐसे न्यायिक करियर की परिणति है, जिसमें उन्होंने संवैधानिक व्याख्याओं, पुलिस सुधारों, न्यायिक पारदर्शिता, और कानूनी सहायता प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने से पहले वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। अपनी निष्पक्षता, गहन कानूनी दृष्टि और संवेदनशील न्यायिक रवैये के कारण वे बार-बार चर्चा में रहे हैं।
कूटनीति और न्यायपालिका का संगम
भारत सरकार द्वारा जारी सूची बताती है कि इस समारोह में शामिल होने वाले प्रतिनिधि अपने-अपने देशों की सर्वोच्च न्यायिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। इनमें शामिल हैं—भूटान जस्टिस ल्योनपो नोरबू शेरिंग,
चीफ जस्टिस ल्हादेन लोटे
(पत्नी)केन्या जस्टिस मार्था कूमे,
चीफ जस्टिसजस्टिस सुसान न्जोकी न्दुंगु मलेशिया
जस्टिस तन श्री दातुक नलिनी पद्मनाथन पशुपति
शिवप्रगसम मॉरीशस
जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल,
चीफ जस्टिसरेबेका हन्ना बीबी गुलबुलनेपाल
जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत,
चीफ जस्टिसजस्टिस सपना
प्रधान मल्लाअशोक बहादुर मल्ला
अनिल कुमार सिन्हा,
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और वर्तमान कानून मंत्री उर्सिला सिन्हा
श्रीलंका जस्टिस पी. पद्मन सुरसेना,
चीफ जस्टिस से पालिका सुरसेना
जस्टिस एस. थुरैराजा एवं उनकी पत्नी
जस्टिस अहमद नवाज एवं उनकी पत्नी
ब्राजील एंटोनियो हरमन बेंजामिन,
सुपीरियर ट्रिब्यूनल डी जस्टिसा के मिनिस्टर वैश्विक न्याय सहयोग का नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की यह उपस्थिति भारत के न्यायिक कद को नई ऊँचाइयों पर स्थापित करती है। दुनिया के उभरते लोकतांत्रिक देशों के शीर्ष जजों का यह एक साथ आना बताता है कि भारत अब न्यायिक कूटनीति (Judicial Diplomacy) का केंद्र बन रहा है।यह आयोजन भविष्य में निम्न क्षेत्रों में सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है—
न्यायिक तकनीक एवं डिजिटल कोर्ट सीमा-पार अपराधों पर सहयोग न्यायिक प्रशिक्षण और रिसर्च कानून व्यवस्था में सुधारों की साझा रणनीति संवैधानिक लोकतंत्रों में न्यायपालिका की भूमिका पर संवाद एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक पड़ाव
सोमवार का यह शपथ ग्रहण समारोह भारत के लिए केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वह क्षण है जहाँ न्यायपालिका, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय मित्रता—तीनों एक मंच पर खड़े होंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नेतृत्व में भारतीय न्यायपालिका आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ेगी, यह देखने योग्य होगा, लेकिन इतना निश्चित है कि उनकी शपथ का यह क्षण भारतीय न्यायिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
