बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 6 दिसंबर
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2025 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का वक्तव्य भारत की बदलती कूटनीति, बढ़ते आत्मविश्वास और उभरती वैश्विक स्थिति का शक्तिशाली प्रतिबिंब था। पाकिस्तान सेना और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर पूछे गए सवालों का उन्होंने जिस बेबाकी और संतुलन के साथ जवाब दिया, उसने भारतीय विदेश नीति के नए चरित्र— दृढ़, व्यावहारिक और बहुध्रुवीय—को और स्पष्ट कर दिया।पाक सेना पर तीखा वार: “कुछ अच्छे होते हैं, कुछ नहीं… पर हम निपट लेते हैं”पाकिस्तान और उसकी सेना पर विदेश मंत्री का बयान नपे-तुले शब्दों में दिया गया एक कड़ा संदेश था।उन्होंने साफ कहा:“कुछ सैन्य नेता अच्छे होते हैं, कुछ अच्छे नहीं होते। लेकिन भारत के सामने पाकिस्तान की सेना हमेशा एक वास्तविकता रही है, और हमारी ज्यादातर समस्याएं वहीं से शुरू होती हैं। हमें उनकी जरूरत से ज्यादा परवाह करने की जरूरत नहीं है।”
जयशंकर का यह बयान उस लंबे अनुभव पर आधारित है जिसमें पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा ढांचे में सेना की निर्णायक भूमिका हमेशा भारत के लिए चुनौती रही है।उन्होंने याद दिलाया कि—“समस्याएं हैं और रहेंगी, लेकिन भारत अब वह देश नहीं जो खुद को लेकर असुरक्षित महसूस करे। हमें अपने मार्ग पर आगे बढ़ना है, तुलना नहीं करनी है।
यह टिप्पणी भारत–पाक शक्ति-संतुलन के बीच बढ़ते असमानता को रेखांकित करती है। आज भारत जहां वैश्विक निर्णायक शक्ति के रूप में उठ रहा है, वहीं पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट में उलझा हुआ है।पहलगाम हमले के बाद की स्थिति: भारत को अलग-थलग करने की कोशिश?समिट में यह प्रश्न भी उठा कि संघर्षों के दौरान क्या भारत कभी कूटनीतिक रूप से अलग-थलग महसूस करता है?
जयशंकर का जवाब था— पूर्णतः आत्मविश्वास भरा:“पहले यह सोचा जाता था कि अमेरिका या पश्चिम जो सोचेंगे, वही नीति बनेगी। लेकिन आज भारत की क्षमता, छवि और वैश्विक स्थिति बिल्कुल अलग है। कोई हमें अलग-थलग नहीं कर सकता, न ही हम खुद को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहते हैं।”यह बयान भारत की नई विदेश नीति का मूल है—
दुनिया से बराबरी के संबंध
सहयोग, परंतु स्वतंत्रता
साझेदारी, परंतु अधीनता नहीं पुतिन की भारत यात्रा: ‘कोई देश हमारे विकल्प तय नहीं कर सकता’विदेश मंत्री ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा पर कहा—“भारत जैसा बड़ा और उभरता हुआ देश अपने प्रमुख साझेदारों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे, यह जरूरी है। यही विदेश नीति का मूल है—
हम हर दिशा में अपने विकल्प खुले रखते हैं।”जब पूछा गया कि क्या पुतिन की यात्रा से अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता या सामरिक समीकरण बदलेंगे, जयशंकर ने दृढ़ता से कहा—“हम किसी तीसरे देश के आधार पर दूसरे देशों के साथ संबंध तय नहीं करते। कोई देश यह उम्मीद नहीं कर सकता कि उसे ‘वीटो’ मिल गया है कि भारत किससे रिश्ता रखेगा।”उन्होंने आगाह किया—“
अगर कोई ऐसी उम्मीद करेगा तो फिर दूसरे भी यही उम्मीद करेंगे। इसलिए हमने साफ कर दिया है कि हमारे पास अपनी पसंद की स्वतंत्रता है।”यह संदेश सीधा अमेरिका, रूस, यूरोप और चीन—सभी के लिए था।विश्लेषण: भारत की कूटनीति का नया स्वरूप जयशंकर के वक्तव्यों में तीन बड़े संकेत छिपे हैं:
1. पाकिस्तान को लेकर नई ‘कूल टोन’अब भारत पाकिस्तान को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं देता।भारत की रणनीति है—नियंत्रण,जवाब देने की क्षमता,और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को सीमित कर पाना।
2. रूस–अमेरिका पर संतुलन की परिपक्व नीतिभारत दोनों से रिश्ते मजबूत रखना चाहता है, लेकिन किसी के दबाव में नहीं।यही बहुध्रुवीय विश्व में भारत का वास्तविक लाभ है।
3. आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का नया युगभारत अब “नॉन-अलाइनमेंट” नहीं, बल्कि “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति चलाता है—जहां भारत सभी से संबंध रखकर अपने हित अधिकतम करता है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान पर सख्ती और रूस–अमेरिका पर संतुलन—जयशंकर का यह संयोजन बताता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक आत्मविश्वासी, निर्णायक और स्वायत्त शक्ति बन चुका है।उनका संदेश साफ है—
भारत को कोई न डरा सकता है, न दिशा दे सकता है।भारत अपनी राह खुद तय करता है।
