भारत को ऊर्जा महाशक्ति बनाने की ओर कदम: कुडनकुलम को पूरी क्षमता तक पहुंचाने का रूस का संकल्प

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 5 दिसंबर

पुतिन की भारत यात्रा ने न्यूक्लियर सहयोग को नई ऊँचाई दी; ऊर्जा सुरक्षा से लेकर भू-राजनीति तक बड़ा संदेशचार साल बाद भारत पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत के ऊर्जा भविष्य को नई दिशा देने वाला बड़ा ऐलान किया। रूस ने स्पष्ट कर दिया कि वह भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को उसकी अधिकतम क्षमता तक पहुंचाने के लिए “पूर्ण प्रतिबद्धता” के साथ काम करेगा।तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम प्लांट भारत का एकमात्र ऐसा परमाणु केंद्र है, जिसकी छह विशालकाय यूनिटें मिलकर देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने की क्षमता रखती हैं।

इनमें से दो रिएक्टर पहले से ही ग्रिड से जुड़े हैं, जबकि चार रिएक्टर तेजी से निर्माणाधीन हैं।पुतिन का बड़ा ऐलान: “कुडनकुलम भारत की ऊर्जा सुरक्षा का स्तंभ बनेगा”संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने कहा:हम भारत के साथ मिलकर कुडनकुलम परियोजना को उसकी पूरी क्षमता तक ले जाने के लिए संकल्पित हैं। यह दोनों देशों के सहयोग का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है। पूरी क्षमता हासिल होने के बाद यह भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को मजबूत आधार देगा।रूस न केवल प्लांट के निर्माण में सहयोग कर रहा है, बल्कि परमाणु ईंधन की निर्बाध सप्लाई भी सुनिश्चित कर रहा है। रोसाटॉम ने पुष्टि की है कि तीसरे रिएक्टर के लिए ईंधन की पहली खेप भारत भेज दी गई है, और आने वाले दिनों में कुल सात कार्गो फ्लाइट्स से यह आपूर्ति पूरी होगी।सिर्फ बिजली नहीं—नए क्षेत्रों में भी न्यूक्लियर सहयोग

पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि भारत-रूस साझेदारी सिर्फ बड़े रिएक्टरों तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में दोनों देश इन क्षेत्रों में भी हाथ मिला सकते हैं:

छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR)

फ्लोटिंग न्यूक्लियर प्लांट

मेडिकल रेडिएशन टेक्नोलॉजी

कृषि और इंडस्ट्रियल न्यूक्लियर अप्लिकेशन यह सहयोग भारत को न केवल ऊर्जा, बल्कि हाई-टेक सेक्टर्स में भी नई छलांग दिला सकता है।ऊर्जा संसाधनों की लगातार सप्लाई: रूस ने भरोसा दिलाया वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के बावजूद रूस ने साफ कहा है कि वह भारत की ऊर्जा जरूरतों को निरंतर पूरा करता रहेगा:कच्चे तेल की स्थिर सप्लाईगैस क्षेत्र में नए प्रस्ताव कोयले और अन्य संसाधनों की निरंतर उपलब्धता भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, और रूस का यह आश्वासन भारत को वैश्विक ऊर्जा संकटों से एक हद तक सुरक्षित बनाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

ऊर्जा विशेषज्ञ (एनर्जी सिक्योरिटी एनालिस्ट)”कुडनकुलम का 6-यूनिट मॉडल भारत को एक ऐसी स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा देगा, जो न सौर की तरह मौसम पर निर्भर है, न कोयले की तरह प्रदूषित। यह अगला दशक भारत के परमाणु पुनर्जागरण का दशक हो सकता है।”

भू-राजनीतिक विशेषज्ञ“भारत-रूस साझेदारी पश्चिमी दुनिया के दबावों के बीच बहुत संतुलित ढंग से आगे बढ़ रही है। ऊर्जा क्षेत्र में यह सहयोग भारत को स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी (रणनीतिक स्वतंत्रता) देता है।”

आर्थिक विश्लेषक“ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव वाले दौर में स्थिर परमाणु ऊर्जा से भारत की इंडस्ट्रियल कॉस्ट काफी कम हो सकती है।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

भारतीय जनता पार्टी (BJP)“यह मोदी सरकार के मजबूत वैश्विक नेतृत्व का प्रमाण है। भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

”कांग्रेस“

परियोजना का स्वागत है, लेकिन सरकार को पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों पर विस्तृत जानकारी जारी करनी चाहिए। न्यूक्लियर फंडिंग और टेक्नोलॉजी शेयरिंग के पहलुओं पर संसद को जानकारी दी जानी चाहिए।”वाम दल“विदेशी निर्भरता बढ़ रही है। परमाणु ऊर्जा का विस्तार पर्यावरणीय जोखिमों के बिना नहीं आता। सरकार को जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।”AIADMK/DMK (तमिलनाडु आधारित दल)“कुडनकुलम का विस्तार रोजगार और विकास लाएगा, लेकिन स्थानीय लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।”

भारत का ऊर्जा भविष्य: क्या बदल जाएगा?

कुडनकुलम की छह यूनिटें चालू होने पर:

भारत की परमाणु क्षमता 40% तक बढ़ जाएगी

दक्षिण भारत को स्थायी बिजली सप्लाई की ताकत मिलेगी

उद्योगों को सस्ती और स्थिर बिजली उपलब्ध होगी

कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी यह सीधा प्रभाव भारत के 2047 Net Zero लक्ष्य पर पड़ेगा।

निष्कर्ष:

भारत-रूस न्यूक्लियर साझेदारी का नया अध्यायपुतिन की इस घोषणा ने न केवल भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को नई गति दी है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि भारत-रूस संबंध वैश्विक राजनीति के बावजूद मजबूत और भरोसेमंद हैं।कुडनकुलम पैटर्न सिर्फ एक परियोजना नहीं—बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य की रीढ़ बन सकता है।

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