बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 26 मार्च
मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका को केंद्र में ला खड़ा किया है। ईरान ने खुले तौर पर कहा है कि मौजूदा संकट को कम करने में भारत “निर्णायक और सकारात्मक” भूमिका निभा सकता है।
ईरान का भरोसा: “भारत के पास है विशेष स्थान”भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने स्पष्ट कहा:“ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश और संतुलित विदेश नीति के कारण भारत के पास तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने की विशेष क्षमता है।”ईरान ने भारत को “मित्र देश” बताते हुए यह भी संकेत दिया कि:भारत के सभी पक्षों से रणनीतिक संबंध हैं वह गलतफहमियों को दूर करने में विश्वसनीय मध्यस्थ बन सकता है
भारत की कूटनीति: संतुलन की रणनीतिभारत की विदेश नीति लंबे समय से “संतुलन” (Balance Diplomacy) पर आधारित रही है।ईरान से ऊर्जा और ऐतिहासिक संबंध अमेरिका से रणनीतिक और रक्षा साझेदारी इज़रायल से सुरक्षा सहयोग इसी बहुआयामी संबंधों के कारण भारत को “ब्रिज नेशन” (सेतु राष्ट्र) कहा जाता है।
मोदी-ट्रंप वार्ता: शांति पर जोरहाल ही में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत में भी यही रुख सामने आया।सरकारी सूत्रों के अनुसार:भारत ने स्पष्ट कहा कि युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए संघर्ष से सभी देशों को नुकसान हो रहा है समाधान केवल संवाद और कूटनीति से संभव है
“हम दलाल राष्ट्र नहीं”—भारत का सख्त संदेश संसद में सर्वदलीय बैठक के दौरान एस. जयशंकर का बयान भी चर्चा में रहा:“हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।”इस बयान का सीधा संकेत पाकिस्तान की उस कोशिश की ओर था, जिसमें वह मध्यस्थता की भूमिका निभाने की बात कर रहा है।
रक्षा संबंध भी मजबूत तनाव के बीच भारत और अमेरिका ने अपने रक्षा संबंधों की भी समीक्षा की है।संयुक्त सैन्य उत्पादन पर जोर रणनीतिक सहयोग को और गहरा करना दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को मजबूत बनाना यह दर्शाता है कि भारत एक साथ शांति की वकालत और रणनीतिक तैयारी—दोनों रास्तों पर चल रहा है।
ईरान का कड़ा रुख: युद्धविराम से इनकार
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।ईरानी सूत्रों के अनुसार:युद्ध तभी रुकेगा जब ईरान चाहेगाऔर जब उसकी शर्तें पूरी होंगीक्षेत्र में हमले जारी रहेंगेयह रुख इस बात का संकेत है कि स्थिति अभी और जटिल हो सकती है।
विश्लेषण: क्या भारत निभा पाएगा बड़ी भूमिका?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह भारत के लिए एक कूटनीतिक परीक्षा है।
राजनीतिक विश्लेषक:-
भारत के पास अवसर है कि वह खुद को वैश्विक शांति दूत के रूप में स्थापित करे। लेकिन यह आसान नहीं—क्योंकि हर पक्ष के अपने हित हैं।
”शिक्षाविद:-“भारत की ‘संतुलित विदेश नीति’ उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यही उसे अन्य देशों से अलग बनाती है।”
निष्कर्ष:
अवसर या चुनौती?
भारत के सामने आज दोहरी चुनौती है:क्या वह वैश्विक मंच पर शांति निर्माता बन पाएगा?या रणनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए सावधानी से आगे बढ़ेगा?ईरान का यह भरोसा भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी है और परीक्षा भी।आने वाले दिनों में भारत की कूटनीति तय करेगी कि वह केवल “दर्शक” बना रहता है या “निर्णायक भूमिका” निभाता है।
