मगध में सुलग रही सियासत — महागठबंधन के गढ़ में एनडीए की नई चाल, बदले उम्मीदवार और बदली रणनीति , वहीं महागठबंधन भी नए चेहरों के साथ मैदान में

बी के झा

NSK

गया, बिहार/ नई दिल्ली, 25 अक्टूबर

बिहार की राजनीति में मगध हमेशा से सत्ता का बैरोमीटर माना जाता रहा है। यही वजह है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में यह इलाका फिर से राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है।

पांच जिलों — गया, नवादा, जहानाबाद, अरवल और औरंगाबाद — में फैली 26 विधानसभा सीटों पर इस बार एनडीए और महागठबंधन के बीच जबरदस्त मुकाबले के आसार हैं।2020 के विधानसभा चुनाव में यह इलाका पूरी तरह महागठबंधन के कब्जे में चला गया था।

तब एनडीए की हालत इतनी खराब रही कि 26 में से सिर्फ 6 सीटें ही उसके खाते में आईं — जबकि महागठबंधन ने 20 सीटें जीतकर मगध में अपना परचम लहराया था।

2020 की हार से सबक, अब नई चाल पिछली करारी हार के बाद एनडीए इस बार पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरा है। गठबंधन ने न सिर्फ कई सीटों पर उम्मीदवार बदले, बल्कि सामाजिक समीकरणों की सर्जरी भी की है।जेडीयू जहां पिछली बार इस क्षेत्र में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, वहीं भाजपा और हम को तीन-तीन सीटें मिली थीं।इस बार एनडीए ने दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने के लिए लोजपा (रामविलास) और हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) पर भरोसा जताया है।

लोजपा (रामविलास) को मिली 6 सीटें एनडीए ने इस बार लोजपा (RV) को मगध की 6 महत्वपूर्ण सीटें सौंपी हैं।

पार्टी जिन सीटों पर मैदान में है, वे हैं —गया: बोधगया, शेरघाटीनवादा: नवादा, गोविंदपुरजहानाबाद: मखदुमपुर औरंगाबाद: ओबरालोजपा (RV) के शामिल होने से एनडीए को उम्मीद है कि पिछली बार की तरह वोट कटने की स्थिति दोबारा नहीं बनेगी। 2020 में चिराग पासवान की पार्टी ने अकेले चुनाव लड़कर कई सीटों पर एनडीए के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाया था, जिससे महागठबंधन को फायदा हुआ था।

हम को दी गई 5 सीटों की जिम्मेदारी

पूर्व मुख्यमंत्री जितन राम मांझी की पार्टी हम (H.A.M) को इस बार 5 सीटें दी गई हैं —गया: अत्री, वजीरगंज, बाराचट्टी, टेकारी औरंगाबाद: कुटुंबा एनडीए ने लोजपा (RV) और हम — दोनों को दलित और अति पिछड़ा वर्ग के मजबूत चेहरे के रूप में पेश किया है।इन दोनों दलों को 11 सीटों का जिम्मा देकर भाजपा और जेडीयू ने साफ संदेश दिया है कि इस बार रणनीति जातीय समीकरणों से तय होगी, न कि सिर्फ संगठन शक्ति से।

महागठबंधन भी नहीं है कमजोर दूसरी ओर महागठबंधन ने भी अपने गढ़ की रक्षा के लिए कमर कस ली है।राजद ने 2020 में मगध में शानदार प्रदर्शन किया था, 15 सीटें जीतकर उसने क्षेत्र पर अपना दबदबा कायम किया। इस बार तेजस्वी यादव ने खुद मगध के इलाकों में लगातार जनसभाएं कर माहौल गर्मा दिया है।राजद ने इस बार नए चेहरों पर दांव लगाया है। पार्टी ने सिर्फ 5 मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट दिया है और 8 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे हैं।कांग्रेस को 5 सीटें और भाकपा (माले) को 2 सीटें मिली हैं।गौरतलब है कि नवादा से पूर्व विधायक विभा देवी, जिन्होंने राजद छोड़ दी थी,

अब जेडीयू की टिकट पर मैदान में हैं — जो दोनों गठबंधनों के बीच सीधा टकराव और दिलचस्प बना रही है।⚖️ मगध का सामाजिक समीकरण बना चुनाव का केंद्र मगध का राजनीतिक रुझान जातीय और सामाजिक समीकरणों से गहराई से जुड़ा है।यहां की आबादी में दलित, अति पिछड़ा और कुशवाहा समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

2020 में एनडीए को इन समुदायों में दरार का खामियाजा उठाना पड़ा था, जिसे इस बार संतुलित टिकट वितरण से भरने की कोशिश की गई है।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मगध की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, जनाधार की पुनर्स्थापना की है।एनडीए अगर इस क्षेत्र में वापसी करता है, तो यह पूरे बिहार के सियासी गणित को बदल सकता है।वहीं महागठबंधन के लिए यह इलाका प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।मगध की सीटें बिहार की सत्ता की दिशा तय करती हैं।

यहां की जीत पटना तक का रास्ता बनाती है।”— राजनीतिक विश्लेषक अमरेन्द्र कुमार, पटना विश्वविद्यालय

क्यों है मगध बिहार का ‘सियासी थर्मामीटर’यह क्षेत्र पांच जिलों में फैला है और 26 सीटें रखता है — जो राज्य की राजनीति को निर्णायक मोड़ देते हैं।गया जिला पूर्व मुख्यमंत्री जितन राम मांझी और कई वरिष्ठ नेताओं का गृहनगर है।यहां से निकलने वाला राजनीतिक संदेश पूरे दक्षिण बिहार में असर डालता है।

निष्कर्ष:

मगध की लड़ाई इस बार सिर्फ गठबंधन बनाम गठबंधन नहीं, बल्कि रणनीति बनाम सामाजिक समीकरण की लड़ाई है।एनडीए जहां खोया जनाधार वापस लाने की कोशिश में है, वहीं महागठबंधन अपने गढ़ को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।26 सीटों का यह रणक्षेत्र इस बार तय करेगा — क्या एनडीए की नई चाल चलेगी कामयाब, या महागठबंधन बरकरार रखेगा अपना किला?

चुनावी परिदृश्य 2025 विवरण कुल सीटें 26‌ महागठबंधन (2020) 20 सीटेंएनडीए (2020) 6 सीटेंजेडीयू की स्थिति (2020) शून्य सीटलोजपा (RV) 6 सीटों पर मैदान मेंहम (H.A.M) 5 सीटों पर मैदान मेंनिर्णायक वर्ग दलित, कुशवाहा, अति पिछड़ा

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