बी के झा
मधुबनी / पटना, 11 फरवरी
मधुबनी—मिथिला की सांस्कृतिक पहचान वाला यह जिला अब एक बार फिर अपराध, अराजकता और अंतरराष्ट्रीय साजिश के कारण राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। मंगलवार को हुई दो घटनाओं ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दिखा दिया कि कानून का भय अपराधियों के दिल से खत्म हो चुका है और जनता का भरोसा सिस्टम से टूटता जा रहा है।
बाइक नहीं दी, तो सीने में उतार दी गोली
राजनगर थाना क्षेत्र के राघोपुर बलाट में मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे जो हुआ, उसने पूरे जिले को झकझोर दिया। बाइक लूट का विरोध करने पर जयराम मंडल उर्फ जय सिंह (33 वर्ष) को अपराधियों ने सीधे सीने में गोली मार दी।जयराम, जो मधुबनी पोस्ट ऑफिस के पास एक निजी कंप्यूटर दुकान में काम करता था, रोज की तरह बाइक से काम पर निकला था। घर से महज दो किलोमीटर दूर सुनसान सड़क पर बदमाशों ने उसे घेर लिया। बाइक छीनने की कोशिश की गई।जयराम ने विरोध किया—और यही उसकी “गलती” बन गई।बदमाशों ने उसका हाथ मरोड़कर बिलकुल नजदीक से गोली दाग दी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि अपराधी बाइक भी नहीं ले जा सके—
मृतक की मुट्ठी में अब भी बाइक की चाबी फंसी हुई थी।
पुलिस को घटनास्थल से एक खोखा और एक कारतूस मिला है।
शव सड़क पर, अफसर स्कूल में छिपे
हत्या के बाद गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा।
रामपट्टी लाल चौक पर शव रखकर लोगों ने सड़क जाम कर दिया। मधुबनी, राजनगर, पंडौल और झंझारपुर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें चार घंटे तक पूरी तरह ठप रहीं।जब प्रशासनिक अधिकारी समझाने पहुंचे, तो हालात और बिगड़ गए। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस और प्रशासन पर जमकर पथराव किया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि—सदर एसडीएम चंदन कुमार झा सदर-1 एसडीपीओ अमित कुमार सदर-2 एसडीपीओ मनोज कुमार राम को पास के मनमोहन प्लस टू हाईस्कूल में शरण लेनी पड़ी।इसी स्कूल में उस समय इंटर की परीक्षा चल रही थी।
प्रदर्शनकारियों के स्कूल परिसर में घुसने से परीक्षार्थियों में अफरातफरी मच गई। यह दृश्य अपने आप में प्रशासनिक विफलता की तस्वीर बन गया।
कानूनविद: “जब अधिकारी छिपने लगें, तो कानून मर जाता है
”वरिष्ठ अधिवक्ता अजय नारायण झा कहते हैं—“दिनदहाड़े हत्या और फिर अफसरों का स्कूल में छिपना—यह दर्शाता है कि राज्य में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है। अपराधियों को डर नहीं और जनता को भरोसा नहीं।”पूर्व लोक अभियोजक एस.के. वर्मा के अनुसार—“यह हत्या केवल लूट का मामला नहीं है, यह ‘डिटरेंस फेल्योर’ का उदाहरण है। अपराधी जानते हैं कि सजा का डर नहीं है।
”राजनीतिक विश्लेषक: “यह जंगलराज बनाम सुशासन नहीं, सिस्टम फेल्योर है
”राजनीतिक विश्लेषक डॉ. मनीष रंजन कहते हैं—“हर हत्या के बाद एसआईटी बनती है, स्पीडी ट्रायल की घोषणा होती है, लेकिन जमीनी सच्चाई नहीं बदलती। यह अब राजनीतिक बयानबाजी नहीं, संस्थागत विफलता है।”उनका कहना है कि सीमावर्ती जिलों में अपराध और प्रशासनिक ढील राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है।
विपक्ष का हमला:
“बिहार अपराधियों की शरणस्थली बन गया”
घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा प्रहार किया।राजद नेता ने कहा—“युवक अपनी जान बचाने के लिए बाइक नहीं देता और गोली मार दी जाती है। यही है एनडीए का सुशासन?”कांग्रेस प्रवक्ता बोले—“अपराधी बेखौफ हैं और प्रशासन असहाय। यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।”वाम दलों ने इसे “गरीब और मध्यमवर्ग की सुरक्षा पर हमला” बताया।
दूसरी परत: मधुबनी से चीन-नेपाल कनेक्शन वाला साइबर फ्रॉड
इसी मधुबनी से जुड़ा दूसरा मामला और भी गंभीर है।सात सिम बॉक्स बरामदगी के मामले में जांच एजेंसियों को पता चला है कि—इन सिम बॉक्स को चीन में बैठे साइबर अपराधी नियंत्रित कर रहे थे नेपाल के रास्ते इन्हें मधुबनी लाया गया स्थानीय युवक मंदीप के लैपटॉप से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट किया जा रहा था जांच में सामने आया है कि मंदीप का संपर्क काठमांडु के ‘जॉय’ नामक व्यक्ति से अक्टूबर 2025 में हुआ था। नेपाल नंबर की गाड़ी से ट्रॉली बॉक्स में सिम बॉक्स की डिलीवरी दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सूचना दी है।
शिक्षाविद: “यह सिर्फ साइबर फ्रॉड नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है”
सुरक्षा मामलों के जानकार और शिक्षाविद प्रो. रवि भूषण कहते हैं—“सिम बॉक्स का इस्तेमाल ओटीपी फ्रॉड, बैंक ठगी, फर्जी कॉल और आतंकी फंडिंग तक में होता है। चीन-नेपाल कनेक्शन इसे सीधा राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ता है।
”सीमावर्ती जिला, खुला खेल?
मधुबनी नेपाल सीमा से कुछ ही किलोमीटर दूर है।स्थानीय समाजसेवी (नाम गोपनीय रखने की शर्त पर) का कहना है—“यहां अवैध शराब, चरस, हथियार और घुसपैठ कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में यह सब खुलेआम हो रहा है।”उन्होंने आरोप लगाया—“जब से गृह विभाग की जिम्मेदारी बीजेपी कोटे से उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी के पास गई है, इन गतिविधियों में तेज़ी आई है। यह न बिहार के हित में है, न देश के।”
निष्कर्ष:
अपराध अलग-अलग, जड़ एक
मधुबनी की ये दोनों घटनाएं अलग नहीं हैं—एक तरफ सड़क पर गोली चलाने वाले अपराधी दूसरी तरफ सीमा पार से देश को खोखला करने वाला साइबर नेटवर्क दोनों की जड़ में है— कमज़ोर निगरानी, राजनीतिक संरक्षण का आरोप और जवाबदेही का अभाव।
आज सवाल सिर्फ जयराम मंडल की हत्या का नहीं है,सवाल यह है कि—
क्या बिहार के सीमावर्ती जिले सुरक्षित हैं?
क्या आम नागरिक की जान की कीमत है?
और क्या सरकार इस आग को केवल बयान से बुझा पाएगी?
अगर नहीं, तो यह आग मधुबनी तक सीमित नहीं रहेगी।
NSK


