बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 13 फरवरी
राजधानी दिल्ली के विधि जगत में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल पेशे से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व और सामाजिक प्रतिबद्धता से पहचान बनाते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह उन्हीं में से एक माने जाते हैं। बिहार के बक्सर की धरती से निकलकर दिल्ली की न्यायिक परिधि में स्थापित हुए मनोज कुमार सिंह ने अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी समान महत्व दिया है।
बक्सर से दिल्ली तक का सफर
ग्रामीण परिवेश में जन्मे मनोज कुमार सिंह ने प्रारंभिक जीवन में ही संघर्ष और अनुशासन को करीब से देखा। विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली को अपनी कर्मभूमि बनाया। समय के साथ वे न केवल न्यायालयीन प्रक्रियाओं में दक्ष हुए, बल्कि अधिवक्ता समुदाय के भीतर संगठनात्मक और मार्गदर्शक भूमिका में भी उभरे।उनके सहयोगियों का कहना है कि वे विशेष रूप से बिहार और पूर्वांचल से आए युवा अधिवक्ताओं को पेशेवर मार्गदर्शन देने में सक्रिय रहे हैं। हालांकि उनका दायरा केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने व्यापक विधि समाज के हित में काम किया।
कोविड काल में सामाजिक प्रतिबद्धता
साल 2020 की कोविड-19 महामारी ने जब देश को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया था, तब मनोज कुमार सिंह ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया। दिल्ली में फंसे अधिवक्ताओं और जरूरतमंद लोगों के लिए राहत सामग्री और अन्य सहायता उपलब्ध कराई गई।उनके करीबी बताते हैं कि उस कठिन समय में उन्होंने व्यक्तिगत संसाधनों का उपयोग कर कई परिवारों तक सहायता पहुँचाने का प्रयास किया।
दिल्ली के नांगलोई स्थित कुंवर सिंह पार्क क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराकर हजारों पूर्वांचली , बिहारियों को आश्रय देने की पहल भी उनके सामाजिक योगदान के रूप में चर्चा में रही है।
न्यायालय और आमजन: उनकी प्राथमिकता
मनोज कुमार सिंह का मानना है कि न्यायालय केवल अधिवक्ताओं का कार्यक्षेत्र नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का सबसे सशक्त मंच है। वे कहते हैं कि विधिक जानकारी का अभाव अक्सर आम लोगों को न्याय से दूर कर देता है।उनके अनुसार,“वकील की भूमिका केवल बहस तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया आम नागरिक के लिए समझने योग्य और सुलभ हो।”सहयोगियों का कहना है कि वे विशेष रूप से उन मामलों में मार्गदर्शन देने का प्रयास करते हैं जहाँ आमजन को कानूनी प्रक्रिया जटिल प्रतीत होती है। कई युवा अधिवक्ता भी उनके अनुभव को सीखने का अवसर मानते हैं।
बीसीडी बार एसोसिएशन काउंसिल चुनाव में भागीदारी
वर्तमान में मनोज कुमार सिंह बीसीडी बार एसोसिएशन काउंसिल के चुनावी मैदान में हैं। उनकी टीम को बैलेट नंबर 88 आवंटित किया गया है। विधि समुदाय के भीतर उनके अनुभव, संगठनात्मक दृष्टिकोण और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के विचारों को लेकर चर्चा हो रही है।वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि मनोज कुमार सिंह ने अपने पेशेवर जीवन में सहयोग और समर्पण की भावना को प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार, विधि समाज में ऐसे व्यक्तित्व संगठनात्मक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेष बातचीत
(वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह से बातचीत के प्रमुख अंश)
प्रश्न: आप विधि क्षेत्र में अपनी प्राथमिकता किसे मानते हैं?उत्तर: मेरी प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि अधिवक्ता समुदाय मजबूत हो और आमजन को न्याय सुलभ हो। यदि न्याय प्रणाली लोगों तक सहज रूप से पहुँचे, तभी उसकी सार्थकता है।
प्रश्न: कोविड काल का अनुभव आपके लिए क्या रहा?
उत्तर: वह समय मानवीय संवेदना की परीक्षा का था। जितना संभव था, हमने लोगों तक सहायता पहुँचाने की कोशिश की। समाज से जो मिला है, उसे लौटाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
प्रश्न: बीसीडी चुनाव में आपकी सोच क्या है?
उत्तर: संगठन को मजबूत करना, अधिवक्ताओं की पेशेवर चुनौतियों को समझना और न्यायालयीन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना—ये कुछ प्रमुख बिंदु हैं जिन पर मैं काम करना चाहता हूँ।
निष्कर्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह का सार्वजनिक जीवन इस विचार पर आधारित प्रतीत होता है कि विधि केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है। पेशेवर दक्षता, संगठनात्मक सक्रियता और सामाजिक प्रतिबद्धता—
इन तीनों आयामों ने उन्हें विधि जगत में एक विशिष्ट पहचान दी है।बीसीडी बार एसोसिएशन काउंसिल के चुनाव में उनकी भागीदारी ने विधि समुदाय के भीतर नई चर्चा को जन्म दिया है।
आने वाला समय यह तय करेगा कि उनकी सोच और अनुभव संगठनात्मक स्तर पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं
