बी के झा
NSK


नई दिल्ली / मुंबई / पटना , 26 नवंबर
महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार में अंदरूनी तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच नेताओं की “क्रॉसओवर पॉलिटिक्स” किसी भी समझौते या निर्देश को मानने को तैयार नहीं दिख रही।बीते दिनों गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद माना जा रहा था कि दोनों दलों के बीच सियासी खरीद-फरोख्त का विवाद थम जाएगा, लेकिन ठीक इसके विपरीत—
BJP ने शिवसेना के तीन नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर तनाव की आग में फिर घी डाल दिया है।समझौते के बावजूद BJP की सेंधमारी—शिवसेना में नाराज़गी चरम परदोनों दलों में पिछले सप्ताह यह स्पष्ट सहमति बनी थी कि कोई भी पार्टी दूसरे की नेतृत्व संरचना और स्थानीय संगठन में सेंध नहीं लगाएगी। हालाँकि सोमवार को इस सहमति को दरकिनार करते हुए BJP ने:अंबरनाथ से वरिष्ठ शिवसेना नेता व ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रूपसिंह धाल,संभाजीनगर से शिवसेना नेता आनंदा ढोके,और महिला विंग की जिलाध्यक्ष शिल्पारानी वाडकर को पार्टी में शामिल कर लिया।यह शामिलीकरण महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में हुआ, जिसने संकेत दिया कि निर्णय सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि ऊपर की मंजूरी के साथ लिया गया।
शिवसेना की तीखी प्रतिक्रिया: “BJP ने नहीं रोका तो हम भी जवाब देंगे, नतीजे भुगतने होंगे”शिवसेना मंत्री और संभाजीनगर के गार्जियन मंत्री संजय शिरसाट ने साफ चेतावनी दी:“अगर बीजेपी ने हमारे नेताओं को तोड़ना बंद नहीं किया तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे। शिवसेना भी जवाबी कदम उठाने को तैयार है।”उन्होंने आगे कहा कि यह घटनाक्रम कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा कर रहा है,गठबंधन की विश्वसनीयता कमजोर कर रहा है,और स्थानीय निकाय चुनावों पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
शिरसाट ने महायुति के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हुए कहा:“अगर हमारी ताक़त को खत्म करने की कोशिश जारी रही तो एक साथ चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं रह जाता।”BJP का नजरिया: “नतीजे आने दीजिए, सारे मतभेद खत्म हो जाएंगे”राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जवाब दिया कि“राजनीतिक कार्यकर्ता विकल्प तलाशते रहते हैं…
3 दिसंबर के चुनाव नतीजे आने दीजिए, सब मतभेद मिट जाएंगे।”लेकिन राजनीतिक हलकों में यह बात स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में महायुति की कलह सिर्फ चुनावी नहीं—बल्कि नेतृत्व संघर्ष और वर्चस्व की लड़ाई भी है।
महाराष्ट्र की कलह दिल्ली-पटना तक असर डाल रही:
क्या बनने जा रहा है नया राष्ट्रीय समीकरण?
महाराष्ट्र की इस उठा-पटक का असर अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहा।
सूत्रों का दावा है कि इन घटनाओं पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी गहरी नजर बनाए हुए हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:“फडणवीस जिस पैटर्न पर शिंदे गुट में सेंध लगा रहे हैं, वही पैटर्न केंद्र में भी सुगबुगाहट पैदा कर रहा है। नीतीश कुमार मन ही मन चिंतित हैं। अगर साथी दलों को कमजोर करने का यह ट्रेंड बढ़ा तो वे बड़े राजनीतिक फैसले ले सकते हैं।”
इंडिया गठबंधन की अंदरूनी हलचल:
क्या नीतीश पर फिर से दांव लगाने को तैयार हैं?
सूत्रों के अनुसार:INDIA गठबंधन के भीतर चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के बीच गुप्त संवाद बढ़ा है ममता बनर्जी ने भी नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद के सबसे सहमति योग्य चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई है विपक्षी खेमे में यह आकलन तेज है कि“अगर मोदी सरकार के सहयोगी दलों में दरारें बढ़ती हैं, तो केंद्र में समीकरण बदला जा सकता है।”इसी संदर्भ में सवाल यह भी उठ रहा है—
क्या चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार मुंबई-पटना-हैदराबाद की नई तिकड़ी बनने जा रहे हैं?
क्या नायडू बीजेपी से समर्थन वापस लेकर नीतीश को दिल्ली की दौड़ में आगे कर सकते हैं?
क्या इंडी महगठबंधन के समर्थन से नीतीश कुमार बिहार से पहला प्रधानमंत्री बनने वाले हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फिलहाल सम्भावना के दायरे में तो है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय कई राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष:
महाराष्ट्र की टूट-फूट से राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज महाराष्ट्र में महायुति की नाव पानी से अधिक राजनीति के तूफानों में हिल रही है शिंदे और फडणवीस के बीच बढ़ती खाई गठबंधन को अस्थिर बना सकती है इसका असर अन्य NDA राज्यों में भी दिखाई देने लगा हैऔर इसी राजनीतिक उठापटक के बीच दिल्ली की सत्ता की चाबियों पर नई चर्चाएँ तेज हो गई हैंआने वाले हफ्ते महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य को भी नया मोड़ दे सकते हैं।
