बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पटना, 8 दिसंबर
मुजफ्फरपुर के व्यस्ततम इलाके मोतीझील में दिनदहाड़े हुई 3.11 लाख रुपये की लूट घटना ने बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।पंजाब नेशनल बैंक के गेट पर सोमवार दोपहर 12:21 बजे पेट्रोल पंप कैशियर मणिकांत श्रीवास्तव पर तीन बाइकसवार अपराधियों ने पिस्टल तानकर हमला किया और कैश लूटकर कुछ ही सेकंड में फरार हो गए।जिस जगह यह वारदात हुई, वह शहर की सबसे भीड़भाड़ वाली और पुलिस गश्ती वाले क्षेत्रों में गिनी जाती है—फिर भी अपराधियों ने मानो पुलिस को खुली चुनौती देते हुए 3 सेकंड में पूरी वारदात अंजाम दी।
कैसे हुई लूट – ‘3 सेकंड का ऑपरेशन’कन्हौली निवासी मणिकांत श्रीवास्तव—दशकों से स्टेशन रोड के एलके बोस पेट्रोल पंप के कैशियर रोज की तरह कैश लेकर पंजाब नेशनल बैंक, पांडे गली में जमा करने निकले साइकिल के हैंडल पर रुपए वाला बैंग-बैंग गेट पर जैसे ही रुके—पीछे से तीन अपराधियों ने घेर लिया एक ने पिस्टल के बट से हाथ पर हमला कियाबैग छीनकर पांडे गली → दीवान रोड की ओर भाग निकले CCTV फुटेज में अपराधी स्पष्ट दिखे, लेकिन अब तक गिरफ्त में नहीं यह घटना न सिर्फ मुजफ्फरपुर, बल्कि पूरे बिहार में लगातार बढ़ते अपराधों की भयावह तस्वीर पेश करती है।
राजनीतिक तूफान – विपक्ष ने नीतीश सरकार को घेरा BJP का हमला – “बिहार अपराधियों के हवाले”बिहार बीजेपी ने इसे सीधी भाषा में विफल शासन करार दिया—दिन-दहाड़े शहर के दिल में लूट… अपराधी ऐसे घूम रहे जैसे जंगलराज वापस आ गया हो। पुलिस सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त है।
”एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा—कैमरा के सामने अपराध और पुलिस सिर्फ बयान दे रही है—यह नीतीश सरकार की कानून-व्यवस्था की असलियत है।”
RJD की प्रतिक्रिया – ‘कानून व्यवस्था सचमुच खतरे में’RJD नेताओं ने भी जदयू-बीजेपी गठबंधन के पिछले दौरों को याद दिलाते हुए कहा—जदयू जब-जब अपनी राजनीतिक दिशा बदलती है, अपराध बढ़ जाता है। मुजफ्फरपुर का यह मामला इसका ज्वलंत उदाहरण है।कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि—लूट, हत्या, अपहरण… बिहार फिर उसी पुराने चक्र में लौटता दिख रहा है।”
कांग्रेस – “अब प्रशासन सिर्फ कागज पर है”कांग्रेस प्रवक्ता ने घटना पर कहा—जब शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में इतनी बड़ी लूट हो जाए, तो समझिए सिस्टम सिर्फ फाइलों में बचा है। सरकार अपराधियों से कमजोर पड़ चुकी है।”
जदयू और प्रशासन की सफाई — ‘पुलिस सक्रिय है, अपराधी जल्द पकड़े जाएंगे’जदयू के स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि—यह isolated incident है। अपराधियों की पहचान हो गई है, गिरफ्तारी जल्द होगी।”वहीं पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि CCTV फुटेज के आधार पर3 टीमें गठित कर तलाश जारी है।लेकिन जनता का गुस्सा कम नहीं—लोग खुले आम कह रहे हैं—मुजफ्फरपुर पुलिस सिर्फ प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मजबूत है, सड़क पर नहीं।”
राजनीतिक विश्लेषण — ‘यह सिर्फ लूट नहीं, सिस्टम की दरार है’विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इन बड़े सवालों की ओर संकेत है—
अपराधियों का बढ़ता नेटवर्कदिनदहाड़े शहर के केंद्र में हथियारबंद लूट बताती है कि अपराधी बेखौफ हैं।
पुलिस की गश्ती व्यवस्था और इंटेलिजेंस कमजोरमोतीझील जैसे अति संवेदनशील इलाके में 3 सेकंड की लूट—लॉ एंड ऑर्डर की विफलता का प्रमाण।
छोटे कैशियर, व्यापारी, Petrol Pump कर्मचारियों में भयपिछले महीनों में छोटे व्यापारियों पर हमले बढ़े हैं—ये घटना उस डर को और गहरा करती है।
बिहार की राजनीतिक स्थिरता पर असर2025 के विधानसभा चुनाव करीब—अपराध मुद्दा बनने जा रहा है।
जनता की आवाज – ‘अब सुरक्षा भगवान भरोसे है’मोतीझील और दीवान रोड के व्यापारियों ने एक सुर में कहा—जिस शहर में दिनदहाड़े बैंक गेट पर लूट हो जाए, वहाँ आम आदमी की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
निष्कर्ष —
मुजफ्फरपुर की लूट सिर्फ एक घटना नहीं… यह चेतावनी हैयह घटना बिहार सरकार और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर संकेत है कि—
अपराधियों का मनोबल मजबूत है
पुलिस तंत्र प्रतिक्रियात्मक, सक्रिय नहीं
राजनीतिक दल आरोप-प्रत्यारोप में उलझे
और आम जनता असुरक्षित मुजफ्फरपुर की यह वारदात कानून-व्यवस्था की उस दरार को उजागर करती है जिसे भरना सरकार के लिए अब अनिवार्य हो चुका है।
