बी के झा
NSK

पटना, 8 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है। एनडीए के प्रमुख चेहरों में शामिल और केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने न्यूज़ 18 इंडिया से बातचीत में ऐसा बयान दिया है जिसने चुनावी माहौल में नया ट्विस्ट जोड़ दिया है।
चिराग पासवान ने कहा
अगर एनडीए की सरकार बनती है, तो मैं डिप्टी सीएम बनने की इच्छा नहीं रखता। लेकिन मौका मिला तो अपनी पार्टी के किसी नेता को डिप्टी सीएम बनवा सकता हूं।”उन्होंने आगे दावा किया कि—“2025 में बिहार में नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन मैं खुद डिप्टी सीएम नहीं बनूंगा। मैं 2030 के लिए अपनी राजनीति तैयार कर रहा हूं।“सबसे ज़्यादा राजनीतिक सलाह मां से लेता हूँ”
चिरागचिराग पासवान ने कार्यक्रम में यह भी कहा कि वे अपनी राजनीतिक दिशा अपनी मां के मार्गदर्शन में तय करते हैं।उन्होंने कहा—“जैसे पिता को सलाह मां देती थीं, वैसे ही आज मुझे भी वही दिशा दिखाती हैं।”एलजेपी (रामविलास) इस चुनाव में 29 सीटों पर मैदान में है। चिराग ने दावा किया कि लंबे प्रयास के बाद बीजेपी को इतना बड़ा सीट-कोटा देने के लिए राज़ी किया जा सका।पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग और बदलते राजनीतिक समीकरण पहले चरण की बंपर वोटिंग के बाद हर दल अपनी जीत का दावा कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर कहा—“बिहार ने जंगलराज वालों को 65 वोल्ट का झटका दिया है। वोटिंग साफ दिखाती है कि युवा विकास के साथ हैं।”चिराग पासवान का यह बयान प्रधानमंत्री की लाइन के समान ही एनडीए का आत्मविश्वास दर्शाता है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया — बयान महत्वाकांक्षा ज़्यादा और गणित कम’
चिराग के “मेरी पार्टी का डिप्टी सीएम बनेगा” वाले बयान पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
वरिष्ठ शिक्षाविद का तंजएक स्थानीय वरिष्ठ शिक्षाविद ने टिप्पणी की—“
चिराग पूरी तरह अपने पिता रामविलास पासवान के रास्ते पर चल रहे हैं। पिता भी हमेशा सत्ता के केंद्र में रहना चाहते थे, लेकिन कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। चिराग को पहले यह देखना चाहिए कि उनकी पार्टी इस बार विधानसभा में कितनी सीटें ला पाती है।”उन्होंने आगे कहा—“एक्ज़िट पोल उनके दल को 2–3 सीटें दे रहे हैं, ऐसे में डिप्टी सीएम वाली बात अभी सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाज़ी ही लगती है।”
एक वरिष्ठ पत्रकार की मुस्कुराती प्रतिक्रिया
एक प्रतिष्ठित पत्रकार ने हंसते हुए कहा—“क्यों नहीं?
चिराग मोदी–शाह के दुलारे हैं, राजनीति में कुछ भी संभव है।”लेकिन उन्होंने आगे एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया—“क्या बिहार BJP या JDU इस बात को स्वीकार करेगी? और अगर नहीं किया, तो क्या नीतीश कुमार भविष्य में फिर से गठबंधन बदलने का मन बना लेंगे?”उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति का इतिहास “अनपेक्षित मोड़ों और अचानक समीकरण बदलने” से भरा है, इसलिए अगले कुछ महीने बहुत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
चिराग की 2030 की योजना — दूर की राजनीति या रणनीतिक संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि चिराग का 2030 का जिक्र यह संकेत देता है कि वे खुद को दीर्घकालिक खिलाड़ी के रूप में पेश करना चाहते हैं।यह बयान युवा मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की रणनीति भी हो सकता है।क्या एनडीए में डिप्टी सीएम की कुर्सी एलजेपी (रामविलास) को मिल सकती है?यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।J
DU नीतीश कुमार के नेतृत्व में मजबूत दावेदारी रखती है BJP 2010 और 2020 की तरह अपने हिस्से के प्रभाव को कम नहीं करना चाहेगीऔर LJP (रामविलास) का प्रदर्शन अभी अनिश्चित हैऐसे में डिप्टी सीएम की कुर्सी चिराग के दल तक पहुँचेगी या नहीं, यह चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगा।
अंत में —
बिहार की राजनीति बड़े मोड़ की ओर?चिराग पासवान का यह बयान चुनावी मैदान में नई हलचल पैदा कर चुका है।अब देखने वाली बात यह है कि—
क्या एलजेपी (रामविलास) उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करती है?
क्या BJP–JDU डिप्टी सीएम पर नया फार्मूला तैयार करते हैं?
या
क्या मतगणना के बाद फिर एक बार बिहार की राजनीति में अप्रत्याशित करवट देखने को मिलेगी?
