बी के झा
NSK

पटना / मोकामा/ न ई दिल्ली, 1 नवंबर
बिहार चुनावी माहौल के बीच मोकामा में हुई जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। अब इस मामले में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर तीखा प्रहार किया है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सत्ता के संरक्षण में अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।“हत्या हुई, FIR दर्ज हुई,
लेकिन कोई कार्रवाई नहीं” — तेजस्वी यादव ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा ,दिनदहाड़े हत्या होती है, नामजद FIR दर्ज होती है, लेकिन आरोपी थाने के सामने से गुजरता है और प्रचार करता है। वह 40 गाड़ियों के काफिले के साथ हथियार लेकर घूम रहा है। हत्या हुई है, लेकिन एक भी व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं हुई।”
उन्होंने आगे कहा,चुनाव आयोग कहां है? क्या चुनाव आयोग मर गया है? क्या उसका कानून सिर्फ विपक्ष के लोगों के लिए है, सत्ता में बैठे लोगों के लिए नहीं? अपराधी बेलगाम हैं और सरकार उन्हें खुला संरक्षण दे रही है।”
“चुनाव में पैसों की खुली बौछार
”तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान खुलेआम पैसों का वितरण हो रहा है और चुनाव आयोग आंख मूंदे बैठा है।
उन्होंने कहा,10-10 हजार रुपये तक बांटे जा रहे हैं, लेकिन आयोग कार्रवाई नहीं कर रहा। बिहार की जनता सब देख रही है, इस बार भाजपा-एनडीए को सत्ता से उखाड़ फेंकने का काम करेगी।
”क्या है मोकामा कांड?
गुरुवार को मोकामा के तारताड़ गांव में जनसुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि जब वे जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार में शामिल थे, तभी दो गुटों में भिड़ंत हो गई।इस दौरान हिंसा भड़क उठी और गोलियां चलीं। दुलारचंद को गोली पैर में लगी थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने एक नया मोड़ दे दिया।पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला बड़ा राज
डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद यादव की मौत फेफड़ा फटने और सीने की कई पसलियां टूटने से हुई है।
रिपोर्ट में लिखा गया है —कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर विद ब्लंट इंजरी टू चेस्ट एंड हेड”अर्थात, छाती और सिर पर गहरी चोटों के कारण फेफड़े फट गए और हृदय व सांस की प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया।
नामजद FIR, पर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं
दुलारचंद के पोते की शिकायत पर पुलिस ने जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह, उनके भतीजों रणवीर सिंह और कर्मवीर सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। आरोपियों पर हत्या, हत्या का प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
स्थानीय लोगों में रोष, प्रशासन पर सवाल
मोकामा में लोगों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर गहरा असंतोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई “धीमी नहीं, बल्कि जानबूझकर धीमी” है।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,जब सबकुछ सरकार के इशारे पर होता है, तो स्थानीय प्रशासन क्या कर सकता है?
चुनाव आयोग की निष्क्रियता ने अपराधियों का मनोबल बढ़ाया है। यह हत्याकांड एक साफ संदेश देता है कि जो विरोध करेगा, उसका यही अंजाम होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मोकामा कांड सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि बिहार की चुनावी संस्कृति पर गंभीर प्रश्न है।विश्लेषक डॉ. संजीव रंजन के अनुसार,यह मामला चुनाव आयोग की निष्पक्षता की परीक्षा बन चुका है। जनता अब तय करेगी कि लालू यादव का ‘जंगलराज’ बड़ा था या वर्तमान सरकार का ‘कानूनराज’ सिर्फ नाम का है।
आगे क्या?
मोकामा कांड ने बिहार चुनाव को नया मोड़ दे दिया है। अब जनता और विपक्ष दोनों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चुनाव आयोग और प्रशासन वास्तव में इस हत्याकांड में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा या मामला चुनाव के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
