बी.के. झा
NSK

पटना/ मोकामा, 31 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा का माहौल अचानक हिंसा और तनाव में तब्दील हो गया है। जन सुराज कार्यकर्ता और चर्चित बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या ने न सिर्फ इलाके की फिज़ा को झकझोर दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य के डीजीपी विनय कुमार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर चुनावी निष्पक्षता पर खतरा पाया गया, तो सख्त कार्रवाई से परहेज़ नहीं किया जाएगा।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि:
प्रचार के बीच चली गोलियां, कुचले गए दुलारचंदगुरुवार को मोकामा के टाल क्षेत्र के खुशहालचक इलाके में यह वारदात हुई। जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ रोड शो कर रहे थे। इसी दौरान उसी मार्ग से जदयू प्रत्याशी और पूर्व विधायक अनंत सिंह का काफिला भी गुजर रहा था। दोनों पक्षों के समर्थकों में कहासुनी हुई, जो कुछ ही पलों में हिंसा में बदल गई।देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे, वाहनों के शीशे टूट गए और फिर गोलियों की गूंज से इलाका दहल उठा। इस झड़प में दुलारचंद यादव को पैर में गोली लगी, जिससे वे सड़क पर गिर पड़े। गवाहों के मुताबिक, इसके बाद उन पर वाहन चढ़ा दिया गया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस हत्याकांड में जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह समेत पाँच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, वहीं क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि तनाव न फैले।
सियासी तापमान चरम पर: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
शुरूदुलारचंद की हत्या के बाद मोकामा का चुनावी समर और भी गरम हो गया है। एक ओर जन सुराज कार्यकर्ता इसे “राजनीतिक हत्या” बता रहे हैं, वहीं अनंत सिंह ने सूरजभान सिंह और उनके समर्थकों पर “साजिश का आरोप” लगाया है।दुलारचंद की शवयात्रा के दौरान भी तनाव बना रहा। इसी दौरान राजद प्रत्याशी और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी की गाड़ी पर पथराव किया गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। सूरजभान और उनकी पत्नी वीणा देवी ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
तेजस्वी यादव का हमला: “कहां है प्रशासन?
”राज्य की राजनीति में इस घटना ने नई हलचल पैदा कर दी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार और प्रशासन पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा,जब चुनावी आचार संहिता लागू है, तब यह कैसा राज है जहां बाहुबली खुलेआम गोलियां चला रहे हैं?
प्रशासन किसे बचा रहा है और किसे दबा रहा है? 40-40 गाड़ियों के काफिले के साथ कौन घूम रहा है — क्या यह लोकतंत्र है या दादागीरी?”
तेजस्वी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को इस घटना का “स्वयं संज्ञान” लेना चाहिए ताकि चुनाव की निष्पक्षता बनी रहे।
अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ीं,
जन सुराज के लिए सहानुभूति लहरस्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस हत्या ने मोकामा के चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ,दुलारचंद यादव जन सुराज के स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली चेहरा थे। उनकी हत्या ने मतदाताओं में गहरी संवेदना जगाई है। इससे जन सुराज को भावनात्मक सहानुभूति मिलने की संभावना है, जबकि अनंत सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।”
चुनाव आयोग की निगरानी में अब मोकामा
इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने डीजीपी से 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी साक्ष्य संरक्षित किए जाएं और किसी भी आरोपी को राजनीतिक दबाव में राहत न मिले।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आयोग का यह रुख बिहार में चुनावी हिंसा पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अब निगाहें 14 नवंबर परपहले चरण के मतदान से पहले मोकामा का यह हत्याकांड बिहार चुनाव को नई दिशा दे गया है।अब सवाल यह है कि जब 14 नवंबर को मतपेटियां खुलेंगी, तो क्या यह “जन सुराज के प्रति सहानुभूति लहर” किसी को फायदा दिलाएगी या मोकामा फिर से बाहुबल और भय की राजनीति के गर्त में चला जाएगा?
