मोदी की काशी में ‘स्वच्छता पर सख्ती’: सड़क पर थूकने पर ₹1000, डॉगी की पोटी पर ₹500 जुर्माना — वाराणसी में लागू हुई नई स्वच्छता नियमावली

बी.के. झा

वाराणसी ( उत्तर प्रदेश) / न ई दिल्ली, 28 अक्टूबर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) में अब “स्वच्छता” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि कानून का रूप ले चुकी है।नगर निगम ने उत्तर प्रदेश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता नियमावली 2021 को पूरी तरह लागू कर दिया है — और इसके साथ ही अब शहर में थूकने, कूड़ा फेंकने, खुले में पालतू जानवरों को मलत्याग कराने तक पर तत्काल जुर्माना वसूला जाएगा।

नगर आयुक्त अक्षत वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा —काशी को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की जननी कहा जाता है। अब वक्त है कि इसे अनुशासन और जिम्मेदारी से सजाया जाए।”

पुरानी नियमावली खत्म, नई ‘फाइन बुक’ लागू2017 में लागू पुरानी नियमावली को तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिया गया है।अब नई “जुर्माना बुक” के तहत 33 बिंदुओं पर स्पॉट फाइन यानी मौके पर ही वसूली की जाएगी।यह व्यवस्था शहर के सभी वार्डों में लागू होगी और बार-बार उल्लंघन करने वालों पर एफआईआर तक दर्ज की जा सकेगी।

अब ऐसा करेंगे तो लगेगा जुर्मानाउल्लंघन जुर्माना राशिसड़क पर थूकना या कूड़ा फेंकना ₹1000पालतू जानवर (डॉगी आदि) को सार्वजनिक स्थान पर पॉटी कराना ₹500खुले मैदान, पार्क या खाली जमीन पर गंदगी फैलाना ₹500नदियों, सीवर या जलमार्ग में पूजा सामग्री या गंदगी फेंकना ₹750धार्मिक स्थलों, स्कूलों या अस्पतालों के पास गंदगी ₹750घर या परिसर में मलबा/कचरा 24 घंटे से ज्यादा रखना ₹500वाहन से चलते या खड़े होकर कूड़ा फेंकना ₹1000नालों या सीवर में कचरा डालना ₹500खुले नालों में अपशिष्ट डालना जिससे जाम हो ₹1000निर्माण मलबा सड़कों या नालियों के किनारे फेंकना ₹3000पालतू जानवर को खुले में पेशाब-मलत्याग की अनुमति देना ₹500खुले वाहन में कचरा ढोना (अनकवर्ड ट्रक) ₹2000नगर निगम की संपत्ति (डिब्बा, गाड़ी आदि) को नुकसान पहुँचाना ₹2000नदी या नाले में शवों का अनुचित निस्तारण ₹3000अपने परिसर में जल जमाव या अस्वच्छ स्थिति रखना ₹5000प्लास्टिक और थर्माकोल का प्रयोग अधिनियम 2000/2018 के तहत कठोर दंडविक्रेता द्वारा अपृथक्कृत कचरा रखना ₹25 प्रतिदिन

संस्थान भी जिम्मेदार — स्कूल, होटल और अस्पताल पर भी सख्तीनगर निगम ने स्पष्ट किया कि सिर्फ नागरिक नहीं, संस्थान भी जिम्मेदार होंगे।जो स्कूल, होटल, अस्पताल, आयोजन स्थल या रेस्टोरेंट कचरा पृथक्करण (सेग्रिगेशन) का पालन नहीं करेंगे, उन पर प्रतिमाह अतिरिक्त जुर्माना लगेगा।भंडारा, लंगर या सार्वजनिक आयोजन करने वाले संस्थानों को भी स्थल पर गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे रखना अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने पर ₹2000 का जुर्माना तय किया गया है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर ₹5000 फाइनयदि कोई ठेकेदार या कर्मचारी बिना सेफ्टी उपकरणों के किसी व्यक्ति से सेप्टिक टैंक या सीवर की सफाई कराता है, तो उस पर ₹5000 का जुर्माना लगेगा।नगर आयुक्त ने कहा कि —मानव जीवन से बड़ा कोई काम नहीं। सफाई कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

पालतू जानवरों के लिए भी सख्त नियमअब पालतू पशु के मालिक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका जानवर सार्वजनिक स्थान पर मलत्याग न करे।यदि ऐसा होता है, तो स्वामी को मल अपने घर ले जाकर निस्तारित करना होगा — अन्यथा ₹500 का जुर्माना।

काशी मॉडल’ बनेगा देशभर के लिए उदाहरणनगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह पहल वाराणसी को देश का सबसे स्वच्छ और अनुशासित नगर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।प्रधानमंत्री मोदी ने जिस काशी से “स्वच्छ भारत” की शुरुआत की थी, अब वही काशी “स्वच्छता अनुशासन” का मॉडल बनने जा रही है।सड़क पर थूकना अब आदत नहीं, अपराध माना जाएगा।”— अक्षत वर्मा, नगर आयुक्त, वाराणसी

जनजागरूकता अभियान भी शुरूवाराणसी नगर निगम अब प्रत्येक वार्ड में ‘स्वच्छ काशी अभियान 2.0’ के तहत प्रचार-वाहन और नुक्कड़ नाटक चलाएगा ताकि लोग नियमों से अवगत रहें।पहली बार नियम तोड़ने वालों को चेतावनी के साथ पर्चा दिया जाएगा, दूसरी बार सीधे जुर्माना।

निष्कर्ष

:काशी में अब स्वच्छता “संस्कार” नहीं, “संहिता” बन चुकी है।थूकने से लेकर थैली तक, अब हर गंदगी पर लगेगी कीमत —क्योंकि यह सिर्फ शहर नहीं, “मोदी की काशी” है, जहां सफाई अब श्रद्धा बन चुकी है।

NSK

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