बी के झा
NSK

श्रीनगर/ न ई दिल्ली , 19 नवंबर
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क और ऑनलाइन कट्टरपंथ पर कड़ी कार्रवाई के बीच मंगलवार को काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने दक्षिण कश्मीर के एक सरकारी डॉक्टर और उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर बड़ा खुलासा किया है। दंपति पर आरोप है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिये युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसा रहे थे और आतंकियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
चार जिलों में छापेमारी, डॉक्टर-दंपति हिरासत में एनआईए कोर्ट से मिले तलाशी वारंट पर चलते हुए CIK टीमों ने श्रीनगर, कुलगाम और अनंतनाग के कुल चार ठिकानों पर तड़के सर्च ऑपरेशन चलाया।इस अभियान के दौरान कुलगाम के बुगाम निवासी और वर्तमान में श्रीनगर के शीरन बाग इलाके में रहने वाली शहजादा अख्तर और उसके पति डॉ. उमर फारूक भट को हिरासत में लिया गया।
डॉ. भट वर्तमान में एसएमएचएस अस्पताल, श्रीनगर के सुपर स्पेशियलिटी विंग में तैनात है — और यही पेशेवर पहचान कथित कट्टरपंथी गतिविधियों को छिपाने में उसका ‘कवर’ बन रही थी।
सोशल मीडिया पर ‘अंडरकवर कट्टरपंथ अभियान’CIK के अनुसार दंपति सोशल मीडिया पर फेक या गुप्त हैंडल के माध्यम से आतंकवाद का महिमामंडन कर रहा था।
सूत्रों का दावा है कि वे युवाओं में उकसावे वाली सामग्री प्रसारित कर रहे थे,पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के इशारे पर ऑनलाइन दुष्प्रचार चला रहे थे,तथा युवाओं को आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित करने की ‘डिजिटल भर्ती’ में भूमिका निभा रहे थे।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई उन सोशल मीडिया अब्यूज़र नेटवर्क पर चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो जम्मू-कश्मीर में शांति और कानून-व्यवस्था के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।सरकारी पद का ‘दुरुपयोग’ कर रहा था
डॉक्टर अधिकारियों ने स्वीकारा कि डॉक्टर का सरकारी पद और सामाजिक प्रतिष्ठा उसकी अवैध गतिविधियों को छिपाने में सहायक हो रहा था।
CIK का कहना है कि डॉ. भट ने स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी भूमिका की आड़ लेकर ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क से कथित रूप से जुड़ाव बनाया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था।डिजिटल उपकरणों का बड़ा जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान CIK ने बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनमें शामिल हैं—
5 मोबाइल फोन
5 सिम कार्ड
1 टैबलेट डिवाइस
संदिग्ध डिजिटल दस्तावेज़अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा, चैट रिकॉर्ड और स्टोरेज डिवाइसअधिकारियों के अनुसार, ये उपकरण जांच को निर्णायक दिशा दे सकते हैं। डिजिटल फॉरेंसिक टीम इनके डाटा की लेयर-बाय-लेयर जांच करेगी।अभी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं, लेकिन जांच में बड़े खुलासे की उम्मीद
पुलिस सूत्रों ने बताया कि दंपति को हिरासत में लिया गया है, लेकिन उनकी औपचारिक गिरफ्तारी फॉरेंसिक रिपोर्ट और विस्तृत संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि के बाद की जाएगी।जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।
‘ऑनलाइन कट्टरपंथ के खिलाफ अभियान जारी रहेगा
’CIK ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रहे उग्रवाद और आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ने का अभियान आगे और तेज़ किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आतंकी संगठन डिजिटल माध्यमों को हथियार बनाकर युवाओं को गुमराह करने की नई रणनीति अपनाए हुए हैं।
