बी के झा
NSK

लखनऊ / न ई दिल्ली, 2 फरवरी
केंद्रीय बजट 2026–27 ने उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई ऊंचाई देने का खाका खींच दिया है। केंद्र सरकार के खजाने से यूपी को 4.26 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जो पिछले बजट की तुलना में करीब 25 हजार करोड़ रुपये अधिक है। यह राशि राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक विकास, सामाजिक योजनाओं और रोजगार सृजन को अतिरिक्त गति देगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट में केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाले हिस्से का सबसे बड़ा भाग उत्तर प्रदेश को दिया गया है। कुल केंद्रीय करों में यूपी की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत होगी, जो देश में सर्वाधिक है।
केंद्रीय करों में यूपी सबसे आगे
वित्त विभाग के अनंतिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026–27 में यूपी को केवल केंद्रीय करों के माध्यम से 2.68 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये अधिक है।इसमें सबसे बड़ा योगदान इनकम टैक्स, कॉरपोरेशन टैक्स और सेंट्रल जीएसटी का रहेगा।इनकम टैक्स: ₹95,698 करोड़ कॉर्पोरेशन टैक्स: ₹78,939 करोड़ सेंट्रल जीएसटी: ₹73,547 करोड़ कस्टम ड्यूटी: ₹14,347 करोड़ यूनियन एक्साइज: ₹6,112 करोड़ यूपी के बाद केंद्रीय करों में सबसे अधिक हिस्सेदारी बिहार (9.9%), फिर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को मिलेगी।
योजनाओं और निवेश से बदलेगा विकास का परिदृश्य
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत यूपी को करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये,कैपिटल असिस्टेंस में 20 हजार करोड़,सेंट्रल सेक्टर स्कीम में 18 हजार करोड़और केंद्रीय ऋण के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।इसके अलावा, 200 परंपरागत औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन की घोषणा से यूपी के वस्त्र, हस्तशिल्प, चमड़ा, खेल सामग्री और ओडीओपी से जुड़े उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से 10 जिलों को बढ़त
बजट में घोषित सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो—दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी—उत्तर प्रदेश को मिले हैं।इससे वाराणसी, प्रयागराज, रायबरेली, लखनऊ, कन्नौज, इटावा, आगरा, मथुरा और गौतमबुद्ध नगर समेत कम से कम 10 जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे औद्योगिक निवेश, पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर को भी रफ्तार मिलेगी।
विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएंराजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपी को केंद्रीय करों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी देना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक निर्णय भी है। इतने बड़े राज्य में विकास योजनाओं की सफलता राष्ट्रीय राजनीति पर सीधा असर डालती है। यह बजट केंद्र और राज्य के बीच मजबूत तालमेल का संकेत देता है।
शिक्षाविद और अर्थशास्त्री
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर गैप को पाटने में मदद मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी चेताया कि धन का प्रभाव तभी दिखेगा जब परियोजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी और विकेंद्रीकृत क्रियान्वयन होगा।
औद्योगिक संगठन उद्योग संगठनों ने बजट को यूपी के लिए “गेम चेंजर” बताया। उनका कहना है कि औद्योगिक क्लस्टर, एमएसएमई को सहायता, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से यूपी निवेशकों के लिए और आकर्षक बनेगा।
विपक्षी दलविपक्षी दलों ने राशि बढ़ने का स्वागत करते हुए सरकार से सवाल किया कि क्या यह धन जमीनी स्तर तक पहुंचेगा। विपक्ष का कहना है कि घोषणाएं बड़ी हैं, लेकिन पिछली योजनाओं में भ्रष्टाचार और असमान वितरण के आरोप लगे हैं, जिनसे सबक लेना जरूरी है।
स्थानीय समाजसेवी
समाजसेवियों का मानना है कि अगर ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं पर ईमानदारी से काम हुआ, तो यूपी के सामाजिक संकेतक भी सुधर सकते हैं। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर, जिला अस्पतालों और ग्रामीण महिला बाजार (शी-मार्ट) जैसी योजनाओं को अहम बताया।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 ने उत्तर प्रदेश को संसाधनों के मामले में राष्ट्रीय विकास के केंद्र में ला खड़ा किया है। 4.26 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित सहायता यदि योजनाबद्ध और पारदर्शी तरीके से खर्च होती है, तो यूपी न केवल देश का सबसे बड़ा राज्य रहेगा,
बल्कि सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल हो सकता है।अब असली परीक्षा घोषणाओं की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की है—
यहीं से तय होगा कि विकास को मिले ये ‘पंख’ कितनी ऊंची उड़ान भरते हैं।
