बी के झा
NSK


लखनऊ/दिल्ली, 12 दिसंबर
उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठन परिवर्तन का इंतजार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके साथ ही राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में तेज हलचल देखी जा रही है।13 दिसंबर को नामांकन, 14 दिसंबर को ऐलान—यूपी का नया भाजपा अध्यक्ष कौन होगा, इस पर नजरें टिक गई हैं।नामांकन आज, ऐलान कल:
पूरा कार्यक्रम जारी13 दिसंबर (शुक्रवार)1 PM –
2 PM: नामांकन प्रक्रिया
3 PM – 4 PM: नामांकन पत्रों की जांच
4 PM – 5 PM: नामांकन वापसी
14 दिसंबर (शनिवार)1 PM: प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के नाम का आधिकारिक ऐलान
यदि एक से अधिक नामांकन हुए तो इसी दिन मतदान भी संभव चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े आज सुबह लखनऊ पहुंच रहे हैं। भाजपा के करीब 400 प्रांतीय सदस्य, सांसद, विधायक और मंत्रिगण भी राजधानी पहुंच चुके हैं।रिस बनाने वाले चेहरे: पिछड़ा वर्ग से नए अध्यक्ष की तैयारी
भाजपा 2025–26 में विपक्षी पीडीए गठबंधन की रणनीति को ध्यान में रखते हुए अपना नया अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग से चुनने पर गंभीरता से विचार कर रही है। चर्चा में प्रमुख नाम—
रेस में आगे:
1. पंकज चौधरी (केंद्रीय मंत्री)
2. केशव प्रसाद मौर्य (डिप्टी सीएम)
3. स्वतंत्र देव सिंह (कैबिनेट मंत्री)
4. धर्मपाल सिंह (कैबिनेट मंत्री)
5. बीएल वर्मा (केंद्रीय राज्य मंत्री)पार्टी सूत्रों का दावा है कि “नाम चौंकाने वाला” भी हो सकता है, यानी भाजपा अंतिम क्षण तक विकल्प खुले रख रही है।सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य या बृजेश पाठक में से कोई एक प्रस्तावक हो सकते हैं—
यह संकेत भी अध्यक्ष पद की राजनीतिक अहमियत को बढ़ा देता है।दिल्ली की बैठक में फाइनल हुआ खाका
गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, और आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों की दिल्ली बैठक में अध्यक्ष पद पर अंतिम रूप से सहमति बनी।इसके बाद पार्टी ने तुरंत कार्यक्रम जारी कर दिया।इससे पहले वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसने बदलाव की अटकलों को और तेज कर दिया।पार्टी संविधान और कोरम पूरा भाजपा ने अब तक 1600 से अधिक मंडल अध्यक्ष घोषित किए हैं।
प्रदेश में कुल 1918 मंडल हैं।पार्टी संविधान के अनुसार 50% से अधिक जिलाध्यक्षों और मंडल इकाइयों के घोषित होने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव संभव होता है—जो अब पूरा हो चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि—
भाजपा का लक्ष्य—पीडीए को OBC फ्रंट पर चुनौतीपीडीए गठबंधन का सबसे मजबूत आधार पिछड़ा वर्ग और दलित वोट है।भाजपा उसी आधार पर सेंध लगाने के लिए अध्यक्ष को उस समुदाय से चुनना चाहती है।
विधानसभा 2027 की तैयारीविश्लेषक कहते हैं—“भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ऐसा चेहरा लाना चाहती है जो 2027 के विधानसभा चुनाव में संगठन का जनाधार मजबूती से फैला सके।”
योगी और दिल्ली हाईकमान के बीच संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा ऐसा अध्यक्ष लाएगी जो न केवल योगी सरकार के साथ तालमेल रखे, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के प्रति भी उतना ही विश्वसनीय हो।विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
सपा-बसपा नेता बोले—“भाजपा को नए अध्यक्ष से फर्क नहीं पड़ेगा। जनता बदलाव चाहती है, चेहरा बदलकर नीति नहीं बदलती।”
कांग्रेस
कांग्रेस ने तंज कसा—“भाजपा प्रदेश में OBC का उपयोग सिर्फ चुनावी गणित के लिए करती है, सशक्तिकरण के लिए नहीं।
”पीडीए गठबंधन
पीडीए के नेताओं ने कहा—“पीडीए का असर इतना है कि भाजपा को भी अब पिछड़ा नेतृत्व याद आ रहा है। यह हमारी राजनीतिक जीत है।”लखनऊ में माहौल: भगवा कैंपस में चहल-पहल
भाजपा मुख्यालय पर 13–14 दिसंबर को भारी भीड़ और गहमागहमी रहने वाली है।यातायात, सुरक्षा और मीडिया कवरेज के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।पार्टी की बॉडी लैंग्वेज साफ संकेत दे रही है—एक ही नामांकन आएगा, और वही अंतिम होगा।ऐसे में 14 दिसंबर को नया अध्यक्ष सामने आने की पूरी उम्मीद है।
निष्कर्ष:
यूपी भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन का बड़ा दिनयह चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की भविष्य रणनीति का संकेत है।
2027 विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा प्रदेश संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देने की तैयारी में है।
अब सबकी नजरें 13–14 दिसंबर पर—कौन संभालेगा यूपी भाजपा का कमान?
