बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ब्रसेल्स, 27 जनवरी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच दो दशकों से अधिक समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत के पूर्ण होने की घोषणा मंगलवार को एक ऐतिहासिक क्षण में तब तब्दील हो गई, जब यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने सार्वजनिक मंच से अपना OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड दिखाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी में दा कोस्टा का यह भावनात्मक वक्तव्य महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-यूरोप रिश्तों के मानवीय और ऐतिहासिक आयाम का प्रतीक बन गया।उन्होंने कहा—“मैं यूरोपियन काउंसिल का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं एक ओवरसीज इंडियन सिटीजन भी हूं। गोवा में मेरी जड़ें हैं। भारत और यूरोप का रिश्ता मेरे लिए सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि निजी भी है।
”गोवा से ब्रसेल्स तक: पहचान की राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दा कोस्टा द्वारा OCI कार्ड दिखाना एक सॉफ्ट पावर संदेश था। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रो. रविकांत शुक्ल कहते हैं—“यह दृश्य बताता है कि भारत अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान और प्रवासी प्रभाव का केंद्र बन चुका है। OCI कार्ड का मंच से प्रदर्शन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की जीत है।”‘
मदर ऑफ ऑल डील्स’:
अर्थव्यवस्था पर प्रभावFTA के तहत भारत को यूरोपीय संघ के 27 देशों में परिधान, रसायन, चमड़ा, जूते-चप्पल जैसे उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।सरकारी अधिकारियों के मुताबिक—भारत के 93% से अधिक उत्पादों को EU में शून्य-शुल्क पहुंच FTA लागू होते ही 90% भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क समाप्त शेष 3% शुल्क सात वर्षों में चरणबद्ध रूप से खत्म कुल मिलाकर 99.5% व्यापार मूल्य पर EU की रियायत
अर्थशास्त्री और शिक्षाविद डॉ. मीनाक्षी अय्यर मानती हैं—“यह समझौता भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है। MSME और निर्यात-आधारित उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
”यूरोप को क्या मिला?
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ को भारत में—कारों और वाइन पर रियायती शुल्क10 वर्षों में 93% यूरोपीय वस्तुओं को शुल्क-मुक्त पहुंच पहले दिन भारत केवल 30% यूरोपीय आयात पर शुल्क हटाएगा
क़ानूनविदों की दृष्टि: संतुलन की कसौटी
वरिष्ठ क़ानूनविद और व्यापार कानून विशेषज्ञ एडवोकेट अनिरुद्ध वर्मा का कहना है—“यह FTA कानूनी दृष्टि से संतुलित प्रतीत होता है। भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों—वाहन और इस्पात—को संरक्षित रखा है, जो घरेलू उद्योगों के लिए राहत है।
”विपक्ष की आपत्तियाँ
हालांकि विपक्ष ने इसे लेकर कुछ सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा—“सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यूरोपीय कारों और वाइन पर रियायतें भारतीय किसानों और छोटे उद्योगों को कैसे प्रभावित करेंगी।”वामपंथी दलों ने आशंका जताई कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक लाभ मिल सकता है।
रक्षा और भू-राजनीति का दृष्टिकोण
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का भी संकेत है।ब्रिगेडियर (सेनि.) अजय सिंह के अनुसार—“यूक्रेन युद्ध और चीन के आक्रामक रवैये के बीच EU-भारत नज़दीकी वैश्विक शक्ति संतुलन को नया आकार दे सकती है।”
विदेश नीति विशेषज्ञों की राय
विदेश मामलों की जानकार राजनयिक-विश्लेषक नंदिता सेन कहती हैं—“OCI कार्ड का प्रतीकात्मक इस्तेमाल और FTA का ऐलान—दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत अब ‘डायस्पोरा डिप्लोमेसी’ को रणनीतिक स्तर पर साध रहा है।
निष्कर्ष
गोवा की मिट्टी से जुड़े एक यूरोपीय नेता का OCI कार्ड दिखाना और दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक का ऐलान
ये दोनों घटनाएँ इस बात की गवाही हैं कि भारत अब केवल सौदे नहीं कर रहा, बल्कि रिश्ते भी गढ़ रहा है।
आने वाले वर्षों में यह FTA न सिर्फ आर्थिक आंकड़ों में, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
