बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 5 दिसंबर
महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए रूसी राष्ट्रपति ने वैश्विक राजनीति का संदेश भी दे दिया भारत की दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार सुबह राजघाट पहुँच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।सादगी और सम्मान से भरे इस कार्यक्रम ने भारत-रूस संबंधों की आत्मीयता और गहराई को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा।पुतिन ने गांधी समाधि पर सिर झुकाया, परिक्रमा की और पुष्पचक्र अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने विजिटर्स बुक में एक विस्तृत संदेश लिखा—जो न केवल बापू के प्रति श्रद्धांजलि था, बल्कि भारत-रूस संबंधों की भविष्य दिशा पर एक स्पष्ट भू-राजनीतिक संकेत भी।
पुतिन का संदेश: “गांधी ने न्यायपूर्ण बहुध्रुवीय विश्व का रास्ता दिखाया—आज वही बन रहा है”रूसी भाषा में लिखे अपने नोट में पुतिन ने कहा:महात्मा गांधी ने अहिंसा और सच्चाई के जरिए हमारी धरती पर शांति के लिए एक अनमोल योगदान दिया, जिसका प्रभाव आज भी कायम है।”उन्होंने एक नई, ज्यादा निष्पक्ष, बहुध्रुवीय दुनिया की व्यवस्था का रास्ता दिखाया, जो अब बन रही है।”भारत आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर समानता, आपसी सम्मान और सहयोग के इन सिद्धांतों की रक्षा कर रहा है—और रूस भी ऐसा ही करता है।”यह संदेश सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि गुटनिरपेक्षता, रणनीतिक स्वायत्तता और उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर रूस की नीति का प्रतीक भी माना जा रहा है।
मोदी–पुतिन शिखर वार्ता: 80 साल पुरानी दोस्ती को “नयी गति”राजघाट से लौटने के बाद दोनों नेताओं ने शिखर वार्ता की, जिसमें भारत–रूस संबंधों को 2030 के लिए एक व्यापक आर्थिक रोडमैप के तहत नई दिशा देने पर सहमति बनी।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:भारत–रूस की दोस्ती ध्रुवतारे की तरह अडिग रही है… हम आर्थिक साझेदारी को नयी ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”दोनों देशों के बीच कई अहम MoU हुए, जिनमें शामिल हैं —
श स्वास्थ्य सहयोग
गतिशीलता साझेदारी
लोगों के बीच आदान-प्रदान
व्यापार और औद्योगिक विस्तार
2030 आर्थिक एजेंडा का अंतिम रूप इसके अलावा, यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन के साथ FTA पर तेजी से काम करने का भी निर्णय हुआ—जो भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप के नए बाजार खोल सकता है।
यूक्रेन युद्ध पर भारत की भूमिका—शांति का पक्षधर मोदी ने वार्ता के दौरान युद्ध का मुद्दा उठाते हुए कहा:भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है… हम हर शांति प्रयास का स्वागत करते हैं और योगदान देने के लिए तैयार हैं।यह संदेश एक संतुलित कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है—जहां भारत ने एक बार फिर नागरिक सुरक्षा, संवाद और स्थायी समाधान की बात दोहराई है।राजनीतिक विश्लेषण: पुतिन का गांधी संदेश—सिर्फ नैतिक नहीं, रणनीतिक भी
बहुध्रुवीय विश्व की ओर संकेतगांधी का हवाला देकर पुतिन ने यह स्पष्ट किया कि भारत–रूस गठबंधन अब वैश्विक शक्ति-संतुलन का सक्रिय हिस्सा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिकापुतिन के संदेश में भारत की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया—यह मान्यता है कि आज भारत विश्व राजनीति में सिर्फ दर्शक नहीं, निर्णायक शक्ति है।
भारत–रूस “मॉरल–डिप्लोमेसी” की नई परिभाषादोनों देश शक्ति की राजनीति में भी नैतिक शक्ति—अहिंसा, सत्य, समानता—के मूल्यों को महत्वपूर्ण मानते हैं। यह पश्चिमी ब्लॉक के लिए एक वैकल्पिक वैश्विक दृष्टि है।यह यात्रा क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है?
दुनिया दो ध्रुवों में बंट रही है—भारत–रूस साझेदारी संतुलन का केंद्र
ऊर्जा, रक्षा, तकनीक, व्यापार—हर क्षेत्र में नए कदम
कुडनकुलम न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर रूस का बड़ा वादा
भारत के मध्य एशिया–यूरोप व्यापार गलियारे के लिए नई संभावनाएँ
गांधी का मार्ग—कूटनीति में “सॉफ्ट पावर डेप्थ” के रूप में प्रस्तुत
निष्कर्ष:
राजघाट से निकला अंतरराष्ट्रीय संदेश पुतिन का यह दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं था—यह एक संदेश था कि भारत और रूस सिर्फ सामरिक साझेदार नहीं, “मूल्य आधारित साझेदार” भी हैं।राजघाट पर गांधी के प्रति श्रद्धांजलि में जिस प्रकार वैश्विक न्याय, बहुध्रुवीय विश्व और आपसी सम्मान की बातें कही गईं, उन्होंने पूरी दुनिया को संकेत दिया है कि भारत–रूस संबंध आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति-संतुलन का आधार बन सकते हैं।
