बी के झा
NSK

पटना, 6 मार्च
बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि वर्तमान मुख्यमंत्री Nitish Kumar पहले राज्यसभा सदस्य बनेंगे और उसके बाद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर बिहार की सत्ता में नया चेहरा सामने आ सकता है।राज्य की पांच राज्यसभा सीटों के लिए इस बार कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्ताधारी एनडीए ने अपने दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारकर चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है।
एनडीए के दिग्गज मैदान में
एनडीए की ओर से भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यू) ने दो-दो उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इन उम्मीदवारों में भाजपा नेता नितिन नवीन, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री Nitish Kumar, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख Upendra Kushwaha, केंद्रीय मंत्री Ramnath Thakur और भाजपा नेता शिवेश कुमार राम शामिल हैं।राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार इस बार राज्यसभा चुनाव केवल संसदीय प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है, बल्कि यह बिहार की सत्ता संरचना में संभावित बदलाव का संकेत भी दे रहा है।
विपक्ष की रणनीति और तेजस्वी की नजर
विपक्षी खेमे से राष्ट्रीय जनता दल ने अपने पुराने नेता एडी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। विपक्ष की पूरी रणनीति इस चुनाव को मुकाबले में बनाए रखने की है।नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav की नजर विशेष रूप से दो छोटे लेकिन निर्णायक दलों पर टिकी हुई है—Asaduddin Owaisi की पार्टी AIMIMMayawati की पार्टी बसपा बिहार विधानसभा में AIMIM के पांच और बसपा का एक विधायक है। यदि इनका समर्थन विपक्ष को मिलता है तो मुकाबला रोचक हो सकता है।
विधानसभा गणित क्या कहता है?
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक है।वर्तमान विधानसभा स्थिति के अनुसार:एनडीए के पास लगभग 202 विधायक हैं महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं इस गणित के आधार पर एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी।इसी कारण राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है।
क्रॉस वोटिंग का साया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं है। यदि विपक्षी खेमे के कुछ विधायक एनडीए के पक्ष में मतदान करते हैं तो पांचवीं सीट भी सत्ताधारी गठबंधन के खाते में जा सकती है।हालांकि विपक्ष भी उतनी ही मजबूती से दावा कर रहा है कि उनका उम्मीदवार जीत दर्ज करेगा।
जदयू के भीतर की हलचल
इसी बीच पटना के राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि जदयू के भीतर कुछ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।सूत्रों के मुताबिक जदयू के कुछ विधायकों की नाराजगी का केंद्र पार्टी के प्रमुख नेताओं—संजय झा, विजय चौधरी, Rajiv Ranjan Singh को माना जा रहा है। कुछ विपक्षी नेताओं का दावा है कि इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लग रहे हैं और यह भी चर्चा है कि भविष्य में वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में एनडीए पूरी मजबूती से मैदान में है और पांचों सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा गया है।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि“एनडीए की एकजुटता और विधायकों का समर्थन हमारे साथ है। विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहा है।”भाजपा का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के परिणाम बिहार की राजनीति में स्थिरता का संदेश देंगे।
क्या बदलेगा बिहार का नेतृत्व?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि Nitish Kumar राज्यसभा पहुंचते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत हो सकता है।संभावना जताई जा रही है कि:नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं
बिहार में नए मुख्यमंत्री का चयन हो सकता है सत्ता संतुलन में भाजपा की भूमिका और मजबूत हो सकती है हालांकि यह सब फिलहाल राजनीतिक अटकलों के दायरे में है।
16 मार्च पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजर 16 मार्च को होने वाले मतदान पर टिकी है। उसी दिन परिणाम भी घोषित हो जाएंगे और यह साफ हो जाएगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ने वाली है।फिलहाल इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है—
जहां सत्ता, रणनीति और समीकरणों का खेल अपने चरम पर है।
