बी के झा
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”भुवनेश्वर/कोरापुट, 5 अप्रैल
शनिवार देर रात ओडिशा के कोरापुट जिले में धरती अचानक कांप उठी। रात करीब 11:30 बजे आए भूकंप ने कुछ ही सेकंड में लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई, जबकि इसकी गहराई महज 5 किलोमीटर थी—यही वजह रही कि झटके सामान्य से ज्यादा तेज महसूस हुए।
कम गहराई, ज्यादा असर
भूकंप का केंद्र जयपुर (कोरापुट) के पास स्थित था। विशेषज्ञों के अनुसार, जब भूकंप सतह के करीब (कम गहराई) पर आता है, तो उसकी तीव्रता भले मध्यम हो, लेकिन उसका असर अधिक महसूस होता है।
दहशत में घरों से बाहर निकले लोग
जैसे ही झटके महसूस हुए, लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सामने आए सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कुछ सेकंड के लिए कैमरे तक हिलने लगे—जो भूकंप की तीव्रता का संकेत देता है।
कई इलाकों में महसूस हुए झटके
भूकंप का असर सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके कोरापुट जिले के कई क्षेत्रों में महसूस किए गए, जिनमें:लमटापुटसुनाबेडाबोरिगुमासेमिलिगुडानंदपुरपोट्टांगीदामनजोड़ीजैसे क्षेत्र शामिल हैं।
राहत की खबर: कोई बड़ा नुकसान नहीं
हालांकि, इस भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों की सलाह
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि:कम गहराई वाले भूकंप अधिक महसूस होते हैं ऐसे झटकों के दौरान घबराने के बजाय खुले स्थान पर जाना चाहिए घरों में भारी सामान को सुरक्षित रखना जरूरी है
सतर्कता ही सुरक्षा
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं बिना चेतावनी के आती हैं। ऐसे में जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
सवाल यही है—क्या हम भविष्य के बड़े झटकों के लिए पूरी तरह तैयार हैं?
