राहुल गांधी बांग्लादेश, ओवैसी पाकिस्तान चले जाएं — बिहार में गरजे हिमंता सरमा, बोले “राम-लक्ष्मण को पूजने वाला ही बनेगा मुख्यमंत्री”

बी के झा

रामनगर (पश्चिम चंपारण), बिहार, 5 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के रण में बयानबाज़ी का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। बुधवार को असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम चंपारण के रामनगर में एक चुनावी सभा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआई एम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा प्रहार करते हुए विवादित टिप्पणी की।

सरमा ने कहा, “अगर राहुल गांधी घुसपैठियों के वोट से प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, तो उन्हें बांग्लादेश जाकर राजनीति करनी चाहिए। और जो लोग मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने की बात करते हैं, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।”

35 मिनट के भाषण में उगला चुनावी जहर

करीब 35 मिनट के अपने भाषण में हिमंता सरमा ने एनडीए प्रत्याशी के समर्थन में जमकर माहौल बनाया, लेकिन अपने बयानों से विवाद भी खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि “बिहार की धरती पर राम और लक्ष्मण को पूजने वाला ही मुख्यमंत्री बनेगा।”

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों से प्रभावित क्षेत्रों का ज़िक्र करते हुए सरमा बोले कि, “मुख्यमंत्री बनने के बाद लगभग एक लाख एकड़ कब्जाई गई जमीन में से आधी जमीन हमने मुक्त कराई है।”

नीतीश सरकार की योजनाओं की तारीफ

अपने भाषण के दौरान सरमा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि बिहार ने महिला सशक्तिकरण में देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल पेश की है।“

ओसामा जीता तो वह हिंदुओं की हार होगी” –

सीवान में दिया था बयान

रामनगर से पहले मंगलवार को सरमा ने सीवान में भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि “मैं 14 तारीख को सीवान के नतीजे आने तक कामाख्या मंदिर के द्वार पर बैठा रहूंगा। अगर ओसामा चुनाव जीत जाता है, तो वह सीवान के हिंदुओं की हार होगी।”

उनका यह बयान भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और विपक्षी दल इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहे हैं।

स्थानीय शिक्षाविदों की चिंता –

“ऐसे बयान समाज के लिए ख़तरनाक”

रामनगर के एक वरिष्ठ शिक्षाविद् ने हिमंता सरमा के भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर देश में 10-20 ऐसे नेता और इसी तरह बयानबाज़ी करते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब यह धरती फिर से खून की नदियाँ देखेगी।

चुनाव आयोग को चाहिए कि ऐसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई कर प्रचार से रोके।”उन्होंने आगे कहा कि “जब देश के शीर्ष नेता और गृहमंत्री तक हिंदू-मुस्लिम फार्मूले पर वोट मांगने लगे हैं, तब निचले स्तर पर ऐसी विभाजनकारी राजनीति समाज के लिए बहुत खतरनाक साबित होगी।”

एनडीए नेताओं की मौजूदगी में गरम हुआ माहौल

सभा में केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, पूर्व विधायक पद्मश्री भागीरथी देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष अचिंत्य कुमार, पंकज झुनझुनवाला, भूपेंद्र जयसवाल, बिट्टू सिंह, संजय मिश्रा, प्रमोद साह और अन्य एनडीए घटक दलों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

दुबे ने सभा में कहा कि “नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में फिर से सरकार बनने जा रही है। अगली सरकार में हर प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे ताकि किसी बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।

विश्लेषण

बिहार चुनाव के इस चरण में नेताओं के बयानों का स्तर जिस तरह नीचे गिर रहा है, उसने चुनावी माहौल को धार्मिक और भावनात्मक मोड़ दे दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयानों से जनता के असली मुद्दे —

रोजगार, शिक्षा, और विकास —

पीछे छूटते जा रहे हैं।अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में कोई कार्रवाई करता है या नहीं, क्योंकि सरमा के इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलचल मचा दी है बल्कि समाज में तनाव का माहौल भी पैदा कर दिया है।

NSK

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