बी के झा
NSK


नई दिल्ली, 9 दिसंबर
दिल्ली के लाल किले में इन दिनों एक ऐसा नज़ारा दिखाई दे रहा है, जिसने इतिहास और तकनीक को एक ही फ्रेम में समेट दिया है। सदियों पहले इसी लाल किले से मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी सल्तनत का संचालन किया था, और आज, उसी परिसर में ‘शाहजहाँ’ नाम का बोइंग 747 जंबो जेट लोगों की निगाहों का केंद्र बना हुआ है—हालाँकि यह कोई बादशाह नहीं, बल्कि एयर इंडिया के स्वर्णिम दौर का वह प्रतीकात्मक विमान है जिसे दुनिया ‘द फ्लाइंग पैलेस’—उड़ता महल के नाम से जानती है।एयर इंडिया के “सम्राट फ्लीट” का यह रिटायर्ड जंबो जेट, जो कभी भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का गौरव था, अब यूनेस्को की भारत में पहली बार आयोजित हो रही बैठक में विरासत के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। यह न केवल विमानों के इतिहास की झलक है, बल्कि यह संदेश भी कि कला, संस्कृति और इंजीनियरिंग—तीनों मिलकर कैसे एक अनूठी विरासत निर्मित करते हैं।
क्यों कहा जाता था इसे ‘उड़ता महल’?
1970–80 के दशक में एयर इंडिया ने अपनी इंटरनेशनल पहचान को एक नया रूप देने का फैसला किया। उस दौर में कंपनी ने बोइंग 747 को ऐसा रूप दिया जो दुनिया में किसी अन्य एयरलाइन के पास नहीं था।इस शाही लुक की कुछ खास बातें:विमान की खिड़कियाँ मुगल जरोखा शैली की तरह डिज़ाइन की गईं इंटीरियर में भारतीय महलों की कला, पेंटिंग, कालीन और बारीक सजावट बिज़नेस और फर्स्ट क्लास को वास्तविक राजसी अनुभव देने के लिए खास वास्तुकलाहर विमान को महान भारतीय सम्राटों के नाम पर नामित किया गया—
इस मॉडल का नाम था “सम्राट शाहजहाँ”इसलिए यात्रियों ने इसे नाम दिया—
The Flying Palace”, यानी एक ऐसा महल जो आसमान में उड़ता था।लाल किले में भव्य प्रदर्शनी: विरासत की नई कहानी लाल किले के ब्रिटिश-युग के बैरक के सामने रखे गए इस विमान ने यूनेस्को मीटिंग के पहले ही दिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का ध्यान खींच लिया।यहीं A1 और A2 बैरकों में एक विशेष गैलरी बनाई गई है, जहाँ एयर इंडिया के ‘महाराजा कलेक्शन’ से 300 से अधिक दुर्लभ और ऐतिहासिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं।
प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख प्रदर्शनियां:चोल ब्रॉन्ज़ मूर्तियाँ मुगल मिनिएचर पेंटिंग पारंपरिक कलमकारी आर्टआधुनिक भारतीय कलाकारों की कृतियाँऔर एयर इंडिया के 1950–70 के दौर के आइकॉनिक विंटेज पोस्टर, जिनसे कभी भारतीय पर्यटन की वैश्विक छवि बनी
यह प्रदर्शनी यह दर्शाती है कि एयर इंडिया सिर्फ एक एयरलाइन नहीं थी, बल्कि भारत की कला और सौंदर्य-दृष्टि की सांस्कृतिक दूत भी थी।ऐतिहासिक विमान से जुड़ी विशेष जानकारी एयर इंडिया ने 2021 में X (पूर्व ट्विटर) पर इस जंबो जेट की तस्वीर साझा करते हुए बताया था:4 मई 1971 को ‘सम्राट शाहजहाँ’ (VT-EBE) एयर इंडिया के फ्लीट में शामिल होने वाला दूसरा B747-237B बना।”यह वही विमान है जिसने दशकों तक भारत को दुनिया से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इतिहास के साए में खड़ा ‘उड़ता महल’—आज भी वैसा ही भव्य लाल किले के विशाल मैदान में जब यह जंबो जेट अपनी शाही बनावट के साथ खड़ा नजर आता है तो यह एहसास होता है कि तकनीक और इतिहास का यह संगम केवल भारत में ही संभव है।एक तरफ मुगल काल की शाही स्थापत्य कला और दूसरी ओर 20वीं सदी का एरोनॉटिकल वैभव—दोनों का यह मिलन यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए भारत के विविध सांस्कृतिक विस्तार का प्रतीक बन गया है।
