विदेश में लोकतंत्र पर सवाल, देश में सियासी तूफान_ जर्मनी से राहुल गांधी के बयान, बिहार में भाजपा–जदयू का तीखा पलटवार

बी के झा

नई दिल्ली/पटना/बर्लिन, 23 दिसंबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जर्मनी दौरे के दौरान दिए गए बयानों ने देश की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया है। बर्लिन के एक कॉलेज में आयोजित टॉक शो के दौरान राहुल गांधी ने भारत की चुनावी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है, धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है और ईडी–सीबीआई जैसी एजेंसियों को विपक्ष के खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है।

राहुल गांधी के इन बयानों के बाद खासकर बिहार की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सत्तारूढ़ भाजपा और जदयू ने इसे न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना बताया, बल्कि राष्ट्र विरोधी नैरेटिव करार दिया है।

राहुल गांधी का आरोप: ‘

लोकतंत्र पर हमला’

बर्लिन में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है और चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि—विरोधी दलों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हो रहा है हरियाणा में कांग्रेस की जीत के बावजूद “सिस्टम” के जरिए पार्टी को हराया गया चुनावों में फर्जी वोटिंग के गंभीर उदाहरण सामने आए राहुल गांधी के अनुसार,“भारत में अब निष्पक्ष खेल नहीं हो रहा।

संस्थाएं स्वतंत्र नहीं रहीं।

”इन बयानों के साथ उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।बिहार में सियासी उबाल: ‘विदेश जाकर देश को बदनाम’राहुल गांधी के बयानों पर बिहार भाजपा ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है।भाजपा नेता दिलीप जायसवाल ने कहा—“

राहुल गांधी को न देश की जनता पर भरोसा है, न लोकतंत्र पर। जनता ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया, फिर भी वे विदेश जाकर भारत विरोधी बातें कर रहे हैं। इससे अधिक शर्मनाक क्या हो सकता है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी“हमेशा उन ताकतों के साथ खड़े दिखते हैं जो भारत को कमजोर दिखाना चाहती हैं।”‘ईवीएम पर सवाल सिर्फ हार की जगह’भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने राहुल गांधी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा—“जहां कांग्रेस जीतती है, वहां ईवीएम ठीक हैं, और जहां हारती है वहां गड़बड़ी दिखती है। जनता उनकी नकारात्मक राजनीति को बार-बार नकार चुकी है।

”जदयू की प्रतिक्रिया:

‘अनर्गल प्रलाप’भाजपा की सहयोगी जदयू भी राहुल गांधी के बयानों से खासा नाराज़ दिखी।जदयू विधायक विनय चौधरी ने कहा—“विदेश की धरती पर इस तरह के अनर्गल बयान न तो देश के हित में हैं और न ही लोकतंत्र के।”उनका कहना था कि आंतरिक राजनीतिक मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना भारत की छवि को नुकसान पहुंचाता है।

राजनीतिक विश्लेषण:

नैरेटिव की जंग

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह लोकतंत्र और संस्थागत स्वतंत्रता को केंद्र में रखकर भाजपा को घेरना चाहती है।

एक विश्लेषक के अनुसार—“राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलकर वैश्विक दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी नैरेटिव बताकर घरेलू समर्थन मजबूत करती है।”विश्लेषक मानते हैं कि यह टकराव आने वाले चुनावों से पहले नैरेटिव की जंग को और तेज करेगा।

शिक्षाविदों की राय:

मंच और मर्यादा का सवाल राजनीतिक विज्ञान के शिक्षाविदों का कहना है कि लोकतंत्र पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन“मंच और भाषा का चयन बेहद अहम होता है।”एक वरिष्ठ शिक्षाविद कहते हैं—“विदेशी मंच पर घरेलू संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से देश की छवि प्रभावित होती है, भले ही मंशा राजनीतिक हो।”विदेश मामलों के विशेषज्ञ: छवि और कूटनीति विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान कूटनीतिक स्तर पर असहजता पैदा कर सकते हैं।

एक पूर्व राजनयिक के अनुसार—“जब कोई राष्ट्रीय नेता विदेश में लोकतंत्र पर सवाल उठाता है, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सरकारें उसे भारत की आधिकारिक स्थिति समझने की भूल कर सकती हैं।”हालांकि वे यह भी कहते हैं कि“लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए।

”विपक्ष का बचाव:

‘सच कहना राष्ट्रद्रोह नहीं’

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन से जुड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने“वही कहा है जो देश के भीतर भी कहा जा रहा है।”उनके अनुसार, लोकतंत्र पर चिंता जताना राष्ट्रविरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में चेतावनी है।

निष्कर्ष:

विदेश से उठे सवाल, देश में तेज़ बहस राहुल गांधी के जर्मनी से दिए गए बयान एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं—क्या लोकतंत्र पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलना जायज़ है?

या इससे देश की छवि को नुकसान पहुंचता है?

फिलहाल इतना तय है कि यह विवाद सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों मेंदेश की राजनीति में राष्ट्रवाद बनाम लोकतंत्र की बहस को और धार देगा।

NSK

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