बी के झा
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नई दिल्ली, ,24 मार्च
पश्चिम एशिया में भड़की जंग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही—यह वैश्विक ऊर्जा संतुलन को हिला देने वाला संकट बन चुकी है। इसी गंभीर परिदृश्य के बीच नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में देश और दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया—यह समय केवल चिंता का नहीं, बल्कि संयम, कूटनीति और रणनीतिक तैयारी का है।
ऊर्जा संकट: दुनिया के लिए खतरा, भारत के लिए चेतावनी
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में साफ कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी यह युद्ध अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ रहा है।तेल, गैस और उर्वरक—तीनों ही क्षेत्र प्रभावित हैं, जो सीधे आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं।विशेष रूप से Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “अंतरराष्ट्रीय जीवनरेखा” बताया।यही वह मार्ग है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति होता है—और इसी पर संकट सबसे ज्यादा गहरा गया है।
भारत की चुनौती: निर्भरता बनाम आत्मनिर्भरता
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है।ऐसे में यह संकट भारत के लिए दोहरी चुनौती बनकर सामने आया है:
आपूर्ति में बांधा कीमतों में संभावित उछाल
सरकार ने बताया कि भारत वर्तमान में 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है—यह “डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी” संकट से बचाव का अहम कदम है।साथ ही, Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के माध्यम से बनाए गए रणनीतिक भंडार इस समय “सुरक्षा कवच” की भूमिका निभा रहे हैं।
मानवीय पहलू: खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा यह संकट केवल ऊर्जा या अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है।खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय कार्यरत हैं—उनकी सुरक्षा, रोजगार और जीवन भारत सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
3 लाख से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी
जहाजों में फंसे भारतीय क्रू की सुरक्षा
निरंतर निगरानी और कूटनीतिक प्रयासयह दर्शाता है कि भारत केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी सक्रिय है।
कूटनीति का रास्ता: संवाद ही समाधान
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत युद्ध नहीं, शांति का पक्षधर है।उन्होंने ईरान, इजरायल और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से दो-दो बार बातचीत की है।भारत की नीति तीन स्तंभों पर आधारित है:डी-एस्केलेशन
(तनाव कम करना)
समुद्री मार्गों की सुरक्षा संवाद और कूटनीति
भारत का यह संतुलित रुख उसे एक “जिम्मेदार वैश्विक शक्ति” के रूप में स्थापित करता है।सर्वदलीय एकता: राजनीतिक मतभेद से ऊपर राष्ट्रीय हितइस संकट की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले ही सैन्य और रणनीतिक तैयारियों की समीक्षा कर ली है।
यह संकेत है कि:राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिए जा रहे हैं संसद से एकजुट संदेश देने की कोशिश हो रही है
वैश्विक प्रभाव: बाजार से लेकर महंगाई तक
इस युद्ध का असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा:वैश्विक बाजार में अस्थिरता महंगाई में वृद्धिआपूर्ति श्रृंखला में बांधा खाद्य और उर्वरक संकट हालांकि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तनाव कम करने के संकेतों से बाजार को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
आत्मनिर्भर भारत: संकट में अवसर
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया।शिप बिल्डिंग, रेयर अर्थ मिनरल्स और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।यह संकट भारत को यह सिखा रहा है कि:“ऊर्जा सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार है।
”निष्कर्ष:
आने वाला समय निर्णायक
पश्चिम एशिया का यह संकट केवल एक युद्ध नहीं—यह वैश्विक व्यवस्था की परीक्षा है।भारत के लिए यह समय है:रणनीतिक संतुलन बनाए रखने काकूटनीति को मजबूत करने काऔर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ने का प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट है—“
संवाद ही समाधान है, और शांति ही मानवता का भविष्य।”
