बी के झा
NSK

अगरतला/इंद्रनगर / नई दिल्ली, 7 दिसंबर
त्रिपुरा की राजनीति में रविवार को उस समय बड़ा तूफ़ान खड़ा हो गया, जब कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) को खुले मंच से धमकी देते हुए कहा कि “अगर किसी भी असली मतदाता का नाम हटाया गया या फर्जी नाम जोड़ा गया, तो BLO की सार्वजनिक रूप से पिटाई की जाएगी।”कांग्रेस के बूथ स्तरीय एजेंटों के लिए इंद्रनगर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विधायक का यह बयान आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। सुदीप बर्मन ने कहा कि त्रिपुरा में मतदाता सूची का प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किसी भी कीमत पर “धांधली-रहित और पारदर्शी” होना चाहिए।“फर्जी नाम जोड़ा तो अंजाम भुगतना पड़ेगा”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बर्मन ने कहा—“
हमें मृत मतदाताओं या विदेशी नागरिकों के नाम हटाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति का नाम दो-दो, तीन-तीन बार डालने, या फर्जी मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश हुई, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। यह त्रिपुरा है, हर कोई एक-दूसरे को जानता है। BLO अगर किसी दबाव में गलत काम करेगा, तो उसकी खुले में पिटाई होगी।”उनका कहना था कि महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा में मतदाता सूची में जो विसंगतियां देखी गईं, उन्हें त्रिपुरा में किसी भी सूरत में दोहराने नहीं दिया जाएगा।“भाजपा प्रशिक्षण रोकना चाहती थी” —
बर्मन का आरोप विधायक ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा कांग्रेस के बूथ एजेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम को रोकने की कोशिश कर रही थी:लाउडस्पीकर लगाने से मना किया गया कुर्सियाँ और मंच उपलब्ध कराने से इनकार किया गया डेकोरेटर पर दबाव डाला गया“इन अड़चनों के बावजूद हमने खुले आसमान के नीचे कार्यक्रम किया। भाजपा चाहती है कि विपक्ष अपनी तैयारी न कर सके,”
बर्मन ने कहा।
मुख्यमंत्री माणिक साहा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा—“सुशासन के नेता बताएँ कि विपक्ष को राजनीतिक कार्यक्रम करने का अधिकार मिलेगा या नहीं?”
राजनीतिक तापमान बढ़ा — विपक्षी संदेश क्या?
बर्मन का यह बयान ऐसे समय आया है जब:राज्य में मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू होने वाला है विपक्षी लगातार “घुसपैठियों के नाम शामिल करने” का आरोप लगाता रहा है भाजपा विपक्ष पर “ध्रुवीकरण फैलाने” का पलटवार करती रही है
कांग्रेस नेता के इस बयान को विपक्ष का यह संकेत माना जा रहा है कि वे आगामी चुनावों से पहले किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएंगे।सवालों के घेरे में बयान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BLO जैसे प्रशासनिक कर्मचारियों को “पिटाई” की धमकी देना लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था दोनों की मर्यादा का उल्लंघन है। इससे एक तरफ सरकारी तंत्र पर दबाव बनता है, वहीं दूसरी ओर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।
क्या यह “घुसपैठियों को बचाने” पर नई बहस?”
त्रिपुरा में लंबे समय से “घुसपैठ” और “फर्जी मतदाता” बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है।अब जब कांग्रेस नेता खुले तौर पर BLO को धमकी दे रहे हैं, भाजपा यह कह रही है कि विपक्ष असल में “फर्जी मतदाताओं को सूची में बनाए रखने की जमीन तैयार कर रहा है”।यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और भी तेज कर सकता है।
