बी के झा
NSK

पटना/ न ई दिल्ली, 2 फरवरी
पटना के मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत और कथित दरिंदगी का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक संवेदनशीलता और महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन चुका है। घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद भी सच्चाई सामने न आने से जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है, जिसके बीच अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई बेचैनी
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है। छह जनवरी का बताया जा रहा यह लगभग 10.54 सेकेंड का फुटेज शंभू गर्ल्स हॉस्टल का है, जिसमें एक व्यक्ति अचेत अवस्था में छात्रा को गोद में उठाकर ले जाता दिख रहा है। वीडियो में हॉस्टल की चार–पांच छात्राएं पहले कमरे का दरवाजा खटखटाती नजर आती हैं। गेट नहीं खुलने पर एक छात्रा गलियारे में रखी मेज पर चढ़कर दरवाजा खोलती है। इसके बाद दो महिलाएं और एक पुरुष कमरे में प्रवेश करते हैं और अंततः छात्रा को बाहर ले जाया जाता है।
हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद यह सवाल और गहरे हो गए हैं कि छात्रा उस समय किस स्थिति में थी, और उसे गोद में उठाकर ले जाने वाला व्यक्ति कौन था?
एसआईटी की जांच बेनतीजा, सीबीआई की तैयारी
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) को 16 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा के साथ वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस की जांच पर उठते सवालों और बढ़ते दबाव के बाद राज्य सरकार ने इस केस को सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव भेजा है, जो फिलहाल विचाराधीन है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब तक सीबीआई औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में नहीं लेती, तब तक पटना पुलिस साक्ष्य संकलन और बाकी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करती रहेगी। इसी क्रम में केस से जुड़े सभी दस्तावेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान सुरक्षित किए जा रहे हैं।
डीएनए जांच का दायरा बढ़ा
अब तक इस मामले में 25 लोगों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं, जबकि 15 अन्य लोगों के सैंपल लिया जाना बाकी है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि सीबीआई को एक मजबूत आधार सौंपा जा सके।
सरकार का पक्ष: ‘जनभावनाओं के साथ हैं’
उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार इस मामले में जनभावनाओं के साथ खड़ी है। उनके अनुसार, “लोगों को जब पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं रहा, तब सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए एसआईटी का गठन किया और अब मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया गया है। सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी है और उसकी जांच पर किसी को आपत्ति नहीं होगी।”
राजनीतिक विश्लेषक: यह केवल अपराध नहीं, सिस्टम की परीक्षा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी नैतिक और प्रशासनिक परीक्षा बन गया है। उनका कहना है कि “जब एक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा राजधानी के हॉस्टल में सुरक्षित नहीं है, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।”
कानूनविदों की राय: जांच में देरी खुद एक सवाल
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। “अगर साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक जांच में देरी हुई है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए,” एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा।
शिक्षाविद: छात्राओं की सुरक्षा पर भरोसा डगमगाया
शिक्षाविदों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में पढ़ाई के लिए बाहर से आने वाली छात्राओं के अभिभावकों का भरोसा इस घटना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। “शैक्षणिक माहौल तभी पनप सकता है, जब सुरक्षा की गारंटी हो,” उन्होंने कहा।
महिला आयोग की चिंता
राज्य महिला आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आयोग इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और सीबीआई जांच की स्थिति में वह एजेंसी से नियमित रिपोर्ट की मांग करेगा। आयोग ने इस घटना को ‘महिला सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी’ बताया है।
विपक्ष का हमला: सरकार जवाबदेही से बच रही
विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सीबीआई जांच का प्रस्ताव जनदबाव का नतीजा है, न कि सरकार की संवेदनशीलता का। विपक्ष का आरोप है कि “अगर शुरुआत से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होती, तो आज यह मामला इतने सवालों के घेरे में नहीं होता।
”निष्कर्ष:
सच की तलाश और भरोसे की बहाली
शंभू गर्ल्स हॉस्टल की यह घटना अब केवल एक छात्रा की मौत का मामला नहीं रह गई है। यह बिहार में महिला सुरक्षा, पुलिस की कार्यप्रणाली और शासन की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुकी है। सीबीआई जांच से उम्मीद की जा रही है कि सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सिस्टम में ठोस सुधार किए जाएं।
