शालीमार बाग बना दिल्ली का सियासी महायुद्ध– सुबह ‘सीएम पावर शो’, दोपहर में ‘पूर्व CM का पलटवार’; एमसीडी उपचुनाव में राजधानी का तापमान चरम पर

बी के झा

नई दिल्ली, 29 नवंबर

दिल्ली में एमसीडी उपचुनाव भले ही नगर निगम की 12 सीटों के लिए हो रहा हो, लेकिन शालीमार बाग वार्ड ने शनिवार को जिस तरह का दृश्य पेश किया, उसने इसे एक छोटे चुनाव से उठाकर राजधानी की राजनीति के सबसे बड़े रणभूमि का रूप दे दिया।कहने को यह उपचुनाव है, लेकिन असल में यहाँ दो विचारधाराएँ, दो सरकारें और दो सियासी ‘कमांडर’ आमने-सामने हैं—

सुबह मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का शक्ति प्रदर्शन और दोपहर में पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी का जवाबी पलटवार।सुबह का नज़ारा: भगवा का महासैलाब, मुख्यमंत्री का ‘शो ऑफ़ स्ट्रेंथ’शनिवार की सुबह जैसे ही शालीमार बाग के एबी ब्लॉक में सूरज चढ़ा, इलाक़ा भगवामय हो उठा।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बीजेपी प्रत्याशी अनीता जैन के साथ जिस तरह रोड शो किया, उसने साफ कर दिया कि भाजपा इस उपचुनाव को सिर्फ एक निगम सीट नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रही है।

सड़कें भगवा झंडों से पटी दिखीं दुकानों–

घरों की छतों पर मोदी के विशाल कटआउट हवा में लहराते रहेई-रिक्शा, कारों, बाइकों पर कमल के पोस्टर और नारों की गूंज‘दिल्ली बदल रही है, पटरी पर चल रही है’ का जिंगल लगातार बजता रहा मुख्यमंत्री के काफ़िले के साथ इतने एसयूवी और समर्थक नजर आए कि इलाका किसी जीत के जश्न जैसा दिखने लगा।छतों पर खड़े लोग फ़ोन कैमरों में काफ़िले को कैद करते रहे, नीचे सड़कों पर रैली का ऊर्जा स्तर चरम पर था।

संदेश साफ था—सीएम की सीट यहीं से निकली है, अब यह वार्ड भाजपा का ‘गढ़’ होना चाहिए।दोपहर का रंग बदल गया: AAP का पलटवार, पूर्व CM आतिशी ने संभाली कमान दोपहर का सूरज जैसे ही ढलना शुरू हुआ, शालीमार बाग का माहौल नीला-पीला हो गया।आम आदमी पार्टी की ओर से बबीता राना की अगुवाई में जब रैली शुरू हुई, तो दृश्य पूरी तरह बदल चुका था।ढोल-नगाड़ों की था पहला में लहराते आप के झंडे समर्थकों की भारी भीड़और सड़क पर जगह-जगह से बरसती गुलाब की पंखुड़ियाँ सबसे बड़ा आकर्षण रही—

पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की मौजूदगी।उनके आते ही नारे तेज़ हुए:”

काम की राजनीति — बीजेपी की सियासत पर भारी”

“शालीमार बोले—झाड़ू ही अब खोले”AAP कार्यकर्ताओं ने हवा में पर्चे उछालते हुए आरोप लगाया कि BJP “स्थानीय लोगों को गुमराह कर रही है।”आतिशी ने लोगों से सीधा संपर्क कर पूछा—“बिजली–पानी–स्कूल–हॉस्पिटल किसने ठीक किए?

काम किसका दिखता है?”

रैली की धीमी लेकिन बेहद सघन गति ने इलाक़े में ‘आप की मौजूदगी’ का मजबूत संदेश दिया।एक छोटे चुनाव में बड़ी राजनीति—क्यों बना शालीमार बाग ‘हाई प्रोफ़ाइल’ वार्ड?क्योंकि यहीं से निकली भाजपा विधायक रेखा गुप्ता, जो अब दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं इसलिए बीजेपी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न वहीं AAP इसे “दिल्ली मॉडल बनाम भगवा मॉडल” की जंग में बदलना चाहती है दोनों दल इस उपचुनाव को 2027 की तैयारी मान रहे हैं

राजनीतिक जानकारों के अनुसार—“शालीमार बाग अब महज एक वार्ड नहीं रहा, यह दिल्ली की सियासी दिशा तय करने वाला संकेतक बन चुका है।”

निष्कर्ष:

रविवार का मतदान, सोमवार को नतीजे—लेकिन असली चुनाव आज ही दिख गया शालीमार बाग ने शनिवार को जो सियासी तापमान देखा, उसने साफ कर दिया कि:बीजेपी सत्ता की ताकत दिखाना चाहती है AAP जनसंपर्क और जमीनी नेटवर्क पर भरोसा कर रही हैं-यह वार्ड राजधानी की दो सरकारों—मौजूदा और पूर्व—के बीच शक्ति की सबसे सीधी भिड़ंत का अखाड़ा बन चुका है।

NSK

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