सरकार नहीं बनी तो पलटी मार देंगे?” — चिराग पासवान का साफ़-साफ़ जवाब: “मैं कहीं नहीं जाऊंगा, पीएम से प्यार है”

बी के झा

NSK

पटना, 10 नवंबर 2025

बिहार विधानसभा चुनावों के तनावपूर्ण माहौल में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि चुनावी नतीजे किसी भी तरह उन्हें एनडीए/पीएम नरेंद्र मोदी के साथ से अलग नहीं करेंगे।

ANI के साथ बातचीत में चिराग ने सीधे-सीधे कहा — “मैं कहीं नहीं जाऊंगा। मैं पीएम नरेंद्र मोदी से बहुत प्यार करता हूं।”

क्या कहा—सवाल और जवाब की सीधी भाषापॉडकास्ट के दौरान उनसे पूछे गए सवाल काफी सीधे थे: “यदि बिहार में सरकार नहीं बन पाती है तो क्या आप गठबंधन छोड़ देंगे?” चिराग ने तत्काल जवाब दिया कि ऐसा कोई इरादा नहीं है और “जब तक पीएम मोदी हैं, तब तक मैं कहीं नहीं जाऊंगा” — और यह वफादारी उन्होंने बार-बार दोहराई। सवाल पूछा गया कि क्या आप सिर्फ पीएम मोदी की वजह से एनडीए में हैं?

चिराग ने स्वीकार किया: “हाँ, मैं उनकी वजह से यहां हूं।” उनकी भाषा सधे स्वर में रही

प्यार, सम्मान और निष्ठा पर फोकस बार-बार दिखा। राहुल गांधी, ‘जन जी’ और नेपाल का तंज इंटरव्यू में चिराग ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना भी की — विशेषकर तब जब राहुल ने चुनावी हलचल और हार-जीत की स्थितियों में उग्र प्रतिक्रियाओं की बात की। चिराग ने कहा कि यदि कोई नेता “अपनी हार या जीत के लिए देश को जलाने” जैसा आह्वान करेगा तो वह जिम्मेदार राजनीति नहीं होगी और उन्होंने राहुल को नेपाल का उदाहरण सीखने की सलाह देने जैसा व्यंग्य भी किया।

बुजुर्गों का सम्मान और नीतीश कुमार पर टिप्पणियों पर एतराज़

चिराग पासवान ने कहा कि बुजुर्गों का मज़ाक उड़ाना समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई किसी वरिष्ठ नेता—जैसे नीतीश कुमार—की सेहत पर तंज़ करे या उनका अपमान करे, तो लोग उसके खिलाफ खड़े होंगे। यह पारा शिष्टाचार और सम्मान की नीति पर जोर देता दिखा।

तेजस्वी पर कटाक्ष

फिटनेस से जुड़ा संदेश

इंटरव्यू के दौरान तेजस्वी यादव का जिक्र भी आया। चिराग ने कहा कि तेजस्वी एक दौर में एथलीट रहे हैं, पर उनका सुझाव था कि “उन्हें अपनी फिटनेस पर काम करने की ज़रूरत” है — एक व्यंग्यात्मक लेकिन राजनीतिक रूप से तीर-भरा अंदाज़।

पृष्ठभूमि

: सीटों की लड़ाई और 14 नवंबर की निर्णायक तारीख एलजेपी (रामविलास) इस बार राज्य की 29 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है। कई ओपिनियन पोलों ने पार्टी की परफॉर्मेंस को कमजोर दर्शाया है, जिससे बाजार-राजनीति और मीडिया-गठजोड़ में अटकलें तेज़ हुई हैं।

लेकिन चिराग का खुला बयान—“मैं कहीं नहीं जाऊंगा”—उन्हें संभावित पोस्ट-पोल पॉलिटिक्स से अलग दिखाने की कोशिश भी है। इस चुनाव का पलटवार और फाइनल नतीजा 14 नवंबर को तय होगा — वही दिन जब वोटों की गिनती संपन्न होगी और राजनीतिक समीकरण स्पष्ट होंगे।

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं

भावी परिदृश्य

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चिराग के जो जवाब मिले, वे सतह पर निर्णायक और आत्मविश्वास से भरे दिखते हैं — पर चिराग की राजनीति की विरासत, उनके दिवंगत पिता की छवि और स्थानीय समीकरण यह बताते हैं कि 14 नवंबर के बाद ही असली कहानी सामने आएगी। कुछ राजनीतिक पंडितों की टिप्पणी यह भी है कि चिराग के शब्द—‘प्यार’, ‘निष्ठा’ और ‘इज्जत’—दिखावे में सरल हैं, पर असल शक्ति संतुलन वही तय करेगा जो वोट-पर्ची बताएगा।लेखांकन में एक रंगीन टिप्पणी यह भी जोड़ी जा रही है:

क्या चिराग का अगला कदम “हनुमान वाली” (अटूट निष्ठा) या “विभिषण वाली” (राजनीतिक मोड़) होगा—यह भविष्य के राजनीतिक नाट्य का दिलचस्प मोड़ होगा। (विश्लेषकों ने यह तुलना प्रतीकात्मक रूप में की है; असल निर्णय वोटों और पोस्ट-पोल मोल-भाव पर निर्भर करेगा।)

निष्कर्ष

बयान भी रणनीति, इरादा भी संदेश

चिराग पासवान का यह स्पष्ट और बार-बार दोहराया गया रुख

एनडीए में बने रहने का वादा और पीएम मोदी के प्रति निष्ठा

इस वक्ती राजनीतिक परिदृश्य में एक संदेश है: जहां चुनावी रिपोर्ट्स और ओपिनियन पोल अस्थिरता दिखाते हैं, वहीं नेताओं के वक्तव्य मतदाता और गठबंधन दोनों पर असर डालते हैं।

14 नवंबर के बाद जो भी तस्वीर उभरेगी, वही तय करेगा कि चिराग का वचन कितनी वास्तविक राजनीतिक मजबूरी या रणनीति था।

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