बी के झा
NSK

साबरकांठा (गुजरात), / नई दिल्ली 18 अक्टूबर
शनिवार
गुजरात के साबरकांठा जिले में शुक्रवार रात दो समुदायों — पाटीदार और ठाकोर समाज — के बीच जबरदस्त हिंसक झड़प हो गई। झड़प इतनी भयानक थी कि गांव मंजरा युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया। चारों ओर से पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं।इस दौरान कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि कई वाहनों के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। ग्रामीणों में दहशत का माहौल फैल गया और लोग अपने घरों में दुबक गए। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।
कैसे भड़की हिंसा जानकारी के अनुसार, झड़प की शुरुआत भैरवनाथ मंदिर के प्रबंधन विवाद को लेकर हुई। मंदिर समिति को लेकर दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। शुक्रवार रात यह विवाद अचानक भड़क उठा, जिसके बाद दोनों ओर से भारी पथराव शुरू हो गया। कुछ ही देर में आगजनी और वाहनों में तोड़फोड़ भी होने लगी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि माहौल इतना भयावह था कि “चारों तरफ धुआँ और चीख-पुकार” फैल गई। महिलाएँ और बच्चे अपने घरों में छिप गए, जबकि पुरुष गांव छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर भागने लगे।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही हिम्मतनगर और प्रांतिज थानों की पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने तत्काल स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागे।साबरकांठा पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हिंसा में शामिल करीब 110 से 120 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। इलाके में शांति बहाली के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी,”अधिकारी ने कहा।फिलहाल, 10 से 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ को हिम्मतनगर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने गांव में फ्लैग मार्च भी निकाला और रातभर पेट्रोलिंग जारी रखी।
रंजिश की जड़ में ‘मंदिर प्रबंधन’स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, भैरवनाथ मंदिर के संचालन और दान राशि के बंटवारे को लेकर दोनों समुदायों के बीच महीनों से विवाद चल रहा था। पंचायत के स्तर पर सुलह की कोशिशें हुईं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। शुक्रवार को इसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई और मामला हिंसा में बदल गया।
प्रशासन की अपील — “शांति बनाए रखें”घटना के बाद जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों समुदायों के नेताओं के साथ बैठक कर शांति की अपील की।
जिला प्रशासन ने कहा कि दोषियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज और मोबाइल वीडियो की जांच की जा रही है।> “कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा,”पुलिस अधीक्षक ने कहा।
ग्रामीणों में भय, लेकिन सामान्य होती जिंदगी
शनिवार सुबह तक गांव में सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोग अपने घरों से बाहर निकलने में झिझक रहे हैं। वहीं प्रशासन के मुताबिक स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। कुछ दुकाने और बाजार दोपहर तक खोल दिए गए।
निष्कर्ष
साबरकांठा का यह ताज़ा विवाद दिखाता है कि स्थानीय धार्मिक या सामाजिक मतभेद कैसे पल भर में हिंसक रूप ले सकते हैं। सौभाग्य से पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने बड़ा हादसा टाल दिया।
अब सवाल यह है कि प्रशासन इन “स्थायी रंजिशों” को कैसे खत्म करेगा ताकि भविष्य में मंजरा जैसे गांवों में शांति कायम रह सके।
