बी के झा
मुंबई / न ई दिल्ली, 31 जनवरी
महाराष्ट्र की राजनीति ने शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखा, जिसमें इतिहास, शोक और सत्ता—तीनों एक साथ उपस्थित थे। दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने मुंबई के लोक भवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें शपथ दिलाई।
इस क्षण के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीतिक यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया।
लोक भवन में सत्ता का दृश्य, चेहरे पर निजी पीड़ा शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, भाजपा और एनसीपी के वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक मौजूद थे। सत्ता का पूरा प्रतिष्ठान मंच पर था, लेकिन मंच के केंद्र में खड़ी सुनेत्रा पवार के चेहरे पर विजय का उत्साह नहीं, बल्कि गहरा शोक स्पष्ट दिख रहा था।
सफेद साड़ी में सजी सुनेत्रा पवार की आंखों में अपने जीवनसाथी को खोने का दर्द साफ झलक रहा था।यह केवल एक शपथ नहीं थी—यह उस महिला का सार्वजनिक उत्तरदायित्व स्वीकार करना था, जिसने कुछ ही दिन पहले अपना जीवनसाथी खोया था।
अजित पवार की स्मृति के साथ सत्ता की जिम्मेदारी
शपथ लेने से पहले सुनेत्रा पवार ने अपने सरकारी आवास देवगिरी बंगले में दिवंगत अजित पवार की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आकस्मिक निधन हुआ था। उनकी मृत्यु ने न केवल परिवार को, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति को भी गहरे झटके में डाल दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—
“सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना किसी महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक अनिवार्यता है।”विधायक दल की नेता से उपमुख्यमंत्री तकशपथ ग्रहण से पहले एनसीपी विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद ही उनके उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।पार्टी नेताओं का कहना है कि—अजित पवार द्वारा खड़ी की गई पार्टी को टूटने से बचाने सरकार की स्थिरता बनाए रखनेऔर कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला जरूरी था।
बारामती से उपचुनाव की तैयारी?
सुनेत्रा पवार फिलहाल राज्यसभा सांसद बनी रहेंगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वे बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। विधानसभा से निर्वाचित होने के बाद उन्हें संवैधानिक नियमों के तहत 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन से इस्तीफा देना होगा।राज्यसभा से इस्तीफे पर पार्टी बाद में निर्णय लेगी।यह संकेत देता है कि सुनेत्रा पवार की भूमिका केवल अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक जिम्मेदारी की ओर बढ़ रही है।
शरद पवार और सुप्रिया सुले की दूरी:
राजनीति का मौन संदेश
इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह से शरद पवार और सुप्रिया सुले की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह दूरी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक असहमति का संकेत है।सूत्रों का कहना है कि—अजित पवार चाहते थे कि एनसीपी के दोनों गुट एक होंइस पर बातचीत चल रही थीलेकिन अचानक हुई मृत्यु ने पूरी प्रक्रिया को अधूरा छोड़ दियाअब पवार परिवार और एनसीपी के भविष्य को लेकर निर्णय की चाबी एक बार फिर शरद पवार के हाथ में मानी जा रही है।
महिला नेतृत्व और महाराष्ट्र की राजनीति
सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है। यह महाराष्ट्र की राजनीति में महिला नेतृत्व के एक नए दौर की शुरुआत भी है।
वरिष्ठ समाजसेवियों और शिक्षाविदों का मानना है—
“यह पद उन्हें केवल सत्ता नहीं, बल्कि संघर्ष, संतुलन और संवेदनशीलता की परीक्षा देगा।”
निष्कर्ष
: शोक से इतिहास तक का सफरसुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण—एक परिवार के दुख एक पार्टी की मजबूरीऔर एक राज्य की राजनीतिक जरूरततीनों का संगम है।
वे आज महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं,लेकिन उनके सामने चुनौती केवल सरकार चलाने की नहीं,बल्कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को संभालने और एनसीपी को भविष्य की दिशा देने की भी है।
महाराष्ट्र ने इतिहास बनते देखा है—
अब देखना यह है कि यह इतिहास किस दिशा में आगे बढ़ता है।
NSK





