सोनिया गांधी को कोर्ट से नोटिस, कंगना का तीखा हमला— “बिना नागरिकता वोट डाला”; कांग्रेस ने बताया झूठ, राजनीतिक तूफ़ान तेज़

बी के झा

नई दिल्ली, 9 दिसंबर

दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को जारी नोटिस ने देश की सियासत में नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। मामला 1980–81 की मतदाता सूची में उनके कथित नाम को लेकर दाखिल रिवीजन याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही वोट डाला था।इसी आरोप को आधार बनाकर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने गांधी परिवार पर करारा हमला बोला है, जबकि कांग्रेस ने इसे “झूठ, दुष्प्रचार और राजनीतिक टार्गेटिंग” बताया है।

कंगना रनौत का दावा: “बिना नागरिकता वोट डाला, संविधान का अपमान किया”सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:कांग्रेस भ्रष्टाचार के लिए जानी जाती है। सोनिया गांधी ने नागरिकता के बिना ही वोट डाला। एक राजनीतिक परिवार होते हुए भी कानून को जूते की नोंक पर रखा गया। ये लोग खुद को बाबू और साहब समझते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस राजनीतिक प्रभाव और संसाधनों के बीच गांधी परिवार रहा है, उसके लिए नागरिकता प्राप्त करना “एक घंटे का काम” था, लेकिन:इन लोगों ने जानबूझकर कानून तोड़ा। सरकार को उदाहरण सेट करना चाहिए ताकि कोई भी ‘बड़ा आदमी’ नियमों को धता न बता सके।”

कांग्रेस का पलटवार: “झूठ की राजनीति, सोनिया गांधी के योगदान पर सवाल देश का अपमान”सोनिया गांधी की बेटी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा:यह दावा पूरी तरह झूठ है। उन्होंने वोट तब ही डाला, जब वे भारतीय नागरिक बनीं। प्रमाण मौजूद है। वे 80 वर्ष की होने वाली हैं और उन्होंने उम्र भर देश की सेवा की है।कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा द्वारा “राजनीतिक विचलन पैदा करने की रणनीति” बताया।

शिक्षाविद का तंज: “

रोहिंग्या–बांग्लादेशी कार्ड फेल, अब संस्थाओं पर हमला”एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने इस विवाद पर कहा:आज इन दलों को इसलिए मिर्ची लग रही है क्योंकि वर्षों तक फर्जी दस्तावेज़ों के दम पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों को वोट बैंक बनाया गया। जब समय बदल गया और संस्थाएँ सख्त हुईं, तो ये लोग चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर हमलावर हो गए।”उन्होंने कहा कि जनता अब “सतर्क और जागरूक” है, इसलिए ऐसे मुद्दों पर “भीड़ को भ्रमित करना आसान नहीं रहा।”

राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया

1. कानूनी प्रक्रिया का राजनीतिकरण— चुनावी मौसम की पदचाप?राजनीतिक विश्लेषक डॉ. विवेक आनंद कहते हैं:किसी पुराने आरोप पर नोटिस जारी होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसे तुरंत राजनीतिक हथियार बनाना बताता है कि चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। यह मामला न्यायालय में तय होना चाहिए, न कि टीवी बहसों में।

”2. गांधी परिवार पर हमले— भाजपा की ‘फोकस्ड स्ट्रैटेजी’चुनाव अध्ययन विशेषज्ञ राकेश भटनागर का मानना है:भाजपा का लंबा विमर्श यह रहा है कि गांधी परिवार खुद को नियमों से ऊपर मानता है। कंगना के बयान इस नैरेटिव को और तेज़ करते हैं। यह एक राजनीतिक रणनीति है— व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर चोट करने की।

3. कांग्रेस की चिंता— नैरेटिव की लड़ाई ज्यादा मुश्किलजाने-माने विश्लेषक सौरभ मिश्र कहते हैं:कांग्रेस कानूनी रूप से मजबूत हो सकती है, लेकिन पब्लिक नैरेटिव में उसे तेजी से जवाब देना होगा। आज का माहौल ऐसा है कि आधा सच भी पूरे झूठ की तरह वायरल हो जाता है।”

4. ‘विदेशी मूल’ का पुराना मुद्दा— क्या फिर से केंद्र में?1990 के दशक से गांधी परिवार पर विदेशी मूल का मुद्दा उठता रहा है।विश्लेषक डॉ. रेखा त्रिपाठी कहती हैं:यह केवल कानूनी नहीं, सांस्कृतिक–राजनीतिक विमर्श भी है। भाजपा इसे राष्ट्रीय अस्मिता के मुद्दे से जोड़कर देखती है, जबकि कांग्रेस इसे सियासी उत्पीड़न बताती है। यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज़ होगा।”

निष्कर्ष:

अदालत का नोटिस— राजनीति का ईंधनराऊज़ एवेन्यू कोर्ट का यह नोटिस कानूनी प्रक्रिया का साधारण भाग है, लेकिन सियासी दुनिया में यह एक बड़ा गोला बन चुका है।कंगना रनौत का आक्रामक बयान, कांग्रेस का प्रतिवाद, और विश्लेषकों की चेतावनी—

ये तीनों संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में यह मुद्दा सिर्फ अदालतों में नहीं, बल्कि चुनावी सभाओं, टीवी डिबेटों और सोशल मीडिया की लड़ाई में भी केंद्र में रहेगा।सवाल यह है:क्या यह मामला वास्तविक कानूनी सत्य तक पहुँचेगा?

या फिर केवल राजनीति की गर्मी बढ़ाने का हथियार बनेगा?

NSK

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