स्कूल में वंदे मातरम का विरोध करने वाला टीचर सस्पेंड, अब मुकदमा दर्ज — योगी सरकार ने कहा: राष्ट्रगीत का अपमान बर्दाश्त नहीं, अलीगढ़ के सरकारी स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान हुआ हंगामा, शिक्षा विभाग और पुलिस एक्शन में

बी के झा

NSK

अलीगढ़/लखनऊ, 13 नवंबर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के दो दिन बाद ही अलीगढ़ के एक सरकारी स्कूल से ऐसी खबर आई जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया। विकास खंड लोधा के उच्च प्राथमिक विद्यालय शाहपुर कुतुब में बुधवार सुबह प्रार्थना सभा के दौरान सहायक अध्यापक शमसुल हसन ने ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे का विरोध कर दिया।

इस घटना से विद्यालय में तनाव फैल गया और शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया। अब उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया है और विभागीय जांच जारी है।

वंदे मातरम पर विरोध से भड़का माहौल जानकारी के मुताबिक, सुबह की प्रार्थना सभा में जब अध्यापक चंद्रपाल सिंह ने बच्चों से ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगवाए, तो सहायक अध्यापक शमसुल हसन ने इसका विरोध किया।गवाहों के मुताबिक, हसन ने कहा कि “हमारे मजहब में वंदे मातरम कहना उचित नहीं है।”प्रधानाध्यापिका सुषमा रानी ने बताया कि इस बयान से स्कूल में तनाव बढ़ गया, बच्चे और शिक्षक दोनों असहज हो गए।सूचना मिलते ही

बीएसए डॉ. राकेश सिंह मौके पर पहुंचे और जांच कर हसन को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।

टीचर ने दी धमकी, कहा

मुस्लिम बच्चों के सामने ‘वंदे मातरम’ नहीं चलेगा घटना यहीं नहीं रुकी। प्रार्थना सभा के बाद अध्यापक चंद्रपाल सिंह ने पुलिस में तहरीर दी कि विरोध के दौरान शमसुल हसन ने उन्हें धमकाया भी।चंद्रपाल ने बताया, “

मैंने कहा कि बाकी स्कूलों में भी वंदे मातरम होता है, तो हसन बोला —

यहां मुस्लिम बच्चे हैं, मैं सभी मुसलमानों को बुलाकर तेरी बेइज्जती कराऊंगा, स्कूल में घुसने नहीं दूंगा।”इस धमकी के बाद चंद्रपाल ने अपनी जान का खतरा जताया।पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में रोरावर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है।एएसपी मयंक पाठक ने बताया कि, “सहायक अध्यापक शमसुल हसन पर राष्ट्रगीत के विरोध और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। विभागीय जांच भी जारी है।”पुलिस अब हसन के बयान, मोबाइल रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की जांच कर रही है।

योगी सरकार ने दिए सख्त संदेश मुख्यमंत्री

योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के मौके पर आयोजित एकता यात्रा के दौरान घोषणा की थी कि —उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा। कोई मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता।मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद ही राज्य के सभी जिलों में आदेश लागू कर दिया गया था।

अलीगढ़ की यह घटना उसी आदेश की खुली अवहेलना मानी जा रही है।

कट्टरपंथी सोच की जांच की मांग

घटना के बाद स्थानीय समाजसेवियों, शिक्षाविदों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि यह सिर्फ निलंबन का मामला नहीं है, बल्कि एक कट्टरपंथी मानसिकता की गहराई से जांच होनी चाहिए।वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. हरिशंकर अवस्थी ने कहा,एक सरकारी कर्मचारी, वह भी अध्यापक, अगर राष्ट्रगीत का विरोध करता है तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं बल्कि मानसिक कट्टरता का संकेत है। सरकार को यह जांच करनी चाहिए कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित सोच या नेटवर्क तो नहीं।

शिक्षा विभाग भी हुआ सख्त

बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि,सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान और वंदे मातरम का गायन सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है। इसका विरोध या अवमानना किसी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी विद्यालय में ऐसी हरकत पाई गई, तो कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

वंदे मातरम विवाद से उठे सवालयह घटना सिर्फ एक शिक्षक का अनुशासनहीन व्यवहार नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जो “धर्म के नाम पर राष्ट्र से टकराने” की हिम्मत दिखा रही है।योगी सरकार के आदेश के बाद यह पहला बड़ा मामला है जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया है —क्या हमारे स्कूलों में कुछ लोग बच्चों को ‘राष्ट्रभक्ति’ के बजाय ‘विभाजन’ की सीख दे रहे हैं?

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